महाराष्ट्र में कथित ₹160 करोड़ वेतन घोटाले की जांच में फर्जी नियुक्ति दस्तावेजों और शालार्थ आईडी के जरिए सरकारी वेतन निकालने के आरोप सामने आए हैं।

फर्जी नियुक्ति, नकली मंजूरी और सरकारी वेतन: महाराष्ट्र में ₹160 करोड़ के कथित वेतन घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा

Team The420
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नासिक (महाराष्ट्र): महाराष्ट्र में कथित ₹160 करोड़ के वेतन घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। नासिक पुलिस की अपराध शाखा ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संजय भास्करराव गरुड़ को फर्जी नियुक्ति दस्तावेज, जाली अनुमोदन आदेश और कथित रूप से गलत तरीके से तैयार की गई शालार्थ आईडी के जरिए सरकारी वेतन हासिल करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इस कथित घोटाले में 177 शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सरकारी वेतन दिलाने के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की गई।

पुलिस के अनुसार, आरोपी संजय भास्करराव गरुड़ को सोलापुर जिले स्थित एक फार्महाउस से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे नासिक अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। जांच एजेंसियां अब कथित नेटवर्क, फर्जी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और इससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही हैं।

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जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गरुड़ शेंदुर्णी एजुकेशन को-ऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े हैं, जो कई शैक्षणिक संस्थानों का संचालन करती है। इस संस्था के अंतर्गत 15 स्कूल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। प्राथमिकी में शामिल 177 शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी इन्हीं संस्थानों से जुड़े बताए जा रहे हैं।

पुलिस का आरोप है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जरूरी सरकारी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी। नियुक्ति प्रस्तावों को शिक्षा विभाग और जिला परिषद के माध्यमिक शिक्षा अधिकारी के पास भेजे बिना ही कथित तौर पर फर्जी अनुमोदन आदेश तैयार किए गए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल ऑनलाइन शालार्थ प्रणाली में अपलोड कर कर्मचारियों के लिए शालार्थ आईडी बनाने में किया गया।

क्या है शालार्थ आईडी घोटाला?

महाराष्ट्र में शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को सरकारी वेतन प्राप्त करने के लिए शालार्थ आईडी जरूरी होती है। यह आईडी तभी जारी की जाती है जब कर्मचारी की नियुक्ति शिक्षा विभाग द्वारा सत्यापित और स्वीकृत हो।

जांच एजेंसियों का आरोप है कि कथित आरोपियों ने बिना आवश्यक मंजूरी के फर्जी नियुक्ति अनुमोदन पत्र और शालार्थ स्वीकृति दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद इन दस्तावेजों को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर ऐसे कर्मचारियों की आईडी तैयार कराई गई, जो सरकारी वेतन के लिए पात्र नहीं थे।

पुलिस के अनुसार, इन कथित फर्जी शालार्थ आईडी के माध्यम से कर्मचारियों को सरकारी खजाने से वेतन और अन्य वित्तीय लाभ दिलाए गए। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस प्रक्रिया से कुल कितनी सरकारी राशि जारी हुई और इसका लाभ किन लोगों तक पहुंचा।

रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की आशंका

जांच के दौरान शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक), जलगांव की रिपोर्ट में रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई है। वहीं, नासिक स्थित उप शिक्षा निदेशक कार्यालय की जांच में भी कथित तौर पर कई शालार्थ स्वीकृति आदेशों की प्रमाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी की ओर से 177 कर्मचारियों की ज्वाइनिंग रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई थीं, जिनमें नियुक्ति वर्ष 2011 से 2013 के बीच दिखाई गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि इनमें से 147 ज्वाइनिंग रिपोर्ट कथित तौर पर एक ही दिन तैयार की गईं। इससे दस्तावेजों की वास्तविकता और प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।

सरकारी धन के इस्तेमाल की जांच

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कितनी राशि सरकारी खजाने से जारी की गई और इस राशि का वास्तविक लाभार्थी कौन था। पुलिस 15 स्कूलों के प्रशासनिक अधिकारियों, प्रधानाचार्यों, कर्मचारियों और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि क्या किसी व्यक्ति ने इस कथित प्रक्रिया से आर्थिक लाभ हासिल किया या फिर सरकारी व्यवस्था में शामिल किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका रही।

संगठित अपराध की धारा में जांच

इस मामले में कई अन्य लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत संगठित अपराध से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कथित तौर पर यह पूरा मामला सुनियोजित तरीके से सरकारी प्रणाली और ऑनलाइन शालार्थ पोर्टल के दुरुपयोग से जुड़ा हो सकता है।

फिलहाल पुलिस दस्तावेजों की जांच, वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल और कथित नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने पर मामले में अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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