गुजरात ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में 1930 हेल्पलाइन शिकायत के आधार पर स्वतः e-Zero FIR दर्ज करने की व्यवस्था शुरू की है।

डिजिटल अरेस्ट से लेकर ऑनलाइन ठगी तक, अब घर बैठे दर्ज होगी FIR: गुजरात ने शुरू की e-Zero FIR व्यवस्था

Team The420
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गांधीनगर: साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से निपटने और पीड़ितों को त्वरित कानूनी राहत उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गुजरात सरकार ने Cyber Financial Fraud e-Zero FIR प्रणाली शुरू की है। नई व्यवस्था के तहत अब राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर दर्ज होने वाली साइबर वित्तीय ठगी की शिकायतों के आधार पर स्वतः e-Zero FIR तैयार होगी और उसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से संबंधित पुलिस थाने को भेज दिया जाएगा। इससे पीड़ितों को प्रारंभिक शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाने की आवश्यकता नहीं होगी और जांच प्रक्रिया बिना किसी अनावश्यक देरी के शुरू की जा सकेगी।

इस नई व्यवस्था का औपचारिक शुभारंभ गांधीनगर में गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने किया। यह प्रणाली केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) के सहयोग से विकसित की गई है। अधिकारियों के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध के शुरुआती चरण में कार्रवाई तेज करना, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और ठगी की रकम को समय रहते फ्रीज या रिकवर करने की संभावना बढ़ाना है।

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सरकार के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, फर्जी ट्रेडिंग, यूपीआई फ्रॉड, बैंकिंग धोखाधड़ी, क्रेडिट कार्ड फ्रॉड या किसी अन्य साइबर वित्तीय अपराध का शिकार होता है और 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराता है, तो शिकायत के आधार पर स्वतः Zero FIR तैयार होकर संबंधित पुलिस स्टेशन को भेज दी जाएगी। इसके बाद संबंधित थाना विधिक प्रक्रिया के अनुरूप नियमित FIR दर्ज कर तत्काल जांच शुरू करेगा।

उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि राज्य सरकार तकनीक के माध्यम से पुलिस व्यवस्था को अधिक तेज, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उनके अनुसार e-Zero FIR प्रणाली से साइबर ठगी के पीड़ित घर बैठे शिकायत दर्ज करा सकेंगे और शुरुआती स्तर पर त्वरित कार्रवाई होने से ठगी गई राशि बचाने या उसे वापस दिलाने की संभावना पहले की तुलना में अधिक बढ़ेगी।

गुजरात पुलिस महानिदेशक (DGP) ज्ञानेंद्र सिंह मलिक ने राज्यभर की सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायतों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लिया जाए। उन्होंने अधिकारियों से नई प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा शिकायतकर्ताओं को समयबद्ध न्याय दिलाने के लिए प्रत्येक मामले में तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।

राज्य के Cyber Centre of Excellence के प्रमुख पुलिस महानिरीक्षक (IGP) बिपिन आहिरे ने बताया कि e-Zero FIR प्रक्रिया I4C के साथ समन्वय में विकसित की गई है। उनके अनुसार 1930 हेल्पलाइन पर प्राप्त प्रत्येक साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के आधार पर स्वतः Zero FIR तैयार होगी और उसे संबंधित पुलिस स्टेशन तक डिजिटल माध्यम से भेज दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस अधिकारी शिकायतकर्ता से संपर्क कर आवश्यक जानकारी प्राप्त करेंगे, विधिक प्रक्रिया के अनुसार FIR दर्ज करेंगे और बिना देरी के जांच शुरू करेंगे।

नई प्रणाली के तहत दर्ज पहले मामले में अहमदाबाद के एक निवासी को कथित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का निशाना बनाया गया था। पीड़ित की शिकायत e-Zero FIR प्रणाली के माध्यम से दर्ज होने के बाद साइबर क्राइम विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ₹15.76 लाख से अधिक की संभावित वित्तीय हानि को रोकने में सफलता प्राप्त की। अधिकारियों का कहना है कि साइबर वित्तीय अपराधों में शुरुआती घंटों के भीतर कार्रवाई होने से रकम बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में समय सबसे बड़ा हथियार होता है। यदि पीड़ित घटना के तुरंत बाद 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करता है और पुलिस तत्काल कानूनी प्रक्रिया शुरू कर देती है, तो संदिग्ध बैंक खातों में पहुंची राशि को फ्रीज करने और उसकी रिकवरी की संभावना काफी बढ़ जाती है। उनके अनुसार e-Zero FIR जैसी डिजिटल व्यवस्था शिकायत दर्ज होने और जांच शुरू होने के बीच लगने वाले समय को कम करती है, जिससे डिजिटल अरेस्ट, निवेश धोखाधड़ी, यूपीआई फ्रॉड और अन्य ऑनलाइन वित्तीय अपराधों के मामलों में अधिक प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर अपराधी अक्सर शिकायत दर्ज होने में हुई देरी का फायदा उठाकर रकम को कई बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट के जरिए तेजी से स्थानांतरित कर देते हैं। ऐसे में शिकायत और पुलिस कार्रवाई के बीच का समय कम करना साइबर अपराध नियंत्रण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। e-Zero FIR प्रणाली इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

गुजरात सरकार का कहना है कि भविष्य में इस प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी सुधार किए जाएंगे, ताकि शिकायतों का डिजिटल प्रसंस्करण, बैंक समन्वय और जांच प्रक्रिया पहले से अधिक तेज हो सके। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में बिना देरी किए तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, क्योंकि त्वरित सूचना ही ठगी गई राशि बचाने और अपराधियों तक शीघ्र पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

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