वाराणसी। उत्तर प्रदेश की साइबर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह ने एक बुनकर की पत्नी के बैंक खाते का इस्तेमाल कर देश के 10 अलग-अलग राज्यों से 43 ट्रांजेक्शन के जरिए ₹2.29 करोड़ की ठगी की रकम मंगाई थी। पुलिस के अनुसार, पूरे नेटवर्क के माध्यम से कुल ₹2.42 करोड़ का संदिग्ध लेन-देन किया गया, जिसमें से ₹2.09 करोड़ की राशि समय रहते विभिन्न बैंक खातों में होल्ड करा दी गई।
मामले का खुलासा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज 51 शिकायतों की जांच के दौरान हुआ। विभिन्न राज्यों से दर्ज साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में कुछ बैंक खातों में लगातार बड़ी रकम जमा होने की जानकारी सामने आई। जांच का दायरा बढ़ने पर साइबर पुलिस की टीम ने वाराणसी में सक्रिय एक संगठित गिरोह का पता लगाया और उसके सदस्यों को चिन्हित कर कार्रवाई शुरू की।
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पुलिस ने इस मामले में मोहम्मद उनैश, अजीत कुमार पटेल, आरिफ जमाल, आशीष कुमार गौड़, सत्यम यादव और शुभम सिंह को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपियों को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि गिरोह का स्थानीय संचालन शुभम सिंह कर रहा था, जिसे पुलिस इस मॉड्यूल का सरगना मान रही है। उसे कथित तौर पर बड़े साइबर ठगों से निर्देश प्राप्त होते थे। इसके बाद वह मजदूरों, वाहन चालकों, बुनकरों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाता था। इन खातों का उपयोग बाद में साइबर अपराध से प्राप्त धनराशि को जमा करने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
पुलिस के अनुसार, खाताधारकों को प्रत्येक बड़े ट्रांजेक्शन के बदले लगभग ₹10,000 तक का कमीशन दिया जाता था। इस तरह के बैंक खातों को साइबर अपराध की दुनिया में “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है। इन खातों के जरिए असली अपराधी अपनी पहचान छिपाकर ठगी की रकम को कई स्तरों पर घुमाते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए अंतिम लाभार्थी तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
जांच में सबसे महत्वपूर्ण खाता राजदा बीबी के नाम पर मिला, जिसमें कुल ₹2.29 करोड़ की राशि 43 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से जमा की गई थी। राजदा बीबी एक गृहिणी हैं और पुलिस के अनुसार उनके बैंक खातों का संचालन उनके पति मोहम्मद उनैश द्वारा किया जाता था। इसी आधार पर पुलिस ने उनैश को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच के तहत राजदा बीबी से भी पूछताछ की जाएगी।
इसके अलावा रोहनिया निवासी अजीत कुमार पटेल के खाते में चार बार में ₹22 लाख जमा किए गए थे। वहीं जैतपुरा निवासी आरिफ जमाल के खाते में ₹1 लाख का ट्रांजेक्शन पाया गया, जिसका लेन-देन पूरा हो चुका था। पुलिस अन्य खातों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भी जांच कर रही है।
साइबर पुलिस, बैंकिंग संस्थानों और विभिन्न थाना क्षेत्रों की संयुक्त कार्रवाई के चलते कुल ₹2.42 करोड़ में से ₹2.09 करोड़ की राशि फ्रीज करा ली गई। केवल राजदा बीबी के खाते में आई ₹2.29 करोड़ की रकम में से लगभग ₹2 करोड़ होल्ड कराए गए, जबकि करीब ₹29 लाख पहले ही विभिन्न माध्यमों से निकाले या ट्रांसफर किए जा चुके थे। अजीत कुमार के खाते से भी ₹6 लाख की राशि सुरक्षित कर ली गई।
मामले की जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन के संकेत भी मिले हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ठगी की कुछ रकम म्यूल खातों के जरिए विदेश, विशेष रूप से दुबई, तक भेजी गई हो सकती है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि धनराशि किन विदेशी खातों में पहुंची और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि म्यूल अकाउंट नेटवर्क आज साइबर ठगी के सबसे बड़े हथियार बन चुके हैं और इनके जरिए अपराधी देश-विदेश में धनराशि का तेजी से ट्रांसफर कर जांच को जटिल बना देते हैं। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह पिछले तीन वर्षों से सक्रिय था और अब इसके पूरे नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।
