ईडी की जांच में पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से जुड़े कथित फर्जी GST नेटवर्क में 27 शेल कंपनियों और हजारों करोड़ की नकद निकासी का खुलासा हुआ है।

₹3,000 करोड़ के फर्जी GST और नकद निकासी घोटाले का पर्दाफाश: ईडी की जांच में 27 शेल कंपनियों का खुलासा

Team The420
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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पंजाब के फतेहगढ़ साहिब से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश करते हुए लगभग ₹3,089.57 करोड़ की संदिग्ध नकद निकासी, फर्जी जीएसटी बिलिंग और अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने दर्जनों शेल कंपनियों का जाल बिछाकर फर्जी कारोबार दिखाया, नकली चालान तैयार किए और बैंकिंग प्रणाली का इस्तेमाल कर भारी मात्रा में धन का लेन-देन किया। मामले में पांच लोगों को नामजद किया गया है, जबकि दो अन्य की पहचान अभी की जा रही है।

ईडी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी का आरोप है कि यह एक सुनियोजित नेटवर्क था, जिसमें कई फर्जी फर्मों को समान पते, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी के आधार पर संचालित किया जा रहा था।

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जांच में जिन प्रमुख आरोपियों के नाम सामने आए हैं उनमें मंडी गोबिंदगढ़ निवासी अमित कुमार गोयल, उनके भाई मनीष कुमार, गौरव अग्रवाल तथा फतेहगढ़ साहिब के लोहार माजरा गांव निवासी गुरदीप सिंह और बलवंत सिंह शामिल हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन लोगों ने मिलकर एक ऐसा तंत्र तैयार किया जिसके जरिए फर्जी जीएसटी चालानों के आधार पर अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया और बड़ी मात्रा में धन को विभिन्न खातों के माध्यम से घुमाया गया।

ईडी के अनुसार, आरोपियों ने कई फर्जी कंपनियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उनमें आरटीजीएस के माध्यम से बड़ी रकम प्राप्त की। इसके बाद धनराशि को कई स्तरों पर ट्रांसफर करते हुए कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) से जुड़े बैंक खातों में भेजा गया। वहां से भारी मात्रा में नकद निकासी की गई। एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य आयकर कानून की धारा 194एन के तहत लागू टीडीएस प्रावधानों से बचना और धन के वास्तविक स्रोत को छिपाना था।

जांच में सामने आया कि कुल 25 बैंक खातों के जरिए ₹3,089.57 करोड़ की नकद निकासी की गई। इनमें कुछ प्रमुख फर्मों के खातों से असाधारण रूप से बड़ी रकम निकाले जाने के प्रमाण मिले हैं। एजेंसी के अनुसार, भौला एंड संस के खाते से ₹354.36 करोड़, मनदीप सिंह एंड संस से ₹327.17 करोड़, जयपाल एंड संस से ₹257.02 करोड़, सुनील एंटरप्राइज से ₹237.12 करोड़, सिंह ट्रेडिंग कंपनी से ₹198.10 करोड़, जगदंबा एंटरप्राइजेज से ₹197.35 करोड़ तथा गुरमन ट्रेडर्स से ₹159.35 करोड़ की नकद निकासी दर्ज की गई।

ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत की गई जांच में बैंक खातों और लेन-देन के विस्तृत विश्लेषण के दौरान पाया कि धनराशि पहले फर्जी कंपनियों के खातों में जमा होती थी और फिर कई परतों के जरिए एपीएमसी खातों तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद नकद निकासी कर धन को कथित लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था।

मामले में जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की जांच भी महत्वपूर्ण साबित हुई। डीजीजीआई की जांच में सामने आया कि अमित कुमार गोयल, मनीष कुमार और उनके सहयोगियों ने कथित तौर पर 27 फर्जी फर्में बनाकर अवैध आईटीसी हासिल की। जांच एजेंसियों के अनुसार, इन फर्मों के जरिए ₹720.97 करोड़ की फर्जी बिलिंग दिखाई गई और लगभग ₹108.49 करोड़ का अवैध इनपुट टैक्स क्रेडिट प्राप्त किया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा।

छापेमारी के दौरान जांच एजेंसियों ने 54 चेकबुक, 46 एटीएम कार्ड, पांच मतदाता पहचान पत्र, 11 पैन कार्ड, सात मुहरें, कई मोबाइल फोन, हार्ड डिस्क, लैपटॉप और अन्य दस्तावेज बरामद किए। अधिकारियों का कहना है कि इन सामग्रियों से संकेत मिलता है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर डमी कंपनियां बनाई गई थीं।

जांच के दौरान दर्ज बयानों में अमित कुमार गोयल ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह वर्ष 2018 से एंट्री ऑपरेटर के रूप में काम कर रहा था। आरोप है कि वह विभिन्न फर्मों से आरटीजीएस के जरिए रकम प्राप्त करता था और कमीशन काटकर नकद राशि वापस लौटा देता था। एजेंसियों का दावा है कि इन लेन-देन के पीछे कोई वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं थी और केवल फर्जी चालानों के जरिए कारोबार का आभास पैदा किया जाता था।

ईडी और पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय प्रवाह, संभावित मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य जुड़े व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस बहुस्तरीय वित्तीय घोटाले से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

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