पुणे में रेलवे पुलिस ने SIM कार्ड चोरी कर बैंक खातों से पैसे निकालने के आरोप में 23 वर्षीय सिविल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट को गिरफ्तार किया है।

गेमिंग की लत ने बनाया साइबर ठग: सिविल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट SIM चोरी कर बैंक खातों से उड़ाने लगा पैसे

Team The420
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पुणे। ऑनलाइन गेमिंग की बढ़ती लत किस तरह युवाओं को अपराध की राह पर धकेल सकती है, इसका एक चौंकाने वाला मामला महाराष्ट्र के पुणे से सामने आया है। रेलवे पुलिस ने 23 वर्षीय एक सिविल इंजीनियरिंग स्नातक को SIM कार्ड चोरी कर लोगों के बैंक खातों से अवैध निकासी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर अपने व्यक्तिगत खर्चों और ऑनलाइन गेमिंग की जरूरतों को पूरा करने के लिए इस तरह की गतिविधियों में शामिल हुआ।

आरोपी की पहचान संकेत सतीश कुलकर्णी (23) के रूप में हुई है। वह वर्तमान में पुणे के आकुर्डी इलाके में रह रहा था और मूल रूप से धाराशिव जिले के एक गांव का निवासी है। पुलिस के अनुसार, उसने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और इन दिनों पुणे में विजुअल इफेक्ट्स (VFX) का कोर्स कर रहा था। शिक्षित पृष्ठभूमि और तकनीकी समझ होने के बावजूद उसने कथित तौर पर आसान पैसे कमाने के लिए साइबर अपराध का रास्ता चुना।

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जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी SIM कार्ड चोरी करने के बाद उन्हें सक्रिय कर पीड़ितों के मोबाइल नंबरों पर नियंत्रण हासिल कर लेता था। मोबाइल नंबर पर नियंत्रण मिलते ही बैंकिंग सेवाओं, ओटीपी और अन्य डिजिटल सत्यापन प्रक्रियाओं तक उसकी पहुंच बन जाती थी। इसी का फायदा उठाकर वह कथित रूप से पीड़ितों के खातों से रकम निकालने या ट्रांसफर करने में सफल होता था।

मामले की जांच तब तेज हुई जब SIM चोरी और उससे जुड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के तीन अलग-अलग मामलों की शिकायतें दर्ज हुईं। शिकायतों के आधार पर तकनीकी और मानव खुफिया सूचनाओं का विश्लेषण किया गया, जिसके बाद संदेह की सुई कुलकर्णी तक पहुंची। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो उसने कथित तौर पर तीनों मामलों में अपनी भूमिका स्वीकार कर ली।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को ऑनलाइन गेमिंग की गंभीर लत लग गई थी। बताया जा रहा है कि उसने पहले भी गेम खेलने पर लगभग ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक खर्च कर दिए थे। यह रकम उसने कथित रूप से परिवार की जानकारी के बिना खर्च की थी। लगातार बढ़ते खर्च और आर्थिक दबाव के कारण उसने अवैध तरीके से धन जुटाने की कोशिश शुरू की।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल नंबर आज डिजिटल पहचान का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। बैंक खाते, यूपीआई, सोशल मीडिया, ईमेल और कई अन्य सेवाएं मोबाइल नंबर से जुड़ी होती हैं। ऐसे में SIM कार्ड की चोरी या SIM स्वैपिंग जैसी घटनाएं पीड़ितों के लिए गंभीर वित्तीय नुकसान का कारण बन सकती हैं। अपराधी ओटीपी और प्रमाणीकरण संदेश हासिल कर खाते तक पहुंच बना लेते हैं।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक हैकिंग की बजाय डिजिटल पहचान पर कब्जा करने की रणनीति अपना रहे हैं। उनके अनुसार, मोबाइल नंबर, ओटीपी और सोशल इंजीनियरिंग का दुरुपयोग कर अपराधी बैंकिंग सुरक्षा तंत्र को दरकिनार करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि मोबाइल नेटवर्क अचानक बंद होने, SIM निष्क्रिय होने या बैंकिंग अलर्ट में किसी भी असामान्य गतिविधि को गंभीरता से लें और तुरंत संबंधित सेवा प्रदाता तथा बैंक से संपर्क करें।

विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में ऑनलाइन गेमिंग और त्वरित आर्थिक लाभ की मानसिकता कई बार जोखिमपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देती है। हालांकि अधिकांश गेमर्स कानून का पालन करते हैं, लेकिन कुछ मामलों में आर्थिक दबाव और लत अपराध की ओर धकेल सकती है।

फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उसे यरवडा केंद्रीय कारागार में रखा गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या वह किसी बड़े साइबर नेटवर्क से जुड़ा था या उसने यह गतिविधियां अकेले संचालित कीं। मामले की आगे की जांच जारी है।

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