वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित लालबहादुर शास्त्री (एलबीएस) अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक अफगान नागरिक को कथित तौर पर फर्जी भारतीय पासपोर्ट के साथ गिरफ्तार किया गया है। आरोपी की पहचान अब्दुल रहमान के रूप में हुई है, जो मूल रूप से अफगानिस्तान के गजनी जिले के काहिलनावा नावा मस्जिद टाटा क्षेत्र का निवासी बताया गया है। जांच में आरोप है कि उसने अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर भारतीय नागरिक के रूप में फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और भारतीय पासपोर्ट हासिल कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच के अनुसार, अब्दुल रहमान सोमवार को एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट IX-183 से शारजाह जाने के लिए एलबीएस अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पहुंचा था। इमिग्रेशन जांच के दौरान उसके यात्रा दस्तावेजों में विसंगतियां मिलने पर अधिकारियों को संदेह हुआ। इसके बाद उससे विस्तृत पूछताछ की गई और दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया, जिसमें उसकी कथित फर्जी पहचान का खुलासा हुआ।
पूछताछ और अभिलेखों की जांच में सामने आया कि आरोपी अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर रहमान शाह नाम से रह रहा था। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान उसका वास्तविक नाम अब्दुल रहमान ताराकी पाया गया। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि उसने जन्मतिथि, माता-पिता के नाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों में बदलाव कर मुंबई स्थित क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय से भारतीय पासपोर्ट प्राप्त किया था।
अधिकारियों के अनुसार, अब्दुल रहमान 6 जनवरी 2019 को मेडिकल अटेंडेंट वीजा पर अपने अफगान पासपोर्ट के साथ भारत आया था। उसका वीजा 5 अप्रैल 2019 को समाप्त हो गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी वह भारत से वापस नहीं लौटा। इसके बजाय उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पहचान स्थापित करने का प्रयास किया और भारतीय पासपोर्ट बनवा लिया।
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प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि आरोपी मुंबई में अवैध रूप से कपड़ों और साड़ियों का कारोबार कर रहा था। अधिकारियों के अनुसार वह 17 जुलाई को वाराणसी पहुंचा था और यहां से शारजाह जाने की तैयारी में था। हालांकि एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन जांच के दौरान उसकी कथित फर्जी पहचान उजागर हो गई और उसे हिरासत में ले लिया गया।
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, जन्म प्रमाण पत्र, मुंबई सिटी का डोमिसाइल प्रमाण पत्र, दो अंगूठियां, एक कलाई घड़ी, 750 अमेरिकी डॉलर, 2,255 यूएई दिरहम, 2,060 अफगानी मुद्रा और ₹3,110 नकद बरामद किए। जब्त दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक एवं तकनीकी जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी पहचान तैयार करने और दस्तावेज हासिल करने में किन लोगों की भूमिका थी।
अधिकारियों की शिकायत पर फूलपुर पुलिस ने अब्दुल रहमान के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। जांच एजेंसियां अब उसके संपर्कों, यात्रा इतिहास, वित्तीय गतिविधियों और डिजिटल रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर रही हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि फर्जी भारतीय पासपोर्ट, आधार कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज तैयार कराने में किसी संगठित गिरोह या स्थानीय सहयोगियों की भूमिका तो नहीं थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि फर्जी पहचान दस्तावेजों और पासपोर्ट का दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है। ऐसे मामलों में दस्तावेज सत्यापन, डिजिटल रिकॉर्ड, बायोमेट्रिक जानकारी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा इतिहास की गहन जांच आवश्यक होती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर शामिल अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।
