कोर्ट ने कहा ‘भविष्य में अपराध की संभावना’—₹22.5 लाख की ठगी मामले में अदालत ने दिखाई सख्ती

वडोदरा में ₹300 करोड़ की लोन धोखाधड़ी: महिला आरोपी की जमानत याचिका खारिज

Roopa
By Roopa
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वडोदरा: वडोदरा के अटलादरा स्थित दीपर्शन सोसाइटी की निवासी नयनाबेन महीडा फिलहाल क्राइम ब्रांच की निगरानी में न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। 11वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बद्री कमलकुमार दंसोदी ने उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी, और मामले का गहन न्यायिक अवलोकन करते हुए सख्त रुख अपनाया।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2021 में अक्षरचोक स्थित सिग्नेट हब में कार्यरत सहयोग फाइनेंशियल सर्विसेज के जरिए नयनाबेन महीडा और उनके पुत्र आकाश महीडा ने वलसाड की राधिका इंटरमीडिएट कंपनी से सोलर प्रोजेक्ट और ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट के लिए ₹300 करोड़ की लोन देने का दावा किया। इसके एवज में उन्होंने ₹30 लाख कमिशन की मांग की।

शिकायतकर्ता से अलग-अलग खातों में कुल ₹25 लाख की राशि प्राप्त करने के बाद, आरोपियों ने केवल ₹2.5 लाख वापस किए और शेष ₹22.5 लाख की ठगी की। इस प्रकार मामला लोन धोखाधड़ी का स्पष्ट उदाहरण बन गया।

सरकारी वकील अनिल देसाई ने अदालत में तर्क दिया कि आरोपी के खिलाफ समान प्रकार के अन्य अपराध भी दर्ज हैं, और सह-आरोपी मकसूद अहमद काजी अभी भी फरार है। ऐसे में यदि आरोपी को जमानत दी जाती है तो भविष्य में अपराध करने की संभावना उच्च है।

अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपी का नाम एफआईआर में प्रारंभ से ही शामिल है और प्रारंभिक दृष्टि में वह मुख्य साजिशकर्ता प्रतीत होती हैं। अन्य आरोपी अब तक पकड़ में नहीं आए हैं।

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कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि सिर्फ चार्जशीट दाखिल करने से जमानत के लिए कोई नए परिस्थितियाँ उत्पन्न नहीं होतीं। आरोपी के खिलाफ तीन अन्य समान प्रकार की शिकायतें भी दर्ज हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए जमानत देने से इंकार किया गया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोपी के आरोप और अतीत के व्यवहार को देखते हुए, अगर जमानत दी जाती है तो भविष्य में ऐसे अपराधों की संभावना बनी रहती है। इसी आधार पर उनकी नियमित जमानत याचिका नामंजूर कर दी गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला बैंकिंग और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी मामलों में न्यायपालिका की सख्ती को दर्शाता है। ऐसे मामलों में जमानत केवल तभी मिलती है जब आरोपी के खिलाफ साक्ष्य मजबूत हों और अपराध का जोखिम न्यूनतम हो।

इस फैसले से यह भी संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी में संलिप्त आरोपी को समय रहते हिरासत में रखना और भविष्य के अपराध रोकना न्याय प्रणाली की प्राथमिकता है।

जनता को सलाह दी गई है कि किसी भी संदिग्ध वित्तीय लेन-देन या धोखाधड़ी की जानकारी तुरंत पुलिस या संबंधित जांच एजेंसी को दें। इससे न केवल भविष्य में ऐसे अपराधों पर रोक लगेगी, बल्कि अन्य संभावित वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों से भी निपटा जा सकेगा।

यह मामला यह दिखाता है कि अधिकारियों और न्यायपालिका का कड़ा रुख वित्तीय और कॉर्पोरेट धोखाधड़ी के मामलों में उपभोक्ता सुरक्षा और वित्तीय प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

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