पंचकूला में वर्क वीजा के नाम पर ₹35 लाख की ठगी और डंकी रूट रैकेट का खुलासा होने के बाद जांच में जुटी पुलिस।

65 लाख की साइबर ठगी मामले में बड़ा खुलासा, बडगाम से दो आरोपी दबोचे गए

Team The420
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देहरादून: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी और अहम कार्रवाई करते हुए जम्मू-कश्मीर के बडगाम क्षेत्र से अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह के दो कथित सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने न केवल एक संगठित साइबर नेटवर्क की परतें खोली हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर किस तरह लोगों को भय, भ्रम और फर्जी सरकारी पहचान के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।

एसटीएफ के अनुसार, यह पूरा मामला देहरादून निवासी 71 वर्षीय बुजुर्ग से 65 लाख रुपये की साइबर ठगी की जांच के दौरान सामने आया। जांच में पता चला कि आरोपी खुद को टेलीकॉम विभाग, सीबीआई और दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करते थे। वे पीड़ितों को यह विश्वास दिलाते थे कि उनका मोबाइल नंबर, बैंक खाता या पहचान किसी गंभीर आपराधिक मामले में इस्तेमाल हुई है। इसके बाद “डिजिटल अरेस्ट” जैसे हथकंडे अपनाकर उन्हें मानसिक दबाव में लिया जाता था।

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गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित बताया गया है। आरोपी व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए पीड़ितों से बात करते थे और इस दौरान फर्जी वर्दी, बनावटी पहचान पत्र तथा नकली दस्तावेज दिखाकर अपने दावों को विश्वसनीय बनाते थे। जब पीड़ित डर और घबराहट में आ जाते, तब उनसे अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई जाती। जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की रकम को फर्जी बैंक खातों, सिम कार्डों और एटीएम के जरिए कई स्तरों पर घुमाकर निकाला जाता था, ताकि लेनदेन की कड़ी पकड़ना मुश्किल हो जाए।

तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर एसटीएफ टीम जम्मू-कश्मीर के बडगाम पहुंची, जहां से शौकत हुसैन मलिक और बिलाल अहमद को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान स्थानीय स्तर पर विरोध और दबाव की स्थिति भी बनी, लेकिन टीम ने संयम और रणनीति के साथ अभियान पूरा किया। गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन, कई एटीएम कार्ड, आधार और पैन से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य अहम सामग्री बरामद की गई है।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि इन बैंक खातों और संदिग्ध लेनदेन से जुड़े मामलों में उत्तराखंड सहित देश के सात राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक व्यापक और संगठित साइबर नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। एसटीएफ अब गिरोह के अन्य सदस्यों, फर्जी खातों के संचालकों और नेटवर्क से जुड़े सहयोगियों की तलाश में जुटी है। इसके लिए अन्य राज्यों की पुलिस से भी समन्वय किया जा रहा है।

एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई संवेदनशील परिस्थितियों में की गई, क्योंकि संबंधित क्षेत्र में पहले भी सुरक्षा बलों पर हमले जैसी घटनाएं हो चुकी हैं। स्थानीय पुलिस के सहयोग से आरोपियों का रिमांड भी हासिल कर लिया गया है। अब जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क, रकम के प्रवाह, इस्तेमाल किए गए डिजिटल उपकरणों और संभावित अन्य पीड़ितों की पहचान की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

यह मामला एक बार फिर इस बात की चेतावनी देता है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी कमजोरी नहीं, बल्कि लोगों की मनोवैज्ञानिक स्थिति और सरकारी संस्थाओं के प्रति भरोसे का भी दुरुपयोग कर रहे हैं। ऐसे में जागरूकता, त्वरित शिकायत और डिजिटल सतर्कता ही इस तरह की ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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