देहरादून (उत्तराखंड): उत्तराखंड पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और औषधि प्रशासन विभाग ने संयुक्त कार्रवाई में ऊधम सिंह नगर जिले के बाजपुर स्थित एक कथित नकली दवा निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों के अनुसार, बिना वैध लाइसेंस के प्रतिष्ठित दवा कंपनियों के नाम पर नकली एलोपैथिक दवाओं का निर्माण और आपूर्ति की जा रही थी। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, बाजपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित ‘कोविल बायोटेक’ नामक फैक्ट्री पर छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में नकली दवाएं, दवा निर्माण और पैकेजिंग में प्रयुक्त मशीनें, अवैध भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) तथा आबकारी विभाग के होलोग्राम बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि फैक्ट्री से कई प्रतिष्ठित फार्मा कंपनियों के नाम से फर्जी दवाओं का उत्पादन कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर निवासी धीरेंद्र के रूप में हुई है। आरोप है कि वह आयुर्वेदिक और खाद्य उत्पादों से संबंधित लाइसेंस की आड़ में स्टेडमेड, मैक्लियोड्स, इंटास और सन फार्मा जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से नकली एलोपैथिक दवाएं तैयार कर उनकी आपूर्ति कर रहा था। अधिकारियों का कहना है कि इस गतिविधि से आम लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
पूछताछ के दौरान आरोपी से मिली जानकारी के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्ग-74 स्थित एक गोदाम पर भी छापेमारी की गई। वहां से तैयार दवाओं का बड़ा भंडार और अवैध शराब बरामद की गई। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान करीब एक लाख टैबलेट और 15 हजार सिरप की बोतलें जब्त की गई हैं। बरामद दवाओं में एंटीबायोटिक, एंटासिड, दर्द निवारक, न्यूरोपैथिक दर्द की दवाएं, प्रोस्टेट संबंधी दवाएं, कैल्शियम, आयरन, विटामिन सप्लीमेंट और कई जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं।
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इसके अलावा जांच टीम ने 2,600 से अधिक शराब की बोतलें, एक्साइज होलोग्राम, पैकेजिंग सामग्री और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनरी भी जब्त की है। अधिकारियों का कहना है कि जब्त सामग्री की फोरेंसिक और तकनीकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि नकली दवाओं का निर्माण कितने समय से किया जा रहा था और उनकी आपूर्ति किन-किन राज्यों तक की गई।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ बाजपुर थाने में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। अवैध शराब की बरामदगी के संबंध में उत्तराखंड आबकारी अधिनियम के तहत अलग से कानूनी कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि इस नेटवर्क में दवा आपूर्तिकर्ताओं, वितरकों या अन्य सहयोगियों की क्या भूमिका रही।
अधिकारियों का कहना है कि नकली दवा निर्माण और वितरण से जुड़े पूरे नेटवर्क की पहचान के लिए वित्तीय लेनदेन, लाइसेंस संबंधी दस्तावेज, सप्लाई चेन और बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि नकली दवाएं किन बाजारों, मेडिकल स्टोरों या वितरकों तक पहुंचाई गई थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाएं न केवल मरीजों के उपचार को प्रभावित करती हैं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य जोखिम भी पैदा कर सकती हैं। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को केवल अधिकृत मेडिकल स्टोर से ही दवाएं खरीदनी चाहिए, पैकेजिंग, बैच नंबर और निर्माता की जानकारी की जांच करनी चाहिए तथा किसी भी संदिग्ध दवा की सूचना तुरंत औषधि प्रशासन या पुलिस को देनी चाहिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले ऐसे नेटवर्क के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
