देहरादून। उत्तराखंड में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) भवनों के निर्माण के नाम पर जारी करीब 130 करोड़ रुपये की रकम के कथित घपले के मामले में यूपी राजकीय निर्माण निगम के तीन पूर्व अधिकारियों के खिलाफ पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। आईजी-गढ़वाल रेंज कार्यालय की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने नेहरू कॉलोनी थाने में दर्ज छह मुकदमों में से पांच की जांच पूरी करने के बाद यह कार्रवाई की है। एक मामले की जांच अभी जारी बताई गई है।
मामला उत्तराखंड में आईटीआई भवनों के निर्माण के लिए जारी की गई सरकारी धनराशि के इस्तेमाल और उसके हिसाब से जुड़ा है। यूपी राजकीय निर्माण निगम के अपर परियोजना प्रबंधक की ओर से फरवरी 2025 में नेहरू कॉलोनी थाने में एक साथ छह मुकदमे दर्ज कराए गए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जिन स्थानों पर आईटीआई भवनों का निर्माण प्रस्तावित था, वहां जमीन उपलब्ध नहीं होने के बावजूद संबंधित मद में जारी धनराशि का समुचित हिसाब नहीं दिया गया।
शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2018 से पहले उत्तराखंड में 15 आईटीआई भवनों के निर्माण के लिए यूपी राजकीय निर्माण निगम को कुल 1517.50 लाख रुपये यानी करीब 15.17 करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इनमें से नौ भवनों का निर्माण पूरा हो गया था। वहीं, छह स्थानों पर जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका।
जिन छह स्थानों पर जमीन नहीं मिल सकी, उनमें बसुकेदार, चिरबटिया, बडावे, थल, गंगोलीहाट और कठपुड़ियाछीना शामिल हैं। आरोप है कि इन स्थानों के लिए जारी धनराशि को आईयूटी के माध्यम से दूसरे विभागों के कार्यों में खर्च कर दिया गया। निर्माण निगम की ओर से संबंधित अधिकारियों से रकम का हिसाब मांगा गया और धनराशि वापस जमा करने के लिए कहा गया, लेकिन आरोप के मुताबिक इसका पालन नहीं किया गया।
मामले की गंभीरता उस समय और बढ़ गई, जब यूपी राजकीय निर्माण निगम की आंतरिक जांच में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे। आंतरिक जांच में तत्कालीन परियोजना प्रबंधक शिव आसरे शर्मा, प्रदीप कुमार शर्मा और सहायक लेखाधिकारी स्तर-2 वीरेंद्र कुमार रवि को कथित नुकसान और गबन के लिए जिम्मेदार माना गया। इसके बाद निगम की ओर से तीनों के खिलाफ छह अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों, धनराशि के इस्तेमाल और विभागीय रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। एसआईटी ने छह मुकदमों में से पांच की जांच पूरी करने के बाद आरोपपत्र अदालत में भेज दिया। तीनों आरोपी अधिकारी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 120बी के तहत कार्रवाई की गई है। धारा 409 आपराधिक न्यासभंग से संबंधित है, जबकि धारा 120बी आपराधिक साजिश से जुड़ी है।
पुलिस के अनुसार, मामला केवल धनराशि के खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी जांच का विषय रहा कि निर्माण के लिए स्वीकृत और जारी रकम का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के बजाय अन्य कार्यों में किस प्रक्रिया के तहत किया गया। इसके साथ ही यह भी देखा गया कि संबंधित अधिकारियों ने निर्माण निगम के निर्देशों के बावजूद धनराशि का हिसाब या वापसी क्यों नहीं की।
एसआईटी की कार्रवाई के बाद अब अदालत में दाखिल चार्जशीट के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया चलेगी। हालांकि, छह मामलों में से एक प्रकरण की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि उसकी जांच भी जल्द पूरी कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
आईजी-गढ़वाल रेंज के मुताबिक, यूपी राजकीय निर्माण निगम से जुड़े इस कथित घपले के पांच मुकदमों में चार्जशीट अदालत भेजी जा चुकी है। एक मामले की जांच जारी है और उसे भी जल्द पूरा किया जाएगा।
