देवघर। अंतरराज्यीय साइबर ठगी के एक मामले में पुलिस ने देवघर जिले के अलग-अलग इलाकों से पांच युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पांच मोबाइल फोन और अलग-अलग क्षेत्रों के आठ सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। पुलिस की तकनीकी जांच में इन मोबाइल उपकरणों के IMEI नंबर और बरामद मोबाइल नंबरों का संबंध विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर ठगी की शिकायतों से सामने आने का दावा किया गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बरमसिया गांव निवासी सरफराज आलम, चरकमारा गांव निवासी शिवम कुमार दास, सिमरतारी गांव निवासी विजय कुमार दास, लेड़वा गांव निवासी अभय कुमार दास और दौंडिया गांव निवासी नितेश कुमार के रूप में हुई है। सरफराज आलम और शिवम कुमार दास सारठ थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि विजय कुमार दास और अभय कुमार दास क्रमश: पथरोल थाना क्षेत्र के गांवों से हैं। नितेश कुमार सोनारायठाढ़ी थाना क्षेत्र का निवासी बताया गया है। सभी आरोपियों की उम्र 20 से 30 वर्ष के बीच बताई गई है।
पुलिस के मुताबिक, मामले की शुरुआती जानकारी मिलने के बाद जिले के अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की गई। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन और सिम कार्ड कब्जे में लिए गए। इसके बाद उपकरणों की तकनीकी जांच की गई। पुलिस का कहना है कि तकनीकी विश्लेषण में बरामद उपकरणों और नंबरों के कनेक्शन उन शिकायतों से मिले, जो अलग-अलग राज्यों में साइबर ठगी से संबंधित दर्ज की गई थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर ठगी के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें फर्जी कस्टमर केयर कॉल प्रमुख तरीका बताया गया है। आरोप है कि साइबर ठग ग्राहकों को कैशबैक या अन्य लाभ देने का झांसा देकर उनसे संपर्क करते थे। बातचीत के दौरान उन्हें भरोसे में लेकर ठगी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती थी।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर सरकारी योजनाओं और जरूरी सेवाओं के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाने का भी आरोप है। प्रारंभिक जांच में ऐसे मामलों की जानकारी मिली है, जिनमें PM-Kisan लाभ, बिजली बिल और RTO चालान से संबंधित संदेशों या दूसरे माध्यमों के जरिए लोगों से संपर्क किया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, आरोपियों द्वारा APK फाइल भेजने का तरीका भी अपनाया जाता था। कथित तौर पर इन फाइलों को सरकारी लाभ, बिजली बिल या चालान से संबंधित बताकर पीड़ितों को भेजा जाता था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इन फाइलों के जरिए मोबाइल फोन तक कथित रिमोट एक्सेस कैसे हासिल किया जाता था और उसके बाद पीड़ितों के बैंक खातों या डिजिटल लेनदेन से जुड़ी जानकारी का किस तरह इस्तेमाल किया गया।
बरामद आठ सिम कार्ड भी जांच का अहम हिस्सा हैं। पुलिस इनके इस्तेमाल की अवधि, कॉल रिकॉर्ड, संबंधित मोबाइल उपकरणों और साइबर ठगी की शिकायतों के बीच संबंधों की जांच कर रही है। तकनीकी जांच के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपियों का नेटवर्क किन राज्यों तक फैला था और किन-किन मामलों में इन मोबाइल नंबरों या उपकरणों का इस्तेमाल हुआ।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ के साथ मोबाइल फोन और सिम कार्ड से मिले डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है। विभिन्न राज्यों में दर्ज शिकायतों से कनेक्शन की पुष्टि के लिए संबंधित रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित ठगी से जुड़े अन्य लोग या बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का कोई नेटवर्क इस मामले में शामिल है या नहीं।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच के आधार पर पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, ठगी की पूरी रकम, पीड़ितों की संख्या और कथित नेटवर्क की वास्तविक सीमा का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। बरामद डिजिटल उपकरणों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर मामले में आगे कार्रवाई की जा रही है।
