फर्जी अंकपत्र गिरोह UP, राजमन गोंड गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र गिरोह का भंडाफोड़

Team The420
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उत्तर प्रदेश में साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अवैध संस्था संचालित कर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्र वेबसाइट के माध्यम से जारी करता था। आरोपी ने अपनी वेबसाइट पर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री की फोटो भी लगा रखी थी, जिससे यह प्रमाणित होता है कि वह अपने काम को वैध और सरकारी प्रतीत कराने की कोशिश कर रहा था। पुलिस अब गिरोह के अन्य साथियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

FIR और जांच की शुरुआत

पत्राचार शिक्षा संस्थान के अपर शिक्षा निदेशक ने 1 सितंबर 2024 को साइबर क्राइम थाने में जालसाजी, आईटी एक्ट और अन्य धाराओं के तहत आजमगढ़ के रवनिया थाना क्षेत्र निवासी राजमन गोंड और अन्य अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। यह शिकायत तब दर्ज कराई गई जब संस्था द्वारा ऑनलाइन माध्यम से फर्जी अंकपत्र जारी करने की जानकारी मिली थी।

फर्जी वेबसाइटों का जाल और सरकारी नकल

जांच में सामने आया कि आरोपी वर्तमान में क्रिस्टल अपार्टमेंट, चिनहट, लखनऊ में रह रहा था। वह राज्य मुक्त विद्यालय परिषद के नाम से अपनी अवैध संस्था का संचालन कर रहा था और वेबसाइटों www.upsosb.ac.in और www.upsosb.org.in के माध्यम से फर्जी अंकपत्र वितरित करता था। आरोपी ने अपने अपराध को छुपाने के लिए वेबसाइटों पर सरकारी प्रतीक और नेताओं की तस्वीरें भी लगाई थीं, ताकि उसके वेबसाइट पर आने वाले उपयोगकर्ताओं को यह वैध लगे।

साइबर क्राइम पुलिस ने रविवार को राजमन गोंड को लखनऊ से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने फर्जी संस्था के माध्यम से कई लोगों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के फर्जी प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए और इसके एवज में धन उगाही की। आरोपी ने अपने कुछ सहयोगियों के नाम भी पुलिस को बताए हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए टीमें सक्रिय हैं।

आरोपी के कब्जे से दो मोबाइल, तीन सिम कार्ड और डेढ़ हजार रुपये बरामद किए गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने डिजिटल सबूत भी संकलित किए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि आरोपी और उसके सहयोगी लंबे समय से ऑनलाइन माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर रहे थे।

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पुलिस कार्रवाई और आगे की रणनीति

पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में ऑनलाइन जालसाजी और फर्जी दस्तावेज निर्माण के खिलाफ अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है। इस मामले में पुलिस टीमों ने साइबर फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरोपी की गतिविधियों का पता लगाया और उसके सहयोगियों की पहचान के लिए डिजिटल डेटा का विश्लेषण किया।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे गिरोह आम जनता को गुमराह करने और अवैध लाभ कमाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। साइबर क्राइम अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की जालसाजी के मामलों में समय पर कार्रवाई और नेटवर्क के सभी सक्रिय सदस्यों की पहचान महत्वपूर्ण होती है, ताकि भविष्य में इससे जुड़े अन्य अपराध को रोका जा सके।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि आरोपी के अन्य सक्रिय सदस्य अभी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए राज्य और अन्य जिलों की पुलिस टीमों के साथ-साथ साइबर सेल भी काम कर रही है। गिरोह के फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की सूची तैयार की जा रही है, ताकि उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़े।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई से न केवल फर्जी प्रमाणपत्र बनाने वाले गिरोहों को कड़ा संदेश मिलेगा, बल्कि छात्रों और अभिभावकों को भी जागरूक किया जाएगा कि केवल सरकारी पोर्टल या मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही शैक्षणिक दस्तावेज प्राप्त किए जाएँ।

पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन माध्यम से फर्जी प्रमाणपत्र या अंकपत्र प्राप्त करने की कोशिश न करें और ऐसे मामलों की सूचना तुरंत साइबर क्राइम पुलिस को दें।

यह कार्रवाई राज्य में साइबर अपराध और डिजिटल जालसाजी के खिलाफ एक मजबूत उदाहरण मानी जा रही है, जिसमें जांच, फोरेंसिक विश्लेषण और अभियुक्त की गिरफ्तारी को प्रभावी ढंग से पूरा किया गया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में निरंतर निगरानी और डिजिटल तकनीक का उपयोग ही बड़े पैमाने पर सफलता दिला सकता है।

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