वॉशिंगटन: अमेरिका में विदेशी कुशल पेशेवरों के बीच बेहद लोकप्रिय H-1B वीजा कार्यक्रम पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने इस वीजा व्यवस्था पर तीन साल की अस्थायी रोक लगाने का विधेयक संसद में पेश किया है, जिससे अमेरिकी इमिग्रेशन और रोजगार नीति पर गहरी बहस शुरू हो गई है।
एली क्रेन ने पेश किया प्रस्ताव, कई रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन
इस प्रस्ताव को रिपब्लिकन सांसद एली क्रेन ने पेश किया है, जिसे कई अन्य सांसदों का समर्थन मिला है। सह-प्रायोजकों में ब्रायन बैबिन, ब्रैंडन गिल, वेस्ली हंट, कीथ सेल्फ, एंडी ओगल्स, पॉल गोसर और टॉम मैक्लिंटॉक जैसे नाम शामिल हैं। इन सांसदों का कहना है कि मौजूदा H-1B सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा है और अमेरिकी नागरिकों के रोजगार अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
सांसद एली क्रेन ने कहा कि विदेशी कामगारों की बढ़ती संख्या के कारण अमेरिकी नागरिकों को नौकरी के अवसर कम मिल रहे हैं। उनके अनुसार सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों के हितों की रक्षा होनी चाहिए, न कि कंपनियों के मुनाफे को बढ़ावा देना।
FCRF Academy Launches Premier Anti-Money Laundering Certification Program
अस्थायी कार्य अनुमति व्यवस्था पर सख्ती का प्रस्ताव
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि संघीय एजेंसियों को गैर-प्रवासी कर्मचारियों की नियुक्ति से रोका जाए और अस्थायी कार्य अनुमति प्रणाली को समाप्त किया जाए। इसके अलावा, गैर-प्रवासी वीजा धारकों को किसी अन्य श्रेणी में जाने से पहले अमेरिका छोड़ना अनिवार्य करने का भी प्रावधान रखा गया है।
बिल में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं, जिनमें वार्षिक वीजा सीमा को 65000 से घटाकर 25000 करना शामिल है। साथ ही न्यूनतम वेतन को 200000 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष तय करने की मांग की गई है, ताकि केवल उच्च योग्यता वाले पेशेवर ही इस व्यवस्था का लाभ ले सकें।
आश्रितों और भर्ती एजेंसियों पर भी प्रस्तावित पाबंदियां
इसके अलावा, वीजा धारकों के आश्रितों को अमेरिका लाने पर रोक लगाने, एक से अधिक नौकरी करने पर प्रतिबंध और तीसरे पक्ष की भर्ती एजेंसियों पर सख्ती का भी प्रस्ताव है। नियोक्ताओं को यह प्रमाणित करना होगा कि उन्हें योग्य अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नहीं है, तभी विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति की अनुमति दी जाएगी।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार हर साल लगभग 85000 H-1B वीजा जारी किए जाते हैं, जबकि वर्तमान में तीन लाख से अधिक भारतीय पेशेवर इस वीजा पर अमेरिका में कार्यरत हैं। यही कारण है कि इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय टेक और हेल्थकेयर सेक्टर के पेशेवरों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
वैश्विक हायरिंग पैटर्न में बदलाव की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रोक लागू होती है तो वैश्विक तकनीकी उद्योग में प्रतिभा की आवाजाही और हायरिंग पैटर्न पर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि समर्थक सांसदों का दावा है कि इससे अमेरिकी नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और घरेलू श्रम बाजार मजबूत होगा।
वहीं आलोचकों का तर्क है कि इससे अमेरिका की तकनीकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है क्योंकि कंपनियां वैश्विक प्रतिभा पर निर्भर रहती हैं। कई उद्योग प्रतिनिधियों ने भी चिंता जताई है कि इससे नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम प्रभावित हो सकता है।
संसद में चर्चा के चरण में विधेयक
फिलहाल यह विधेयक संसद में चर्चा के चरण में है और इसके भविष्य पर राजनीतिक सहमति और विरोध के बीच निर्णय लिया जाएगा। यदि यह पारित होता है तो इसे अमेरिकी इमिग्रेशन नीति में पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा।
