हैदराबाद। तेजी से पैसे कमाने के सपने दिखाकर युवाओं को ठगने वाले एक बड़े बहु-स्तरीय विपणन (एमएलएम) घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में हरियाणा के एक मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उससे जुड़े विभिन्न बैंक खातों में करीब ₹3 करोड़ की राशि फ्रीज की गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क करीब ₹600 करोड़ की ठगी से जुड़ा हो सकता है और देशभर में इसके तार फैले हुए हैं।
जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी, हरिश कुमार सिंगला (61), गुरुग्राम का निवासी है और एक कंपनी में कंट्री सेल्स मैनेजर के पद पर कार्यरत था। उसने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसमें लोगों को ‘कम समय में ज्यादा कमाई’ का लालच देकर जोड़ा जाता था। इस योजना के जरिए करीब एक लाख लोगों को निशाना बनाया गया, जिनमें बड़ी संख्या युवाओं की है।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने अपने नेटवर्क के जरिए खासतौर पर 18 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को टारगेट किया। उन्हें बताया जाता था कि कंपनी से जुड़कर वे कुछ ही महीनों में अच्छी कमाई कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति से ₹30,000 का प्रवेश शुल्क लिया जाता था। बदले में उन्हें कुछ उत्पाद दिए जाते और कहा जाता कि वे नए सदस्यों को जोड़कर कमीशन कमाएं। जैसे-जैसे नेटवर्क बढ़ता, अधिक कमाई का लालच दिया जाता।
इस पूरे ऑपरेशन को जमीन पर लागू करने के लिए ‘अचीवर्स क्लब’ नामक संस्था का इस्तेमाल किया गया, जिसने शहर के कर्मनघाट इलाके में अपना कार्यालय स्थापित कर रखा था। यहां से योजनाबद्ध तरीके से लोगों को योजना में जोड़ा जाता था। इससे पहले इसी मामले में तीन अन्य आरोपी—मोहम्मद अकरम, मोहम्मद नौमान रजा और मोहम्मद असलम—को गिरफ्तार किया जा चुका है, जो स्थानीय स्तर पर नेटवर्क को संभाल रहे थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस ठगी के नेटवर्क को फैलाने के लिए एक कॉल सेंटर स्थापित किया गया था, जिसमें करीब 60 कर्मचारी काम करते थे। इन कर्मचारियों को संभावित पीड़ितों की सूची दी जाती थी और उन्हें फोन कर योजना के फायदे बताए जाते थे। कॉल के दौरान ‘गारंटीड आय’, ‘आलीशान जीवनशैली’ और ‘जल्दी अमीर बनने’ जैसे वादों के जरिए लोगों को आकर्षित किया जाता था।
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इस घोटाले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इसमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जो आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं। बेहतर भविष्य और आय की उम्मीद में कई लोगों ने कर्ज लेकर ₹30,000 की राशि जमा की। लेकिन कुछ ही समय बाद जब उन्हें कोई वास्तविक लाभ नहीं मिला, तब उन्हें इस धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
मामले में शहर के अलग-अलग थानों में कंपनी और उसके कर्मचारियों के खिलाफ तीन मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करने और ठगी की वास्तविक राशि का आकलन करने में जुटी हैं। कई संदिग्ध अभी फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश के लिए टीमें बनाई गई हैं।
इस तरह के मामलों पर प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह का कहना है, “ऐसे एमएलएम और नेटवर्क विपणन धोखाधड़ी पूरी तरह ‘सामाजिक अभियांत्रिकी’ पर आधारित होते हैं। अपराधी लोगों की महत्वाकांक्षाओं और जल्दी अमीर बनने की मानसिकता का फायदा उठाते हैं। कॉल सेंटर, फर्जी प्रस्तुतियों और रेफरल सिस्टम के जरिए भरोसा पैदा किया जाता है, जिससे पीड़ित खुद ही दूसरों को इस जाल में फंसाने लगते हैं।”
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की एमएलएम योजनाएं अक्सर ‘श्रृंखला प्रणाली’ पर आधारित होती हैं, जहां शुरुआत में कुछ लोगों को लाभ दिखाकर बड़े पैमाने पर निवेश जुटाया जाता है। लेकिन जैसे ही नए सदस्य जुड़ना बंद होते हैं, पूरा सिस्टम ढह जाता है और अधिकांश निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ता है।
यह मामला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि बिना जांच-पड़ताल के किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाना गंभीर जोखिम भरा हो सकता है। खासकर उन योजनाओं से सतर्क रहने की जरूरत है, जो कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का दावा करती हैं। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस बड़े घोटाले से जुड़े और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
