गुटखा लेने के बहाने बीच रास्ते रची साजिश; CCTV खंगालने के बावजूद आरोपी फरार, नकदी ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

“भरोसे का सबसे बड़ा धोखा: ड्राइवर ने मालिक को लगाया ₹50 लाख का चूना”

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By Roopa
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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भरोसे को झकझोर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक ड्राइवर ने ही अपने मालिक के साथ बड़ा विश्वासघात कर दिया। करीब एक साल से काम कर रहा आरोपी ड्राइवर ₹50 लाख नकद और कार लेकर फरार हो गया। दिनदहाड़े अंजाम दी गई इस वारदात ने न केवल कारोबारी वर्ग को चौंका दिया है, बल्कि कर्मचारियों के सत्यापन और बड़ी रकम के सुरक्षित परिवहन को लेकर गंभीर चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं।

रूटीन जिम्मेदारी बनी आपराधिक साजिश

जानकारी के अनुसार, निर्माण व्यवसाय से जुड़े उमेश प्रसाद ने अपने अकाउंटेंट और ड्राइवर कृष्णा साहू को ₹50 लाख नकद सुरक्षित रूप से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। रकम एक कार में रखी गई थी और दोनों को गीतांजलि नगर स्थित आवास तक पहुंचने के निर्देश दिए गए थे। शुरुआत में यह एक सामान्य प्रक्रिया लग रही थी, लेकिन कुछ ही मिनटों में यह पूरा घटनाक्रम एक सुनियोजित अपराध में बदल गया।

पान दुकान के पास रचा गया खेल

घटना खम्हारडीह क्षेत्र के पास उस समय हुई जब आरोपी ने अपनी योजना को अंजाम दिया। रास्ते में एक पान दुकान के पास उसने अकाउंटेंट से गुटखा लाने को कहा। जैसे ही अकाउंटेंट वाहन से उतरा, आरोपी ने तुरंत कार स्टार्ट की और तेज रफ्तार से मौके से फरार हो गया। अचानक हुई इस हरकत से अकाउंटेंट संभल ही नहीं पाया और तुरंत पूरे मामले की जानकारी कारोबारी को दी।

भरोसे की आड़ में तैयार की गई योजना

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी कृष्णा साहू पिछले लगभग एक साल से ड्राइवर के रूप में काम कर रहा था और उसने अपने व्यवहार से परिवार का विश्वास जीत लिया था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने इस वारदात को अंजाम दिया। जांच से जुड़े सूत्रों का मानना है कि यह घटना पहले से योजना बनाकर की गई थी, क्योंकि आरोपी ने बेहद सटीक समय और स्थान चुनकर मौके से फरार होने में सफलता पाई।

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मोबाइल बंद, जांच के सामने चुनौती

घटना के बाद से आरोपी का मोबाइल फोन बंद बताया जा रहा है, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो गया है। फिलहाल जांच एजेंसियों के पास सीमित सुराग हैं, लेकिन तकनीकी और फील्ड स्तर पर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। आरोपी के संभावित ठिकानों और संपर्कों की भी जांच की जा रही है।

CCTV फुटेज से जोड़ी जा रही कड़ियां

जांच के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि आरोपी के भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। पान दुकान के आसपास के कैमरों की रिकॉर्डिंग को विशेष रूप से खंगाला जा रहा है। इसके अलावा टोल प्लाजा, पेट्रोल पंप और शहर के बाहरी मार्गों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि आरोपी की मूवमेंट को ट्रैक किया जा सके।

मामला दर्ज, तलाश जारी

शिकायत के आधार पर आरोपी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। विभिन्न टीमों को अलग-अलग दिशाओं में रवाना किया गया है और वाहन के साथ नकदी की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर लगातार दबिश दी जा रही है।

नकदी ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर सवाल

यह घटना एक बार फिर यह संकेत देती है कि बड़ी रकम के परिवहन में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने से गंभीर जोखिम पैदा हो सकता है। कर्मचारियों का सत्यापन, GPS ट्रैकिंग, दोहरी निगरानी और सीमित एक्सेस जैसे उपायों की कमी ऐसी घटनाओं को जन्म दे सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस तरह की वारदातों से बचने के लिए कैश मूवमेंट के दौरान डिजिटल ट्रैकिंग, मल्टी-लेयर सुरक्षा और जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन अनिवार्य किया जाना चाहिए।

फिलहाल, आरोपी की गिरफ्तारी और ₹50 लाख की बरामदगी को लेकर जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि भरोसे में की गई एक छोटी सी चूक भी भारी नुकसान में बदल सकती है।

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