वॉशिंगटन। अमेरिका के हेल्थकेयर सेक्टर में बढ़ती डॉक्टरों और नर्सों की कमी के बीच अब सरकार “इमरजेंसी मोड” में नजर आ रही है। विदेशी मेडिकल प्रोफेशनल्स को राहत देने के लिए अमेरिकी संसद US House of Representatives में एक अहम बिल पेश किया गया है, जिसके तहत H-1B वीज़ा पर लगने वाली $100,000 (करीब ₹82 लाख) की भारी फीस को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है।
“H-1Bs for Physicians and the Healthcare Workforce Act” नाम का यह बिल द्विदलीय समर्थन के साथ सामने आया है। इसका मकसद उन अस्पतालों को राहत देना है जो लंबे समय से विदेशी डॉक्टरों और नर्सों पर निर्भर हैं, खासकर ग्रामीण और कम विकसित इलाकों में।
2025 में लागू फीस ने बढ़ाई मुश्किलें
यह $100,000 की फीस सितंबर 2025 में लागू की गई थी, जिसके बाद से ही हेल्थकेयर इंडस्ट्री में असंतोष बढ़ने लगा। अस्पतालों और मेडिकल संगठनों का कहना है कि इतनी बड़ी रकम के कारण विदेशी डॉक्टरों की भर्ती महंगी और जटिल हो गई है।
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इस फैसले के खिलाफ नर्सिंग यूनियनों, कई राज्यों और उद्योग संगठनों ने कानूनी चुनौती भी दी है। उनका तर्क है कि यह फीस न सिर्फ अनुचित है, बल्कि इससे स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर भी असर पड़ रहा है।
डॉक्टरों की भारी कमी का खतरा
अमेरिका की प्रमुख संस्था American Medical Association के अनुसार, देश में 2036 तक करीब 86,000 डॉक्टरों की कमी हो सकती है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि आने वाले वर्षों में हेल्थकेयर सिस्टम पर दबाव और बढ़ेगा।
नर्सिंग सेक्टर की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, देश में करीब 30 लाख रजिस्टर्ड नर्सों में से लगभग 5 लाख प्रवासी थे। यानी हेल्थकेयर सिस्टम में विदेशी कर्मचारियों की भूमिका पहले से ही अहम है।
ग्रामीण इलाकों में सबसे ज्यादा असर
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिका के ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है। इन इलाकों में स्थानीय डॉक्टरों की उपलब्धता कम है, ऐसे में विदेशी डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ बने हुए हैं।
यदि H-1B फीस को खत्म नहीं किया गया, तो छोटे और ग्रामीण अस्पतालों में सेवाएं और प्रभावित हो सकती हैं। कई मेडिकल संगठनों ने चेतावनी दी है कि इससे मरीजों को बुनियादी इलाज तक के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
H-1B वीज़ा क्यों है अहम
H-1B visa अमेरिका का एक प्रमुख वीज़ा प्रोग्राम है, जिसके जरिए विदेशी कुशल पेशेवरों को काम करने की अनुमति दी जाती है। टेक्नोलॉजी, शिक्षा और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर इस पर काफी हद तक निर्भर हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर में इसकी अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि कई अमेरिकी डॉक्टर ग्रामीण या कम सुविधाओं वाले क्षेत्रों में काम करने के लिए तैयार नहीं होते। ऐसे में विदेशी डॉक्टर और नर्स इस कमी को पूरा करते हैं।
राजनीतिक मतभेद के बीच समाधान की कोशिश
H-1B वीज़ा को लेकर अमेरिका में लंबे समय से राजनीतिक मतभेद रहे हैं। कुछ नेता इसे स्थानीय रोजगार के लिए खतरा मानते हैं, जबकि उद्योग और हेल्थकेयर सेक्टर इसे आवश्यक बताते हैं।
नया बिल इन दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ हेल्थकेयर सेक्टर की जरूरतों को ध्यान में रखा गया है, वहीं दूसरी ओर वीज़ा सिस्टम पर नियंत्रण बनाए रखने की बात भी कही जा रही है।
क्या आगे बदलेगा परिदृश्य?
अगर यह प्रस्ताव कानून बन जाता है, तो विदेशी डॉक्टरों और नर्सों के लिए अमेरिका में काम करना काफी आसान और सस्ता हो जाएगा। इससे अस्पतालों को जरूरी स्टाफ मिल सकेगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
हालांकि, कानूनी चुनौतियों और राजनीतिक खींचतान के कारण इस बिल का भविष्य अभी अनिश्चित है। लेकिन मौजूदा हालात यह साफ संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका का हेल्थकेयर सिस्टम विदेशी प्रतिभाओं के बिना लंबे समय तक टिक पाना मुश्किल होगा।
