अमेरिका की ऐतिहासिक $15 बिलियन बिटकॉइन जब्ती के बाद पीड़ितों को राहत, क्रिप्टो रिकवरी और सरकारी रणनीतिक उपयोग को लेकर नई बहस तेज हुई।

अमेरिका की ऐतिहासिक $15 बिलियन बिटकॉइन जब्ती पर सवाल

Team The420
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अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा कंबोडिया स्थित प्रिंस ग्रुप से जुड़े $15 बिलियन मूल्य के बिटकॉइन की जब्ती को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी क्रिप्टो संपत्ति जब्ती मानी जा रही है। आरोप है कि समूह के संस्थापक चेन झी ने मानव तस्करी, औद्योगिक पैमाने की धोखाधड़ी और जबरन श्रम का एक वैश्विक साम्राज्य चलाया।

शुरुआत में यह कार्रवाई क्रिप्टो धोखाधड़ी के पीड़ितों के लिए राहत की उम्मीद जगाती दिखी, लेकिन अब सैकड़ों पीड़ितों के वकीलों ने न्याय विभाग पर आरोप लगाया है कि जब्त बिटकॉइन लौटाने का कोई स्पष्ट मार्ग नहीं दिया गया। कई दावे तेजी से खारिज कर दिए गए, जिससे पीड़ित अपने खोए धन की वसूली के लिए असहाय महसूस कर रहे हैं।

डेनियल थॉर्नबर्ग, जो सैकड़ों पीड़ितों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, ने कहा, “पीड़ितों को न्यायोचित वसूली का मार्ग नहीं मिल रहा। एक विशेष फंड बनाना आवश्यक है जो इस जब्त संपत्ति का प्रबंधन करे।” वकीलों और पीड़ितों का डर है कि यह राशि अमेरिका की प्रस्तावित स्ट्रैटेजिक बिटकॉइन रिजर्व में चली जाएगी, जिससे पीड़ितों को दोबारा नुकसान हो सकता है।

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न्याय विभाग ने इस विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की है। वहीं, प्रिंस ग्रुप ने भी जब्ती को चुनौती दी है। उनका दावा है कि जब्त बिटकॉइन 2020 से निष्क्रिय थे और इसके बाद 2021–2022 में हुई कथित धोखाधड़ी से इनका कोई संबंध नहीं है। चेन झी को जनवरी 2026 में कंबोडिया से चीन भेज दिया गया था, जब अमेरिका और ब्रिटेन ने समूह पर प्रतिबंध लगाए।

जांच रिपोर्ट और मीडिया रिपोर्ट ने मामला और जटिल बना दिया। इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने पुष्टि की कि अमेरिकी अभियोजन में प्रयुक्त कई तस्वीरें प्रिंस ग्रुप से असंबंधित हैं। एक फोटो, जिसे समूह की हिंसा का प्रमाण बताया गया, 2020 में मंगोलिया में एक मेडिकल घटना से संबंधित थी। दूसरी छवि में दिखाया गया कथित पीड़ित निजी झगड़े में चोटिल था। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

पीड़ितों के वकील अपने क्लाइंट्स के दावों को जब्त क्रिप्टो से जोड़ने में संघर्ष कर रहे हैं। थॉर्नबर्ग ने कंबोडिया जाकर पूर्व कर्मचारियों का साक्षात्कार किया, लेकिन बिटकॉइन से संबंधित कोई दस्तावेज़ नहीं मिला। उन्होंने कहा, “पूरा प्रयास करने के बावजूद वर्तमान प्रक्रिया में संपत्ति वसूलना लगभग असंभव है।”

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि कानूनी बदलाव एक स्थायी समाधान हो सकता है। ऑपरेशन शेमरॉक की संस्थापक एरिन वेस्ट ने कहा, “कानून बनाकर जब्त डिजिटल संपत्ति को सही मालिकों तक पहुंचाना संभव है। यह अवसर खोई संपत्ति को उन लोगों तक लौटाने का है जिन्होंने वास्तविक नुकसान उठाया।”

क्रिप्टो विश्लेषकों ने जब्त बिटकॉइन की उत्पत्ति पर भी सवाल उठाए हैं। ब्लॉकचेन रिकॉर्ड बताते हैं कि 127,271 बिटकॉइन, वर्तमान में लगभग $9 बिलियन मूल्य के, कई वर्षों तक निष्क्रिय रहे और 2024 के मध्य में नए वॉलेट में स्थानांतरित हुए। चीनी सरकार ने दावा किया कि अमेरिका ने 2020 में हैकिंग के जरिए यह क्रिप्टो हासिल किया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया।

यह विवाद डिजिटल संपत्ति जब्ती के कानूनी और नैतिक आयामों को उजागर करता है। पीड़ितों का कहना है कि प्रिंस ग्रुप के जटिल धनशोधन के कारण चोरी हुए धन को ट्रेस करना मुश्किल है, जबकि सरकार दावे करती है कि पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। इससे पीड़ित नीति परिवर्तन या नए कानून पर निर्भर हो गए हैं।

जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ रहा है, $15 बिलियन की यह जब्ती अंतरराष्ट्रीय क्रिप्टो अपराध और डिजिटल संपत्ति के नियंत्रण में आने वाली चुनौतियों की झलक पेश कर रही है। यह स्पष्ट करती है कि सरकार, पीड़ितों के अधिकार और ब्लॉकचेन आधारित अपराधों की जांच के बीच संतुलन बनाना कितना जटिल है।

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