लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नकली और अधोमानक दवाओं के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में सामने आया कि कुछ दवा फर्में बिना वास्तविक स्टॉक और वास्तविक लेनदेन के करोड़ों रुपये का कागजी कारोबार दिखा रही थीं। फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और फर्जी बैंक ट्रांजैक्शन के जरिए नकली दवाओं को बाजार में पहुंचाने का आरोप है।
FSDA की कार्रवाई के बाद लखनऊ के अमीनाबाद थाने में छह एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। मामले में पांच लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की आर्थिक और सप्लाई चेन से जुड़ी कड़ियों को खंगाल रही है।
फर्जी बिलों से चल रहा था करोड़ों का खेल
FSDA की जांच में सामने आया कि मिश्रा एसोसिएट्स अमीनाबाद, मिश्रा मेडिकल एजेंसी बछरावां रायबरेली, श्री अशोक फार्मास्युटिकल्स अमीनाबाद, भारत फार्मा और एमडीएच फार्मा के बीच कथित तौर पर बिना वास्तविक दवा आपूर्ति के क्रॉस-बिलिंग की जा रही थी।
आरोप है कि इन फर्मों ने बिना वास्तविक बैंक ट्रांजैक्शन के कागजों में खरीद और बिक्री दिखाई। इस प्रक्रिया के जरिए नकली और काउंटरफिट दवाओं को वैध दिखाने की कोशिश की गई। मामले में मनीष मिश्रा, आमोद कुमार मिश्रा, सन्नी कश्यप, देवेंद्र शुक्ला और राहुल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी फर्मों के बीच हुए लेनदेन, बिल और दवा सप्लाई रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा सके।
भौतिक सत्यापन में खुली फर्जी कारोबार की पोल
जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा उस समय हुआ जब भारत फार्मा और एमडीएच फार्मा के नाम पर करोड़ों रुपये की दवा खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड मिला, लेकिन मौके पर वास्तविक दवा स्टॉक नहीं पाया गया।
इन फर्मों से जुड़े प्रोपराइटरों अमरीन अहसन और मंतशा ने लिखित बयान देकर आरोप लगाया कि उनकी फर्मों का संचालन उनकी जानकारी के बिना देवेंद्र शुक्ला द्वारा किया जा रहा था।
FSDA अधिकारियों ने जब प्रतिष्ठानों का भौतिक सत्यापन किया तो वहां दवाओं का कोई वास्तविक भंडारण नहीं मिला। साथ ही कई दवाओं के खरीद बिल भी प्रस्तुत नहीं किए गए। इससे जांच एजेंसियों को आशंका हुई कि फर्जी बिलों के जरिए नकली दवाओं की सप्लाई की जा रही थी।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
Augmentin Duo 625 की खरीद में मिला बड़ा अंतर
जांच में ब्रांडेड एंटीबायोटिक दवा Augmentin Duo 625 की खरीद को लेकर भी बड़ा अंतर सामने आया। अधिकारियों के अनुसार, मिश्रा मेडिकल एजेंसी और मिश्रा एसोसिएट्स ने इस दवा की खरीद कीमत करीब ₹116.70 रुपये के बजाय ₹56.60 रुपये दिखाई।
जब जांच टीम ने संबंधित वितरक मेडी किंग फार्मा से जानकारी मांगी तो कंपनी ने ऐसी किसी बिक्री से इनकार कर दिया। इसके बाद नकली दवाओं की सप्लाई की आशंका और मजबूत हो गई।
नौ संदिग्ध फर्मों पर कार्रवाई, कारोबार पर रोक
FSDA ने जांच पूरी होने तक नौ संदिग्ध दवा फर्मों के संचालन पर रोक लगा दी है। इनमें एसकेजी मेडिकल्स, गायत्री फार्मा एंड सर्जिकल, हेल्थ प्लस, एमके फार्मा, मां अम्बे फार्मा, आरएन फार्मा, सनलाइट फार्मा, सोनल फार्मा और सुपरविजन फार्मा शामिल हैं।
इन फर्मों के वित्तीय रिकॉर्ड, लेजर और खरीद-बिक्री दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कई प्रतिष्ठानों को सील भी किया गया है।
राजस्थान और उत्तराखंड तक जुड़े तार
जांच में नकली दवा नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश से बाहर राजस्थान और उत्तराखंड तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। FSDA के अनुसार, अमीनाबाद से बरामद नकली दवाओं का स्रोत राजस्थान से जुड़े कुछ आरोपी हो सकते हैं, जिनके खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है।
वहीं उत्तराखंड के देहरादून में नकली दवा निर्माण से जुड़ी अवैध फैक्ट्री पर भी कार्रवाई की गई है। अधिकारियों का कहना है कि जांच केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
FSDA ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को संदिग्ध थोक कारोबारियों, एजेंटों और सप्लाई चैन पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
