आय से अधिक संपत्ति मामले में बिहार आर्थिक अपराध इकाई की छह स्थानों पर कार्रवाई; ₹9 लाख नकद, 500 ग्राम सोना, 21 बैंक खाते फ्रीज, बीमा पॉलिसियों और अचल संपत्तियों की जांच जारी

₹75 लाख का सोना, दो लग्जरी फ्लैट और कई निवेश दस्तावेज: कार्यपालक अभियंता के ठिकानों पर ईओयू छापे में करोड़ों की कथित संपत्ति का खुलासा

Roopa
By Roopa
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पटना: बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने आय से अधिक संपत्ति के एक कथित मामले में लघु जल संसाधन विभाग, सासाराम में तैनात कार्यपालक अभियंता अरविन्द कुमार चौधरी के खिलाफ व्यापक तलाशी अभियान चलाते हुए करोड़ों रुपये की चल-अचल संपत्तियों का खुलासा होने का दावा किया है। गुरुवार को पटना, मुजफ्फरपुर, सासाराम और बांका स्थित उनके छह परिसरों पर एक साथ छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने लगभग ₹9 लाख नकद, करीब 500 ग्राम सोना जिसकी अनुमानित कीमत ₹75 लाख बताई जा रही है, फ्लैट एवं जमीन में निवेश से जुड़े दस्तावेज, बीमा पॉलिसियां तथा बैंक खातों से संबंधित रिकॉर्ड बरामद किए हैं। ईओयू ने मामले में आगे की वित्तीय जांच शुरू कर दी है।

जांच एजेंसी के अनुसार, अरविन्द कुमार चौधरी ने मार्च 2014 में सरकारी सेवा जॉइन की थी। प्रारंभिक जांच में आरोप है कि लगभग 12 वर्षों की सेवा अवधि के दौरान उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में कहीं अधिक मूल्य की संपत्तियां अर्जित कीं। इन्हीं आरोपों के आधार पर विशेष अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त करने के बाद ईओयू की विभिन्न टीमों ने एक साथ कई स्थानों पर कार्रवाई की।

छापेमारी के दौरान दानापुर के एक पॉश आवासीय परिसर में स्थित दो आलीशान फ्लैटों का पता चला। जांच एजेंसी के अनुसार, इनमें से एक फ्लैट आदमपुर स्थित वीनस पैराडाइज अपार्टमेंट में और दूसरा आशोपुर स्थित वीनस एंपायर अपार्टमेंट में है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों फ्लैटों की वर्तमान बाजार कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इसके अलावा फ्लैटों के इंटीरियर और साज-सज्जा पर भी लाखों रुपये खर्च किए जाने के संकेत मिले हैं, जिनके स्रोत की जांच की जा रही है।

ईओयू ने तलाशी के दौरान लगभग ₹9 लाख नकद और करीब 500 ग्राम सोना भी बरामद किया। एजेंसी के अनुसार, बरामद सोने का बाजार मूल्य लगभग ₹75 लाख है। इसके अतिरिक्त फ्लैट, भूखंड और अन्य अचल संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड तथा विभिन्न वित्तीय अभिलेख भी जब्त किए गए हैं। इन दस्तावेजों की विस्तृत जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि संपत्तियां कब, किस मूल्य पर और किन वित्तीय स्रोतों से खरीदी गईं।

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जांच के दौरान अधिकारियों को 17 बीमा पॉलिसियों से संबंधित दस्तावेज भी मिले हैं। इसके अलावा विभिन्न बैंकों में संचालित 21 बैंक खातों की जानकारी सामने आई है। ईओयू ने इन खातों में उपलब्ध लगभग ₹25 लाख की राशि और संबंधित फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को फिलहाल फ्रीज करा दिया है, ताकि जांच पूरी होने तक धनराशि के हस्तांतरण या निकासी को रोका जा सके। एजेंसी बैंकिंग लेनदेन, निवेश पैटर्न और खातों में हुए जमा-निकासी के रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अभियंता द्वारा अर्जित संपत्तियां उनकी वैध आय के अनुरूप हैं या नहीं। इसके लिए वेतन, सेवा अभिलेख, आयकर विवरण, बैंक स्टेटमेंट, निवेश रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अचल संपत्तियों के दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप पुष्ट होते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

वित्तीय जांच के तहत एजेंसी संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, निवेश के स्रोत, संभावित बेनामी लेनदेन और परिवार के अन्य सदस्यों अथवा निकट संबंधियों के नाम पर खरीदी गई परिसंपत्तियों की भी पड़ताल कर रही है। जब्त किए गए डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और संपत्ति संबंधी अभिलेखों का फोरेंसिक एवं वित्तीय विश्लेषण कराया जाएगा, ताकि धन के प्रवाह और निवेश के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

फिलहाल ईओयू की जांच जारी है। एजेंसी बरामद दस्तावेजों, बैंक खातों, बीमा पॉलिसियों और अचल संपत्तियों के मूल्यांकन के आधार पर कथित आय से अधिक संपत्ति के पूरे दायरे का आकलन कर रही है। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निकाला जाएगा तथा संबंधित पक्षों को कानून के अनुसार अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

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