हजारीबाग के बरही में बैंक ऑफ महाराष्ट्र शाखा में दिनदहाड़े हुई डकैती के बाद पुलिस सोना, नकदी और फरार बदमाशों के सुराग खंगाल रही है।

UP में सॉल्वर के जरिये परीक्षा पास कर 50 लोग कर रहे नौकरी, STF की जांच में बड़े खुलासे

Roopa
By Roopa
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हाल ही में सॉल्वर के माध्यम से सरकारी परीक्षा पास कर नौकरियाँ हासिल करने का मामला सामने आया है। एसटीएफ की जांच में यह खुलासा हुआ कि 50 लोगों ने दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाकर अपनी जगह पर सॉल्वर बैठाकर परीक्षा पास कराई और अब विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हैं। इस खुलासे के बाद उनकी नौकरियों पर तलवार लटक गई है।

एसटीएफ ने बताया कि इस गिरोह का सरगना मनीष मिश्रा था। 25 मार्च 2026 को हुई पहली कार्रवाई में मनीष समेत 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें तीन अभ्यर्थी और तीन सॉल्वर शामिल थे। सभी आरोपी सीबीएसई द्वारा आयोजित जूनियर क्लर्क भर्ती परीक्षा में शामिल थे। जांच में पता चला कि गिरोह पहले अभ्यर्थियों का फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाता था और फिर उनकी जगह पर सॉल्वर उपलब्ध कराता था। सॉल्वर को एक परीक्षा के लिए 20,000–40,000 रुपये तक दिए जाते थे।

सभी दिव्यांग कोटे से हुई भर्ती

सूत्रों के अनुसार, एसटीएफ और पुलिस की जांच में अब तक लगभग 50 ऐसे लोगों के नाम सामने आए हैं, जिन्होंने इस पद्धति के जरिए नौकरी हासिल की। सभी दिव्यांग कोटे से भर्ती हुए थे। इनमें सबसे अधिक चयन बैंक के पदों पर हुआ। अब एसटीएफ और संबंधित विभाग इन सभी को नोटिस भेजने की तैयारी कर रहे हैं। विभागीय कार्रवाई भी होने की संभावना जताई जा रही है।

जांच में यह भी पता चला कि मनीष पिछले एक दशक से विभिन्न परीक्षाओं में सेंधमारी कर रहा था। उसके नेटवर्क में लगभग हर शहर में सॉल्वर मौजूद थे। पुलिस ने अब उन सभी के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दी है जिनकी परीक्षा सॉल्वर ने दी और जिनकी जगह चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र बनवाए गए।

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फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र का खेल

सबसे बड़ा खेल दिव्यांगता प्रमाणपत्र बनाने का था। परीक्षा केंद्रों पर इसे पकड़ना भी मुश्किल था, जिससे यह गतिविधि लंबे समय तक चलती रही। मनीष और उसके सहयोगियों ने यह खेल बड़ी योजना के तहत अंजाम दिया, जिससे कई सरकारी पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियाँ हुईं।

एसटीएफ का कहना है कि सोशल मीडिया की मदद से गिरोह का सुराग मिला। झांसी निवासी एक व्यक्ति ने मनीष के बारे में पोस्ट किए थे, जिनमें बताया गया कि वह परीक्षाओं में सॉल्वर के जरिए अभ्यर्थियों को पास करवाकर नौकरी दिलवाता है। इसके आधार पर एसटीएफ ने सर्विलांस और तकनीकी जांच शुरू की और गिरोह के खिलाफ पर्याप्त सबूत जुटाए।

जांच जारी, भविष्य में और खुलासे हो सकते हैं

एसटीएफ ने कहा कि जांच अभी जारी है और भविष्य में और अधिक फर्जीवाड़े का खुलासा हो सकता है। जिन सभी अभ्यर्थियों की परीक्षा सॉल्वर ने दी, उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। विभागीय अधिकारियों को भी इस मामले में निर्देश दिए जाएंगे ताकि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों से स्पष्ट होता है कि परीक्षा प्रक्रियाओं में सुरक्षा और निगरानी की जरूरत कितनी अहम है। डिजिटल साक्ष्यों, सर्विलांस और तकनीकी जांच के माध्यम से इस तरह की धोखाधड़ी को रोका जा सकता है।

गोवा और अन्य राज्यों में भी इस तरह के साइबर और फर्जीवाड़े से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एसटीएफ की त्वरित कार्रवाई से न केवल दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा रहा है, बल्कि आम नागरिकों और परीक्षा उम्मीदवारों को भी सतर्क किया जा रहा है।

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