मुंबई में फेसबुक पर ₹299 की ड्रेस खरीदने की कोशिश कर रही नर्स को फर्जी डिलीवरी एजेंट और WhatsApp संपर्क के जरिए ₹1 लाख की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया।

₹299 ड्रेस का झांसा बना ₹1 लाख का फंदा: फेसबुक फ्रॉड में मुंबई की नर्स साइबर ठगी की शिकार

Team The420
4 Min Read

मुंबई। सोशल मीडिया पर सस्ते ऑफर्स के जरिए हो रही साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जहां फेसबुक पर मात्र ₹299 की ड्रेस खरीदने का प्रयास एक मुंबई की नर्स को भारी पड़ गया। ठगों ने धीरे-धीरे अलग-अलग बहानों से पैसे मंगवाकर करीब ₹1 लाख की ठगी कर ली।

जानकारी के अनुसार, पीड़िता एक हॉस्टल में रहती है और उसने फेसबुक पर एक बेहद सस्ती ड्रेस का विज्ञापन देखा था। आकर्षक ऑफर देखकर उसने ऑर्डर करने का निर्णय लिया और शुरुआती भुगतान कर दिया। इसके बाद ठगों ने व्हाट्सएप के जरिए संपर्क जारी रखा और खुद को एक फर्जी डिलीवरी सिस्टम से जुड़ा बताया।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा फ्रॉड एक सुनियोजित पैटर्न पर आधारित था, जिसमें शुरुआत में बेहद कम रकम ली गई ताकि भरोसा कायम किया जा सके। इसके बाद धीरे-धीरे “डिलीवरी चार्ज”, “ट्रैकिंग फीस”, “एड्रेस वेरिफिकेशन चार्ज” और अन्य बहानों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान की मांग की गई। पीड़िता को यह भी कहा गया कि ये सभी अतिरिक्त पैसे डिलीवरी के साथ रिफंड कर दिए जाएंगे।

पुलिस के अनुसार, लगभग पांच दिनों के भीतर पीड़िता ने अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कई किस्तों में पैसे भेजे, जिससे कुल नुकसान करीब ₹1 लाख तक पहुंच गया। जब न तो उत्पाद डिलीवर हुआ और न ही संपर्क संभव रहा, तब उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क किया और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

FCRF Launches India’s Premier Certified Data Protection Officer Program Aligned with DPDP Act

अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में साइबर अपराधी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर फर्जी विज्ञापन तैयार करते हैं। आकर्षक कीमत और सीमित समय के ऑफर दिखाकर लोगों को तुरंत भुगतान के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बाद व्हाट्सएप या कॉल के जरिए लगातार बातचीत कर भरोसा बनाए रखा जाता है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक “स्मॉल अमाउंट ट्रैप स्कैम” है, जिसमें पहले छोटी रकम ली जाती है और फिर बार-बार अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे वसूले जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में पीड़ित अक्सर यह सोचकर पैसे भेजते रहते हैं कि उनका ऑर्डर अंततः पूरा हो जाएगा।

जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि ठगों ने एक फर्जी डिलीवरी सेटअप तैयार किया था, जिसमें प्रोफेशनल दिखने वाले मैसेज, ट्रैकिंग लिंक और नकली कस्टमर सपोर्ट शामिल था। यह सब मिलकर एक वैध ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसा माहौल बनाता था, जिससे पीड़ित को शक नहीं हुआ।

साइबर अपराध मामलों में तेजी से बढ़ोतरी के बीच विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर दिखने वाले अत्यधिक सस्ते ऑफर्स अक्सर धोखाधड़ी का हिस्सा हो सकते हैं। किसी भी ऑनलाइन खरीदारी से पहले वेबसाइट या विक्रेता की प्रामाणिकता की जांच करना बेहद जरूरी है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि अनजान लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन या व्हाट्सएप पर भेजे गए ऑफर्स पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी प्रकार के अग्रिम भुगतान से पहले पूरी तरह से सत्यापन करें और संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर रिपोर्ट करें।

यह मामला एक बार फिर इस बात को उजागर करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लालच और जल्दबाजी अक्सर भारी नुकसान का कारण बन सकती है। थोड़े से आकर्षक ऑफर के पीछे छिपा साइबर फ्रॉड किसी भी व्यक्ति को आर्थिक रूप से प्रभावित कर सकता है, यदि समय रहते सतर्कता न बरती जाए।

हमसे जुड़ें

Share This Article