नासिक में स्वयंभू ज्योतिषी अशोक खारत पर अपने पूर्व चार्टर्ड अकाउंटेंट से ₹8.76 करोड़ की कथित ठगी का नया मामला दर्ज होने के बाद जांच और तेज हो गई।

₹8.76 करोड़ की ठगी का आरोप: ‘गॉडमैन’ अशोक खारत पर नया केस दर्ज, धोखाधड़ी और शोषण के मामलों की लंबी फेहरिस्त

Team The420
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नासिक। स्वयंभू ज्योतिषी और ‘गॉडमैन’ के रूप में पहचान बनाने वाले Ashok Kharat के खिलाफ धोखाधड़ी का एक और मामला दर्ज किया गया है। इस बार उन पर अपने ही चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) से ₹8.76 करोड़ की ठगी करने का आरोप लगा है। मामला सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि खारत के खिलाफ चल रही जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है और नए-नए आरोप सामने आ रहे हैं।

यह ताजा मामला 2018 से 2023 के बीच की घटनाओं से जुड़ा है, जिसमें शिकायतकर्ता सीए ने आरोप लगाया है कि खारत ने विश्वास का फायदा उठाकर बड़ी रकम हड़प ली। शिकायत के आधार पर नासिक के सरकारवाड़ा थाने में देर रात मामला दर्ज किया गया।

जांच में सामने आया कि पीड़ित सीए कभी खारत के करीबी सहयोगी थे और उनके ‘शिवानिका ट्रस्ट’ के ट्रस्टी के रूप में काम कर चुके थे। यह ट्रस्ट सिन्नर तालुका स्थित एक मंदिर के प्रबंधन से जुड़ा हुआ था। इसी नजदीकी संबंध का फायदा उठाते हुए खारत ने कथित तौर पर पीड़ित को अपने जाल में फंसाया।

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एफआईआर के अनुसार, खारत ने पीड़ित को यह कहकर डराया कि उसके माता-पिता पर बड़ा संकट आने वाला है और उनकी मृत्यु का खतरा है। इस संकट को टालने के लिए विशेष धार्मिक अनुष्ठान कराने की सलाह दी गई। इन अनुष्ठानों के नाम पर पीड़ित से लगातार बड़ी रकम ली जाती रही। धीरे-धीरे यह रकम करोड़ों तक पहुंच गई, जिसका बाद में कोई हिसाब नहीं दिया गया।

इस मामले के सामने आने के बाद खारत के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है। इनमें से आठ मामले महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े हैं, जबकि चार मामले धोखाधड़ी के हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र के विभिन्न शहरों में उनके खिलाफ सात और शिकायतें दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला व्यापक स्तर पर फैला हो सकता है।

सूत्रों के अनुसार, खारत लोगों की आस्था और व्यक्तिगत कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें अपने प्रभाव में लेते थे। वे खुद को ज्योतिष और आध्यात्मिक शक्ति का जानकार बताकर लोगों को विश्वास दिलाते थे कि वे उनके जीवन की समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। इसी विश्वास के आधार पर वे कथित तौर पर लोगों से बड़ी रकम वसूलते थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में ‘फियर साइकोलॉजी’ और ‘ब्लाइंड फेथ’ का इस्तेमाल किया जाता है। जब किसी व्यक्ति को यह विश्वास दिला दिया जाता है कि उसके जीवन में कोई बड़ा खतरा है, तो वह समाधान के नाम पर किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है। ऐसे में ठगों के लिए यह एक आसान रास्ता बन जाता है।

खारत को हाल ही में एक अन्य मामले में हिरासत में लिया गया था और उन्हें 26 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। यह रिमांड यौन शोषण से जुड़े एक मामले में दिया गया है, जो उनके खिलाफ दर्ज कई मामलों में से एक है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन सभी मामलों के पीछे कोई संगठित पैटर्न है और क्या इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या पीड़ितों की संख्या अभी सामने आए आंकड़ों से कहीं ज्यादा है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के मामलों में आरोपों की गंभीरता और संख्या दोनों ही जांच को जटिल बना देती हैं। कई बार पीड़ित लंबे समय तक सामने नहीं आते, जिससे वास्तविक नुकसान का आकलन करना कठिन हो जाता है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के झांसे में आकर अपनी निजी या वित्तीय जानकारी साझा न करें और किसी भी प्रकार के अनुष्ठान या निवेश के नाम पर बड़ी रकम देने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।

यह मामला एक बार फिर यह दर्शाता है कि आस्था और विश्वास के नाम पर होने वाली ठगी आज भी समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। ऐसे मामलों से बचने के लिए जागरूकता, सतर्कता और तर्कसंगत सोच बेहद जरूरी है।

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