पंचकूला में ‘मैनेजमेंट कोटा’ के नाम पर MBBS एडमिशन दिलाने वाले कथित शिक्षा रैकेट में मुख्य आरोपी मनव सिंगला की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हुई।

MBBS सीट के नाम पर करोड़ों का खेल: ‘मैनेजमेंट कोटा’ के झांसे में ₹37 लाख की ठगी, मुख्य आरोपी गिरफ्तार

Team The420
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पंचकूला। मेडिकल शिक्षा में दाखिले के नाम पर चल रहे एक संगठित ठगी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें ‘मैनेजमेंट कोटा’ के जरिए MBBS सीट दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठे गए। इस मामले में मुख्य आरोपी मनव सिंगला को गिरफ्तार कर लिया गया है, जो लंबे समय से फरार चल रहा था। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

यह मामला पिछले साल 22 दिसंबर को दर्ज हुआ था, जब एक डॉक्टर ने शिकायत दी कि उनकी बेटी को MBBS में दाखिला दिलाने के नाम पर उनसे ₹37 लाख की ठगी की गई। जांच में सामने आया कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित नेटवर्क का हिस्सा है, जो छात्रों और अभिभावकों को टारगेट कर रहा था।

कैसे रचा गया ठगी का जाल?

आरोपी और उसके सहयोगी खुद को मेडिकल कॉलेजों से जुड़े प्रभावशाली संपर्कों वाला बताकर अभिभावकों का विश्वास जीतते थे। ‘मैनेजमेंट कोटा’ के तहत सीमित सीटों का हवाला देकर जल्द निर्णय लेने का दबाव बनाया जाता था। इसके बाद एडवांस फीस और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी।

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जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीड़ितों को फर्जी ऑफर लेटर, नकली काउंसलिंग दस्तावेज और मनगढ़ंत अलॉटमेंट लेटर दिखाए जाते थे, जिससे उन्हें पूरी तरह भरोसा हो जाए कि एडमिशन प्रक्रिया वास्तविक है। कई मामलों में भुगतान बैंक ट्रांसफर और नकद दोनों माध्यमों से लिया गया, जिससे ट्रेसिंग को मुश्किल बनाया जा सके।

फरारी, जमानत और गिरफ्तारी का घटनाक्रम

मामला दर्ज होने के बाद से ही मुख्य आरोपी लगातार गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहा था। उसने अग्रिम जमानत के लिए निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसे राहत नहीं मिली। अंततः 24 अप्रैल को उसे गिरफ्तार किया गया और अगले दिन अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी कई महीनों तक ठिकाने बदलता रहा और जांच से बचने के लिए मोबाइल नंबर और डिजिटल पहचान भी बदलता रहा। हालांकि, तकनीकी साक्ष्यों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर जांच एजेंसियों ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर उसे पकड़ लिया।

और भी पीड़ित सामने आने की आशंका

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह ठगी एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है, जिसमें कई अन्य लोग भी शामिल हैं। आशंका है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से कई और अभिभावक इस रैकेट का शिकार हुए होंगे, जो अभी सामने नहीं आए हैं।

शिक्षा क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी कोई नई बात नहीं है, लेकिन मेडिकल सीटों की भारी मांग और सीमित उपलब्धता इसे और संवेदनशील बना देती है। यही वजह है कि आरोपी इस कमजोरी का फायदा उठाकर लोगों को आसानी से जाल में फंसा लेते हैं।

सिस्टम की खामियों पर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी की जरूरत को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि एडमिशन प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और केंद्रीकृत बनाने से इस तरह की धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जा सकता है।

साथ ही, अभिभावकों और छात्रों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। किसी भी अनधिकृत एजेंट या बिचौलिए के जरिए एडमिशन कराने से बचना चाहिए और केवल आधिकारिक काउंसलिंग पोर्टल्स पर ही भरोसा करना चाहिए।

आगे की कार्रवाई और जांच का दायरा

जांच अब इस दिशा में आगे बढ़ रही है कि आरोपी ने किन-किन लोगों से संपर्क किया, कितनी रकम इकट्ठा की और यह पैसा कहां ट्रांसफर किया गया। बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और डिजिटल डिवाइसेज की फोरेंसिक जांच की जा रही है।

संभावना है कि आने वाले दिनों में इस रैकेट से जुड़े और नाम सामने आएंगे और गिरफ्तारियां भी बढ़ सकती हैं। फिलहाल, यह मामला उन अभिभावकों के लिए एक सख्त चेतावनी है, जो अपने बच्चों के भविष्य के लिए शॉर्टकट अपनाने की कोशिश करते हैं—क्योंकि ऐसे शॉर्टकट अक्सर भारी नुकसान में बदल जाते हैं।

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