एन्क्रिप्टेड क्लाउड बैकअप तक पहुंच के लिए तकनीकी क्षमता नोटिस जारी करने का मामला न्यायाधिकरण पहुंचा; गोपनीयता समूहों ने ‘पुष्टि या खंडन नहीं’ नीति पर सवाल उठाए, एप्पल ने किसी भी बैकडोर से इनकार किया

एन्क्रिप्टेड डेटा पर यूके-एप्पल आमने-सामने, सरकार के ‘गुप्त आदेश’ पर बढ़ा विवाद

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By Roopa
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लंदन। ब्रिटेन सरकार और एप्पल के बीच उपयोगकर्ताओं के एन्क्रिप्टेड डेटा तक सरकारी पहुंच को लेकर विवाद बढ़ गया है। मामला लंदन स्थित जांच शक्तियां न्यायाधिकरण में पहुंच गया है, जहां नागरिक अधिकार समूहों ने सरकार की उस नीति पर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत वह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े तकनीकी क्षमता नोटिस के अस्तित्व की पुष्टि या खंडन नहीं करती। समूहों का कहना है कि संबंधित आदेश की जानकारी पहले ही सार्वजनिक चर्चा में आ चुकी है, इसलिए इस मामले में सरकार का रुख न्यायिक पारदर्शिता और खुली बहस में बाधा बन रहा है।

विवाद की शुरुआत जनवरी 2025 में हुई थी, जब ब्रिटेन ने एप्पल से एन्क्रिप्टेड क्लाउड बैकअप तक सरकारी पहुंच उपलब्ध कराने की मांग की थी। इसके लिए तकनीकी क्षमता नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे नोटिस के जरिए सरकार किसी तकनीकी कंपनी से कानून के तहत मांगी गई जानकारी तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तकनीकी क्षमता बनाए रखने की मांग कर सकती है। उस समय मांग का दायरा ब्रिटेन और अमेरिका के उपयोगकर्ताओं के डेटा तक बताया गया था।

इसके बाद अमेरिकी प्रशासन के साथ कई महीनों तक बातचीत हुई और ब्रिटेन ने वह मांग वापस ले ली। हालांकि, जुलाई 2026 में ब्रिटेन की ओर से एप्पल के केवल ब्रिटेन में रहने वाले ग्राहकों से संबंधित एक और नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। सरकार ने इस दूसरे नोटिस के अस्तित्व की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

ब्रिटिश सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में ‘पुष्टि न करने और खंडन न करने’ की नीति अपनाती है। सरकार का तर्क है कि किसी विशेष कंपनी या सेवा प्रदाता को दिए गए ऐसे आदेशों की जानकारी सार्वजनिक करने से सुरक्षा संबंधी संवेदनशील जानकारी सामने आ सकती है। सरकार के अनुसार, इससे विरोधी तत्वों को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किन कंपनियों या संचालकों पर तकनीकी क्षमता नोटिस लागू हैं।

गुरुवार को न्यायाधिकरण में हुई सुनवाई के दौरान नागरिक अधिकार समूहों की ओर से पेश वकील ने सरकार की इसी नीति को निशाना बनाया। उनका कहना था कि संबंधित आदेश की जानकारी पहले ही सार्वजनिक हो चुकी है। अमेरिका के अधिकारियों और नेताओं की ओर से पहले जारी किए गए आदेश का सार्वजनिक उल्लेख किए जाने तथा ब्रिटेन में सरकारी सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आने का भी हवाला दिया गया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

एप्पल ने भी इस मामले में न्यायाधिकरण का रुख किया है। कंपनी कानूनी तौर पर सरकारी मांग को चुनौती दे रही है, लेकिन कानूनी पाबंदियों के कारण उसकी चुनौती के विस्तृत आधार सार्वजनिक नहीं किए जा सके हैं। एप्पल की ओर से भी सरकार की ‘पुष्टि या खंडन नहीं’ नीति पर आपत्ति जताई गई है। कंपनी के वकील ने इसे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और इस मुद्दे पर सार्थक सार्वजनिक चर्चा के लिए बाधा बताया।

वहीं, सरकार की ओर से पेश वकील ने नीति में बदलाव के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा का तर्क दिया। उनका कहना था कि यदि सरकार ऐसे नोटिस के अस्तित्व की पुष्टि या खंडन करने लगे तो इससे विरोधी तत्वों को संवेदनशील जानकारी मिल सकती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन सेवा प्रदाताओं या संचालकों पर ऐसे आदेश लागू किए गए हैं।

एन्क्रिप्शन को लेकर एप्पल का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। कंपनी का कहना है कि उसकी उन्नत डेटा सुरक्षा सुविधा का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों के एन्क्रिप्टेड डेटा तक कंपनी की भी सीधी पहुंच नहीं होती। कंपनी के अनुसार, किसी एक सरकार के लिए एन्क्रिप्टेड डेटा में प्रवेश का रास्ता तैयार करने से भविष्य में उस रास्ते का इस्तेमाल हैकर या दूसरे दुर्भावनापूर्ण तत्व कर सकते हैं। इससे सभी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा प्रभावित होने का जोखिम है।

ब्रिटेन की मांग के बाद एप्पल ने फरवरी 2025 में ब्रिटेन के उपयोगकर्ताओं के लिए अपनी उन्नत डेटा सुरक्षा सुविधा हटाने का फैसला किया था। कंपनी ने कहा था कि वह अपने सिस्टम में ऐसा बैकडोर नहीं बनाएगी, जिससे किसी सरकार को एन्क्रिप्टेड डेटा तक विशेष पहुंच मिल सके।

अब न्यायाधिकरण को पहले सरकार की ‘पुष्टि या खंडन नहीं’ नीति से जुड़े सवाल पर फैसला करना है। इस मामले की मुख्य सुनवाई अगले साल से पहले होने की संभावना नहीं है। फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर ऐसे आदेशों को पूरी तरह गोपनीय रखा जाए या जब मामला न्यायिक जांच के दायरे में आ चुका हो, तब उसकी सार्वजनिक और कानूनी समीक्षा की पर्याप्त गुंजाइश हो।

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