उडुपी में 76 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ₹22 लाख की साइबर ठगी का मामला सामने आया है।

डिजिटल अरेस्ट का शिकार हुआ रिटायर्ड बैंकर, CBI-ED और साइबर अधिकारी बनकर ठगों ने ठगे ₹22 लाख

Team The420
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उडुपी (कर्नाटक): कर्नाटक के उडुपी में एक 76 वर्षीय रिटायर्ड बैंक कर्मचारी कथित डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का शिकार हो गए। साइबर ठगों ने खुद को साइबर क्राइम विंग, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी बताकर बुजुर्ग से करीब ₹22 लाख की ठगी कर ली।

शिकायत के अनुसार, पीड़ित को 10 जुलाई को दोपहर करीब 3 बजे एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप वीडियो कॉल आया। कॉल रिसीव करने पर सामने मौजूद व्यक्ति पुलिस वर्दी में दिखाई दिया और उसने खुद को मुंबई के कोलाबा स्थित साइबर क्राइम यूनिट का अधिकारी बताया।

आरोपी ने रिटायर्ड बैंक कर्मचारी को बताया कि मुंबई में उनके नाम से एक बैंक खाता जुड़ा हुआ है, जिसके जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। ठगों ने पीड़ित को डराया कि वह एक गंभीर वित्तीय अपराध की जांच के दायरे में हैं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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इसके बाद आरोपियों ने 11 जुलाई से 16 जुलाई तक लगातार व्हाट्सऐप कॉल के जरिए पीड़ित से संपर्क बनाए रखा। इस दौरान उन्होंने खुद को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, ED अधिकारी और साइबर क्राइम अधिकारी बताकर उनका विश्वास हासिल किया।

ठगों ने कथित तौर पर पीड़ित से कहा कि जांच प्रक्रिया के तहत उनके बैंक खातों में मौजूद रकम को आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से एक खाते में ट्रांसफर करना होगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।

फर्जी अधिकारियों की बातों पर विश्वास करते हुए पीड़ित ने आरोपियों द्वारा दिए गए बैंक खाते में कुल ₹22 लाख ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस से शिकायत दर्ज कराई।

इस मामले में CEN क्राइम पुलिस स्टेशन में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों की पहचान करने और ट्रांसफर की गई रकम का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है।

साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, डिजिटल अरेस्ट गिरोह लोगों को डर और मानसिक दबाव में लेने के लिए फर्जी पहचान, लगातार वीडियो कॉल और जांच का भय जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ठग अक्सर पुलिस, जांच एजेंसियों, अदालतों या वित्तीय संस्थानों के अधिकारी बनकर लोगों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देते हैं।

विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए जांच, सत्यापन या खाता सुरक्षित रखने के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहती। ऐसी किसी भी मांग को साइबर ठगी का संकेत मानते हुए तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचना देनी चाहिए।

जांच एजेंसियां अब आरोपियों तक पहुंचने के लिए मोबाइल नंबर, बैंक खातों के रिकॉर्ड और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। बरामद साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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