बागपत में गैंगस्टर उद्यम सिंह की जमानत में कथित फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस ने लोन के बहाने दस्तावेज लेने वाले आरोपियों पर केस दर्ज किया है।

जमानत प्रक्रिया पर सवाल, आम नागरिक के दस्तावेजों से गैंगस्टर को मिली राहत

Team The420
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बागपत: कुख्यात गैंगस्टर उद्यम सिंह की जमानत से जुड़ी कथित फर्जीवाड़े की एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है। सरूरपुर थाने में दर्ज इस मामले में आरोप है कि एक व्यक्ति को बिना कमीशन लोन दिलाने का झांसा देकर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज ले लिए गए, फिर उन्हीं कागजों का इस्तेमाल गैंगस्टर उद्यम सिंह की जमानत में कर दिया गया। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है, जबकि दूसरे आरोपी की तलाश जारी है।

शिकायत जसड़ सुल्तानगर निवासी अनवर ने दर्ज कराई है। अनवर के मुताबिक उसे पैसों की जरूरत थी। इसी दौरान शेखर नाम के व्यक्ति ने उससे संपर्क किया और बिना किसी दलाली या कमीशन के ऋण दिलाने का भरोसा दिया। अनवर ने उस पर विश्वास कर अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज उसे सौंप दिए। बाद में शेखर उसे सरधना कचहरी ले गया, जहां कुछ कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। अनवर को बताया गया कि यह प्रक्रिया लोन पास कराने के लिए जरूरी है और इस पर किसी प्रकार का पांच प्रतिशत कमीशन भी नहीं लिया जाएगा।

लेकिन समय बीतने के बाद भी ऋण स्वीकृत नहीं हुआ। जब अनवर ने शेखर से इस बारे में पूछताछ की, तो आरोप है कि उसे धमकाकर भगा दिया गया। इसके बाद अनवर को जानकारी मिली कि उसके दस्तावेजों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल गैंगस्टर उद्यम सिंह की जमानत के कागजों में किया गया है। यह खुलासा होते ही मामला गंभीर हो गया और पीड़ित ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

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पुलिस के अनुसार, मामले में करनावल निवासी बाबू पंडित और शेखर फोगाट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सीओ सरधना आशुतोष कुमार ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और आरोपी शेखर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं एसपी देहात अभिजीत कुमार ने कहा कि उद्यम सिंह की जमानत निरस्त कराने के लिए न्यायालय में भी रिपोर्ट भेजी गई है।

उल्लेखनीय है कि गैंगस्टर उद्यम सिंह पिछले करीब चार वर्षों से उन्नाव जेल में बंद था और उसे 26 मार्च को जमानत मिली थी। पुलिस के अनुसार, दो अप्रैल को उसकी मौत हो गई थी। वह उद्यम सिंह गैंग का शार्प शूटर आंशु उर्फ मोंटी था, जो रंगदारी और हत्या जैसे मामलों में वांछित था। इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल जमानत प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि किस तरह आम लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा सकता है। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या इस तरह की फर्जीवाड़े की और घटनाएं भी हुई हैं।

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