फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, नकली वारिस दस्तावेज और जाली रिकॉर्ड के जरिए 900 वर्गगज जमीन हड़पने का आरोप; आठ गिरफ्तार, पूर्व स्पीकर के परिवार की भूमिका भी जांच के दायरे में

आंध्र के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष थम्मिनेनी सीताराम के परिवार पर भूमि धोखाधड़ी का शिकंजा, फर्जी दस्तावेजों से कब्जे की साजिश की जांच तेज

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By Roopa
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श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के वरिष्ठ नेता थम्मिनेनी सीताराम के परिवार का नाम कथित भूमि धोखाधड़ी के एक मामले में सामने आने के बाद जांच तेज हो गई है। श्रीकाकुलम पुलिस ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, नकली कानूनी वारिस प्रमाणपत्र और अन्य जाली दस्तावेज तैयार कर 900 वर्गगज की जमीन पर अवैध कब्जा करने की कथित साजिश के मामले में 13 लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें सीताराम के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। पुलिस अब तक इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, मामला श्रीकाकुलम जिले के चापुरम ग्राम पंचायत क्षेत्र में स्थित लगभग 900 वर्गगज खाली भूमि से जुड़ा है। जांच में आरोप है कि एक संगठित समूह ने जमीन के वास्तविक मालिक की मृत्यु दर्शाने के लिए फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार कराया। इसके बाद कथित तौर पर नकली परिवार और कानूनी उत्तराधिकार संबंधी दस्तावेज बनाकर भूमि के स्वामित्व का झूठा दावा तैयार किया गया, ताकि संपत्ति का पंजीकरण अवैध रूप से कराया जा सके।

जांच में यह भी सामने आया है कि कथित तौर पर एक ऐसे व्यक्ति को मृतक का पारिवारिक सदस्य बताकर दस्तावेज तैयार किए गए, जिसका वास्तविक मालिक से कोई संबंध नहीं था। इन दस्तावेजों के आधार पर भूमि का पंजीकरण थम्मिनेनी सीताराम के पुत्र थम्मिनेनी वेंकट श्रीरामुलु चिरंजीवी नाग उर्फ नानी के नाम पर किए जाने का आरोप है। पुलिस का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर स्वामित्व का रिकॉर्ड बदलने का प्रयास किया गया।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में अडाबाला रजनी, तेलुगु सतीश कुमार, सालिपिल्ली लक्ष्मण राव, मुददला उपेंद्र कुमार, जेगुरुपति उपेंद्र राव, मामिडी गोपालकृष्ण, संभाना सांबशिव राव और कुना पेद्दिराजु शामिल हैं। पुलिस ने इनके कब्जे से कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए फर्जी रबर स्टांप, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज भी बरामद किए हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है।

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प्रारंभिक जांच में यह भी आरोप सामने आया है कि संपत्ति पंजीकरण के दौरान आवश्यक गवाहों के हस्ताक्षर ऐसे व्यक्तियों से कराए गए, जिनका वास्तविक भूमि मालिक या संपत्ति से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगा रही हैं कि इस कथित धोखाधड़ी में किन-किन लोगों ने भूमिका निभाई और दस्तावेज तैयार करने से लेकर पंजीकरण तक की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई।

पुलिस संबंधित उप-पंजीयक (Sub-Registrar) की भूमिका की भी जांच कर रही है। यह देखा जा रहा है कि कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के आधार पर संपत्ति का पंजीकरण किस परिस्थिति में किया गया और क्या पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान आवश्यक सत्यापन नियमों का पालन किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में किसी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

जांच एजेंसियां पूर्व विधानसभा अध्यक्ष थम्मिनेनी सीताराम, उनकी पत्नी थम्मिनेनी वाणी और उनके पुत्र की कथित भूमिका की भी जांच कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि अब तक की जांच के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन यदि साक्ष्यों से किसी प्रकार की मिलीभगत या आपराधिक भूमिका स्थापित होती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन के अनुसार, फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र, जाली उत्तराधिकार दस्तावेज और नकली स्वामित्व रिकॉर्ड तैयार कर खाली या विवादित संपत्तियों पर कब्जा करने के मामले देश के कई राज्यों में बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति खरीदने या हस्तांतरण से पहले भूमि रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख, उत्तराधिकार प्रमाणपत्र और पंजीकरण दस्तावेजों का स्वतंत्र सत्यापन करना आवश्यक है। यदि किसी संपत्ति के स्वामित्व को लेकर संदेह हो या दस्तावेज संदिग्ध प्रतीत हों, तो तत्काल संबंधित राजस्व विभाग और पुलिस को सूचना देकर कानूनी जांच सुनिश्चित करनी चाहिए।

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