गुरुग्राम। हरियाणा के Gurugram में सामने आए एक हाईटेक साइबर फ्रॉड रैकेट ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की गहरी साजिश को उजागर कर दिया है। SIM बॉक्स के जरिए चल रहे इस नेटवर्क की जांच में यह सामने आया है कि इसके तार कंबोडिया और फिलीपींस जैसे देशों में बैठे हैंडलर्स से जुड़े हुए हैं। अब तक इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
जांच के अनुसार, यह गिरोह शहर के अलग-अलग इलाकों में किराए के मकानों से SIM बॉक्स (GSM गेटवे) लगाकर काम कर रहा था। इन उपकरणों की मदद से अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को लोकल कॉल में बदल दिया जाता था, जिससे कॉल का असली स्रोत छिप जाता था और साइबर ठगी को अंजाम देना आसान हो जाता था।
किराए के मकानों से चल रहा था पूरा नेटवर्क
छापेमारी के दौरान चक्करपुर और यू-ब्लॉक जैसे इलाकों से कई SIM बॉक्स सेटअप का खुलासा हुआ। यहां से बड़ी संख्या में उपकरण बरामद किए गए, जिनमें SIM बॉक्स, राउटर्स, बैटरियां, Wi-Fi कैमरे और सैकड़ों SIM कार्ड शामिल हैं।
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जांच एजेंसियों का कहना है कि इन ठिकानों को खास तौर पर IT हब के आसपास चुना गया था, ताकि गतिविधियां सामान्य लगें और किसी को शक न हो। कई मामलों में मकान मालिकों को इस गतिविधि की पूरी जानकारी नहीं थी, हालांकि कुछ को जांच में गवाह के रूप में शामिल किया गया है।
विदेश में बैठे हैंडलर्स, कोड नेम से ऑपरेशन
जांच में यह भी सामने आया है कि इस पूरे नेटवर्क को विदेश में बैठे हैंडलर्स नियंत्रित कर रहे थे। ये हैंडलर्स अपनी पहचान छिपाने के लिए कोड नेम का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी वास्तविक पहचान तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, स्थानीय स्तर पर गिरफ्तार किए गए आरोपी सिर्फ ऑपरेटर की भूमिका निभा रहे थे, जबकि असली मास्टरमाइंड अभी भी विदेश में सुरक्षित बैठे हुए हैं। यही कारण है कि जांच एजेंसियों के सामने इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
युवाओं को बनाया जा रहा था ‘ऑपरेटर’
जांच में यह भी सामने आया कि इस तरह के साइबर नेटवर्क में युवाओं को नौकरी या आसान कमाई का लालच देकर शामिल किया जाता था। अधिकतर आरोपी ऐसे लोग थे, जिन्हें प्रति माह ₹20,000 से ₹30,000 तक का भुगतान किया जाता था।
इनका काम केवल उपकरणों को चालू रखना और कॉल रूटिंग सिस्टम को संचालित करना होता था, लेकिन वे इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि इनका इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है।
कैसे काम करता है SIM बॉक्स फ्रॉड
SIM बॉक्स के जरिए विदेशी कॉल्स को इंटरनेट के माध्यम से भारत में लाया जाता है और फिर उन्हें लोकल नंबर के जरिए आगे भेजा जाता है। इससे कॉल रिसीवर को लगता है कि कॉल देश के अंदर से आ रही है, जबकि असल में वह विदेश से होती है।
इस तकनीक का इस्तेमाल बैंकिंग फ्रॉड, OTP स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर और अन्य साइबर अपराधों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
साइबर अपराध का बदलता स्वरूप
इस मामले पर प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा, “आज साइबर अपराध पूरी तरह संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। SIM बॉक्स जैसे उपकरणों का इस्तेमाल कर अपराधी अपनी पहचान छिपाते हैं और जांच एजेंसियों को भ्रमित करते हैं। यह एक तरह का टेक्निकल सोशल इंजीनियरिंग मॉडल है, जिसमें तकनीक और मानव व्यवहार दोनों का फायदा उठाया जाता है।”
जांच जारी, और बड़े खुलासे संभव
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में अभी जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। खास तौर पर उस भारतीय हैंडलर की तलाश की जा रही है, जो इस पूरे नेटवर्क को देश के भीतर संचालित कर रहा था।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाकर विदेशी मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
सतर्कता ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर अपराध कितनी तेजी से तकनीकी रूप से उन्नत हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आम लोगों को अनजान कॉल्स, संदिग्ध लिंक और OTP शेयरिंग से बचना चाहिए।
जैसे-जैसे डिजिटल लेन-देन बढ़ रहा है, वैसे-वैसे साइबर ठगी के तरीके भी जटिल होते जा रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही इस तरह के अपराधों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
