सिद्धार्थ जवाहर ने निवेशकों से ₹314 करोड़ से अधिक जुटाए, लेकिन करीब ₹90 करोड़ ही निवेश किए; वायर फ्रॉड के तीन मामलों में दोषी मानने के बाद अदालत ने ₹282 करोड़ से अधिक लौटाने का आदेश दिया

अमेरिका में दिल्ली के शख्स को 11 साल की सजा, ₹314 करोड़ के पोंजी घोटाले में NFL स्टार ट्रैविस केल्से भी पीड़ित

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By Roopa
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नई दिल्ली। दिल्ली से अमेरिका जाकर पढ़ाई करने वाले सिद्धार्थ जवाहर का कारोबारी सफर करोड़ों रुपये के निवेश घोटाले में 11 साल की जेल की सजा पर खत्म हुआ है। अमेरिका की एक जिला अदालत ने 15 सितंबर को 38 वर्षीय सिद्धार्थ जवाहर को पोंजी योजना चलाने और निवेशकों से धोखाधड़ी करने के मामले में 11 साल जेल की सजा सुनाई। जवाहर ने जनवरी में वायर फ्रॉड के तीन मामलों में अपना अपराध स्वीकार किया था। अदालत ने उसे निवेशकों को करीब ₹282 करोड़ की क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है।

अमेरिकी अभियोजकों के मुताबिक, जवाहर ने जुलाई 2016 से दिसंबर 2023 के बीच निवेशकों से ₹314 करोड़ से अधिक जुटाए, लेकिन इनमें से केवल करीब ₹90 करोड़ ही वास्तविक निवेश में लगाए। मामले में कम से कम 64 पीड़ितों की पहचान हुई है। इनमें अमेरिकी फुटबॉल लीग NFL के खिलाड़ी ट्रैविस केल्से भी शामिल हैं। NBA के खिलाड़ी गैरी हैरिस, टिम हार्डवे जूनियर और मेसन प्लम्ली का नाम भी उन लोगों में सामने आया, जिन्होंने जवाहर से जुड़ी निवेश योजनाओं में पैसा लगाया था।

जवाहर 2005 में 21 साल की उम्र में दिल्ली से अमेरिका गया था। उसने यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास, ऑस्टिन में पढ़ाई की। इसके बाद उसने वित्त क्षेत्र में काम शुरू किया और बाद में वेंचर कैपिटल कारोबार में प्रवेश किया। समय के साथ उसने निवेश, उद्यमिता और परोपकार के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई। वह एंडी रोडिक फाउंडेशन के बोर्ड में करीब चार साल तक रहा और कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़ा रहा।

जवाहर ने अपने शुरुआती जीवन के बारे में बातचीत में बताया था कि उसके माता-पिता उसे और उसकी बहन को पोलियो टीकाकरण शिविरों में ले जाते थे। उसके मुताबिक, इन अनुभवों ने समाज के लिए कुछ करने की इच्छा पैदा की। बाद में वह कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़ा और अमेरिकी सार्वजनिक जीवन की कुछ प्रमुख हस्तियों के साथ भी नजर आया। इन संबंधों और परोपकारी गतिविधियों ने उसके सार्वजनिक व्यक्तित्व को मजबूत किया।

जवाहर ने 2010 के अंत में फ्रैंक क्रासोवेक और जोहर जिव के साथ टेक्सास स्थित Swiftarc Capital LLC की स्थापना की थी। 2013 में कंपनी निवेश सलाहकार के रूप में पंजीकृत हुई। शुरुआत में कंपनी का निवेश खाद्य, पेय और खुदरा क्षेत्र की प्रतिभूतियों में था और किसी एक कंपनी में फंड की बहुत बड़ी हिस्सेदारी लगाने से बचा जाता था।

2015 में रणनीति बदल गई। जवाहर ने ग्राहकों का पैसा पाकिस्तान की सूचीबद्ध कंपनी Philip Morris Pakistan में लगाना शुरू किया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 2019 तक निवेशकों के करीब 99 प्रतिशत फंड इसी कंपनी के शेयर में केंद्रित हो गए। शेयर का मूल्य गिरने के बाद स्थिति और खराब हुई। टेक्सास के नियामकों ने पाया कि सितंबर 2019 के बाद Swiftarc Capital और जवाहर ने इस कम तरलता वाली हिस्सेदारी का मूल्य वास्तविक स्थिति से अधिक दिखाया।

2022 तक जवाहर का कारोबार कई संस्थाओं में फैल चुका था। इनमें Swiftarc Ventures, Swiftarc Venture Labs Fund, Swiftarc Telehealth Labs Fund और Swiftarc Beauty Fund जैसी इकाइयां शामिल थीं। अभियोजकों का आरोप है कि इन निजी निवेश फंडों के जरिए निवेशकों से पैसा जुटाने के लिए औपचारिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मामले का मुख्य आरोप यह है कि निवेशकों को उनके पैसे के इस्तेमाल और निवेश से जुड़े गलत दावे किए गए। अभियोजकों के अनुसार, जवाहर नए निवेशकों से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने में करता था और निवेश पर मुनाफे का गलत दावा करता था। कुछ निवेशकों को यह भी बताया गया कि उनका पैसा खास कंपनियों में लगाया गया है, जबकि कथित तौर पर ऐसा निवेश किया ही नहीं गया था।

अभियोजन पक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि निवेशकों के पैसे का बड़ा हिस्सा निजी विमान यात्राओं, महंगे होटलों, ऑस्टिन और न्यूयॉर्क में अपार्टमेंट, निजी क्लबों की सदस्यता, कपड़ों और महंगी गतिविधियों पर खर्च किया गया।

जवाहर की सोशल मीडिया तस्वीरों में वह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, टीवी होस्ट माइकल स्ट्राहन और अभिनेता केविन हार्ट के साथ नजर आया था। एंडी रोडिक फाउंडेशन से उसके जुड़ाव ने भी उसकी सार्वजनिक छवि को मजबूत किया।

गिरफ्तारी और आरोप तय होने के बाद अभियोजकों ने उस पर जांच को प्रभावित करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उनके मुताबिक, जवाहर ने अपनी बहन से अपना आईफोन दूर से मिटाने को कहा था, ताकि कथित तौर पर सबूत हटाए जा सकें। उस पर आव्रजन स्थिति और वित्तीय मामलों के बारे में गलत जानकारी देने तथा एक पीड़ित को FBI के सामने बयान देने से पहले प्रभावित करने की कोशिश का भी आरोप लगाया गया।

सजा का फैसला आने से पहले जवाहर ने सकारात्मक प्रचार के लिए एक जनसंपर्क फर्म को करीब ₹9 लाख का भुगतान किया था। इस संबंध में एक अनुबंध भी अभियोजन पक्ष ने अदालत में पेश किया था।

अमेरिकी अधिकारियों के रिकॉर्ड के अनुसार, जवाहर भारत का नागरिक था और अमेरिका में रहने की अधिकृत अवधि खत्म होने के बाद भी वहां रहा। रिकॉर्ड में टेक्सास में नशे की हालत में वाहन चलाने से जुड़े उसकी पिछली सजा का भी उल्लेख है। अदालत की सजा के साथ अब मामले में निवेशकों को हुई वित्तीय क्षति की भरपाई की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।

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