नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस ने कम ब्याज पर लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा दिलाने के नाम पर ₹15 लाख की कथित ठगी के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी निजी बैंकों के डायरेक्ट सेलिंग एजेंट (DSA) बनकर लोन की तलाश कर रहे लोगों से संपर्क करते थे और आकर्षक ब्याज दर पर वित्तीय सुविधा दिलाने का भरोसा देते थे। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 36 वर्षीय अदीब खान और अनीश अली के रूप में हुई है। पुलिस ने अदीब खान को कथित मास्टरमाइंड बताया है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से ₹6.95 लाख नकद बरामद किए गए हैं। इसमें ₹500 के 1,390 नोट शामिल हैं। मामले में राजेंद्र नाम का एक कथित सहयोगी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क, अन्य म्यूल बैंक खातों और ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटी है, जिन्हें इसी तरीके से कथित तौर पर ठगा गया हो।
मामला शाहदरा निवासी एक व्यक्ति की शिकायत के बाद सामने आया। शिकायतकर्ता लोन या ओवरड्राफ्ट सुविधा लेना चाहता था। इसी दौरान उसकी कथित तौर पर अदीब खान से बातचीत हुई। पुलिस का कहना है कि खान ने खुद को निजी बैंकों का DSA बताया और कम ब्याज दर पर लोन दिलाने की पेशकश की।
शिकायतकर्ता ने उसकी बात पर भरोसा कर लिया। पुलिस के मुताबिक, उसने तीन चेक एक डिलीवरी सेवा के जरिये कौशांबी भेजे। इनमें ₹15 लाख का एक ब्लैंक साइन किया हुआ चेक भी शामिल था। पीड़ित और आरोपी की आमने-सामने मुलाकात नहीं हुई थी। आरोप है कि बाद में इस चेक का दुरुपयोग किया गया और ₹15 लाख की रकम एक निजी बैंक खाते में जमा कराई गई, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर म्यूल खाते के रूप में किया जा रहा था।
पुलिस के अनुसार, जमा की गई पूरी ₹15 लाख की रकम बाद में दो चेक के जरिये निकाल ली गई। इसके बाद जांच टीम ने बैंक खाते के लेनदेन, रकम निकालने की प्रक्रिया और धन के आगे के प्रवाह की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी और वित्तीय विश्लेषण का सहारा लिया। म्यूल खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, IMEI और IMSI विवरण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, इंटरनेट प्रोटोकॉल विवरण, चैट और बैंकिंग लेनदेन की जांच की गई। रकम जमा होने से लेकर निकासी तक के पूरे ट्रेल का विश्लेषण किया गया। इन जानकारियों के आधार पर पुलिस कथित आरोपियों तक पहुंची।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
लगातार तकनीकी निगरानी और मैदानी जांच के बाद खान और अली को 25 सितंबर को पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, अदीब खान पहले विभिन्न निजी बैंकों के लिए DSA के तौर पर काम कर चुका था और एक निजी बैंक के साथ कमीशन पर थर्ड-पार्टी DSA के रूप में भी काम कर रहा था।
पुलिस का आरोप है कि बैंकिंग क्षेत्र में काम करने के पुराने अनुभव, पेशेवर संपर्कों और ग्राहकों से संबंधित जानकारी तक पहुंच का फायदा उठाकर खान लोन या ओवरड्राफ्ट की तलाश कर रहे लोगों की पहचान करता था। इसके बाद वह संदेश भेजने वाले ऐप के जरिये उनसे संपर्क करता और खुद को वास्तविक DSA बताकर कम ब्याज पर वित्तीय सुविधा उपलब्ध कराने का भरोसा देता था।
पुलिस के अनुसार, भरोसा कायम होने के बाद आरोपियों द्वारा लोन या ओवरड्राफ्ट की प्रक्रिया पूरी करने के बहाने चेक और दस्तावेज हासिल किए जाते थे। बाद में इनका कथित तौर पर दुरुपयोग कर रकम म्यूल खातों में जमा कराई जाती और निकासी की जाती थी।
पुलिस ने बताया कि मौजूदा मामले में कथित तौर पर ठगी गई ₹15 लाख की रकम में से खान को ₹9 लाख, अनीश अली को ₹3 लाख और फरार सहयोगी राजेंद्र को ₹3 लाख मिले। अब पुलिस राजेंद्र की गिरफ्तारी, बाकी रकम की बरामदगी और पूरे धन प्रवाह का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
जांच एजेंसी अन्य म्यूल खातों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की भी पहचान कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपियों ने इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी लोन दिलाने का झांसा देकर कथित तौर पर ठगा था।
