मुंबई। मुंबई के गोरेगांव स्थित एक ट्रैवल कंपनी को सिम स्वैप के जरिए करीब ₹26 लाख की कथित ठगी का मामला सामने आया है। मामले में जालंधर के रहने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कंपनी के बैंक खाते से रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर कराई और बाद में उसका एक हिस्सा नकद निकाला, जबकि बड़ी रकम से सोना खरीदा गया। पुलिस ने बैंकिंग लेनदेन की पड़ताल करते हुए ₹18 लाख की रकम को समय रहते रोक लिया।
पुलिस के मुताबिक यह परिवार द्वारा संचालित ट्रैवल कारोबार है। 20 जुलाई को कंपनी के बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गया। कंपनी के अकाउंटेंट ने दूरसंचार सेवा प्रदाता से संपर्क किया। उसे बताया गया कि नंबर कॉरपोरेट प्लान के तहत जारी हुआ है और नई सिम के लिए ईमेल भेजना होगा। अकाउंटेंट ने प्रक्रिया पूरी कर दी। उसे बताया गया कि चार घंटे के भीतर नई सिम सक्रिय हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
मोबाइल नंबर के काम नहीं करने पर कंपनी प्रबंधन को संदेह हुआ। अगले दिन अकाउंटेंट को बैंक खाते की जांच करने के लिए कहा गया। खाते में कई ऐसे लेनदेन मिले, जिन्हें कंपनी ने अधिकृत नहीं किया था। जांच में करीब ₹25.6 लाख की रकम अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद साइबर पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई गई और रकम के लेनदेन की कड़ियां जोड़ने का काम शुरू किया गया।
जांच में पता चला कि ट्रांसफर की गई रकम के लाभार्थियों में जालंधर निवासी रिकी गिल (32) और दलजीत सिंह (26) शामिल थे। साइबर अपराध हेल्पलाइन के जरिए समय रहते कार्रवाई करते हुए ₹18 लाख की रकम को रोक लिया गया। करीब ₹7.5 लाख की शेष रकम में से कुछ हिस्सा नकद निकाला गया, जबकि अधिकांश रकम का इस्तेमाल सोना खरीदने में किया गया।
पुलिस के अनुसार दलजीत पंजाब से मुंबई आया था और यहीं से रकम निकालने की कथित योजना को अंजाम दिया गया। जांच में तीसरे आरोपी गुरुकमल सिंह की भूमिका भी सामने आई। आरोप है कि उसने सोने की खरीद के लिए ऑर्डर दिए और बाद में उसकी डिलीवरी भी हासिल की। इसके बाद पुलिस ने गुरुकमल को भी गिरफ्तार कर लिया।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
जांच अधिकारियों ने आरोपियों के बीच रकम के लेनदेन और सोने की खरीद से जुड़े रास्ते को खंगाला। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सिम स्वैप के लिए कंपनी के मोबाइल नंबर और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वारदात में किसी अंदरूनी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
सिम स्वैप धोखाधड़ी में अपराधी पहले पीड़ित के मोबाइल नंबर की मौजूदा सिम को निष्क्रिय कराने की कोशिश करते हैं और उसी नंबर पर दूसरी सिम जारी करा लेते हैं। नंबर उनके नियंत्रण में आने के बाद बैंक और अन्य सेवाओं से आने वाले संदेश तथा वन-टाइम पासवर्ड तक पहुंच बन सकती है। इसके जरिए वे बैंक खाते से जुड़े डिजिटल लेनदेन को अंजाम देने का प्रयास करते हैं।
पुलिस ने कहा कि इस मामले में शुरुआती स्तर पर ही एक चेतावनी संकेत मौजूद था। सिम को निष्क्रिय करने से पहले दूरसंचार सेवा प्रदाता की ओर से संबंधित नंबर पर संदेश भेजा जाता है। यदि कंपनी के कर्मचारियों ने मोबाइल नंबर बंद होने और सिम बदलने से जुड़े संदेश को समय रहते देखा होता, तो संदिग्ध गतिविधि की जानकारी पहले मिल सकती थी।
पुलिस ने कंपनियों को सलाह दी है कि बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों में अचानक नेटवर्क बंद होने या सिम बदलने जैसी स्थिति को सामान्य तकनीकी समस्या मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसे मामलों में तुरंत बैंक और दूरसंचार सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए। बैंकिंग खातों पर लेनदेन संबंधी अलर्ट सक्रिय रखना और किसी भी अनधिकृत लेनदेन की जानकारी मिलते ही तुरंत शिकायत करना भी जरूरी है।
जांच फिलहाल जारी है। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस कथित ठगी में और कितने लोग शामिल थे और क्या इसी तरीके से अन्य लोगों या कंपनियों के खातों को भी निशाना बनाया गया था।
