शाहजहांपुर: जनपद में स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर बड़े फर्जीवाड़े को लेकर चर्चा में है। सौ करोड़ के कथित घोटाले और चिकित्सा प्रतिपूर्ति प्रकरण के बाद अब फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि सीएमओ कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने आपसी मिलीभगत से 14 लोगों के दिव्यांग प्रमाणपत्र नियमों को दरकिनार कर जारी कर दिए। मामले की पुष्टि होते ही डीएम Dharmendra Pratap Singh ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
पूरा मामला मिर्जापुर क्षेत्र के ग्राम मझारा बढ़ऊ से जुड़ा है, जहां संतराम कश्यप की शिकायत के बाद जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। इसके बाद विस्तृत जांच में सामने आया कि इन प्रमाणपत्रों को जारी करने में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि इन 14 प्रमाणपत्रों के लिए मेडिकल बोर्ड की कोई संस्तुति ही नहीं ली गई थी, जो कि अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
मुख्य चिकित्साधिकारी Vivek Mishra की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जिन प्रमाणपत्रों को जारी किया गया, उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पूरी प्रक्रिया को जानबूझकर छिपाया गया और फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। जांच में यह भी पाया गया कि बाबुओं ने कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर सिस्टम में हेरफेर किया और बिना वैध स्वीकृति के प्रमाणपत्र जारी कर दिए।
सूत्रों के अनुसार, इन फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किया जा रहा था। दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर कई तरह की सरकारी सुविधाएं मिलती हैं, जिनमें आर्थिक सहायता, आरक्षण और अन्य लाभ शामिल हैं। ऐसे में इस तरह का फर्जीवाड़ा न केवल सरकारी व्यवस्था को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों के अधिकारों पर भी सीधा असर डालता है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएम ने सभी फर्जी प्रमाणपत्रों को तत्काल निरस्त करने के आदेश दिए हैं। साथ ही डीईआईसी मैनेजर, संबंधित पटल सहायकों और डेटा एंट्री ऑपरेटरों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया है कि आरोपियों पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई जाएंगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इसके अलावा संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मियों की सेवाएं समाप्त करने तथा नियमित कर्मचारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। डीएम ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि इन फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर किसी व्यक्ति ने सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया है, तो उस लाभ को निरस्त कर संबंधित राशि की वसूली सुनिश्चित की जाए।
इस बीच, स्वास्थ्य विभाग में पहले से चल रहे चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले के मामले में भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मुकदमा दर्ज कराने के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन अब तक इस मामले में ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है, जबकि समयसीमा तय की गई थी।
अधिकारियों का मानना है कि दिव्यांग प्रमाणपत्र घोटाले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इसमें और बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच का दायरा बढ़ने पर अन्य मामलों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
