नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत शाहदरा साइबर पुलिस ने एक बड़े ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित रूप से फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को उच्च रिटर्न का लालच देकर ठगी की वारदात को अंजाम दे रहे थे। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर निवेशकों को फंसाता था और फिर उनकी जमा पूंजी हड़प ली जाती थी।
पुलिस के अनुसार यह गिरोह सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए लोगों से संपर्क करता था। निवेश के नाम पर आकर्षक योजनाएं दिखाई जाती थीं, जिनमें कम समय में अधिक मुनाफे का दावा किया जाता था। जैसे ही पीड़ित इन योजनाओं में पैसा लगाते, उन्हें एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर लाभ दिखाया जाता, जिससे उनका भरोसा बढ़ जाता। बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद प्लेटफॉर्म बंद कर दिया जाता या पीड़ितों का संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता था।
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जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अलग-अलग बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट्स का इस्तेमाल कर पैसे को कई लेयर में ट्रांसफर करते थे, ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो सके। इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों और नकली पहचान के जरिए कई अकाउंट खोले गए थे, जिनका इस्तेमाल केवल ठगी की रकम इकट्ठा करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब कई पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई कि उनसे ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश के नाम पर लाखों रुपये की ठगी हुई है। शिकायतों के आधार पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की और डिजिटल ट्रांजैक्शन के पैटर्न का विश्लेषण किया। इसके बाद आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि अंतरराज्यीय नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था। शुरुआती संकेतों से यह भी पता चला है कि इस तरह के कई और फर्जी प्लेटफॉर्म सक्रिय हो सकते हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ऑनलाइन ट्रेडिंग स्कीमें तेजी से बढ़ रही हैं, जहां लोगों को बिना किसी वास्तविक मार्केट एक्सपोजर के भारी मुनाफे का लालच दिया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ठग अक्सर प्रोफेशनल दिखने वाले ऐप्स और वेबसाइट्स बनाकर निवेशकों को भरोसे में लेते हैं।
एक साइबर सुरक्षा शोधकर्ता के अनुसार, “ऐसे फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म्स का सबसे बड़ा हथियार सोशल इंजीनियरिंग है। ये लोग निवेशकों की मनोवैज्ञानिक कमजोरियों को समझकर उन्हें जल्दी मुनाफे का लालच देते हैं और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निकाल लेते हैं।”
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी पूरी तरह से जांच करें। साथ ही किसी भी तरह के उच्च रिटर्न वाले दावों पर तुरंत भरोसा न करें, क्योंकि ऐसे अधिकांश मामलों में धोखाधड़ी की आशंका रहती है।
फिलहाल दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि ठगी की कुल रकम कितनी है और कितने लोग इसके शिकार बने हैं
