सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे कारोबार की शुरुआत के कुछ ही मिनटों में निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹15 लाख करोड़ की कमी आ गई। शुरुआती कारोबार में निफ्टी 50 करीब 700 अंक तक गिर गया, जबकि सेंसेक्स में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, वैश्विक बाजारों में कमजोरी और अमेरिकी डॉलर की मजबूती है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतें बढ़ गई हैं, जिससे भारतीय बाजारों में निवेशकों की धारणा कमजोर हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 30 प्रतिशत की तेजी आई और कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं। पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल आयातकों में से एक है, इसलिए तेल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है।
तेल विपणन कंपनियों और एविएशन सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। एचपीसीएल, बीपीसीएल और इंडियन ऑयल के शेयरों में करीब 6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि इंडिगो के शेयर भी शुरुआती कारोबार में 5 प्रतिशत से अधिक टूट गए।
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वैश्विक बाजारों में भी बिकवाली
तेल की कीमतों में तेजी का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका और एशिया के शेयर बाजारों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज से जुड़े फ्यूचर्स में करीब 1,100 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। एशिया में भी बाजार दबाव में रहे और दक्षिण कोरिया के कोस्पी इंडेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक गिरावट के बाद ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी।
वैश्विक बाजारों में ऐसी बिकवाली का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।
मजबूत डॉलर से उभरते बाजारों पर दबाव
गिरावट की एक और वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। डॉलर इंडेक्स 100 के स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ गया।
भारतीय रुपया कमजोर होकर लगभग 92.20 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब माना जा रहा है।
मजबूत डॉलर का असर खास तौर पर मेटल शेयरों और आयात पर निर्भर कंपनियों पर पड़ता है, क्योंकि इससे लागत बढ़ती है और विदेशी निवेश का प्रवाह धीमा पड़ सकता है।
तकनीकी करेक्शन की ओर बढ़ता बाजार
विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी 50 अब तकनीकी करेक्शन के करीब पहुंच रहा है। बाजार की भाषा में करेक्शन तब माना जाता है जब कोई इंडेक्स अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 10 प्रतिशत तक गिर जाता है।
निफ्टी ने इस साल 5 जनवरी को रिकॉर्ड उच्च स्तर बनाया था और मौजूदा गिरावट के बाद सूचकांक उस स्तर से काफी नीचे आ गया है।
आगे भी रह सकती है अस्थिरता
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
निवेशकों को फिलहाल सावधानी बरतने और लंबी अवधि के निवेश पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम आने वाले दिनों में भी भारतीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।
