रिन्यूएबल एनर्जी, ईवी, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर के लिए फंडिंग व पॉलिसी समन्वय का केंद्र; अगले पांच साल में ₹20–22 लाख करोड़ के कर्ज की संभावना

सनराइज सेक्टर्स को रफ्तार देने SBI का ‘CHAKRA’, ₹100 लाख करोड़ के अवसर पर नज़र

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By Roopa
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नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े बैंक State Bank of India (SBI) ने भारत के उभरते “सनराइज सेक्टर्स” को संस्थागत समर्थन और वित्तीय मजबूती देने के लिए CHAKRA नाम से एक विशेष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया है। बैंक का मानना है कि ये सेक्टर्स आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक दिशा तय करेंगे और तेज़ विकास के नए रास्ते खोलेंगे।

CHAKRA का फोकस रिन्यूएबल एनर्जी, एडवांस्ड सेल केमिस्ट्री और बैटरी स्टोरेज, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, सेमीकंडक्टर, डीकार्बोनाइजेशन, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों पर होगा। SBI के आंतरिक आकलन के अनुसार, ये सभी सेक्टर मिलकर अगले पांच वर्षों में करीब ₹100 लाख करोड़ का व्यावसायिक अवसर पैदा कर सकते हैं।

यह सेंटर केवल कर्ज वितरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जटिल और पूंजी-गहन परियोजनाओं के लिए प्रोजेक्ट मूल्यांकन, लंबी अवधि की पूंजी जुटाने और नीति-निर्माताओं, निवेशकों व बैंकों के बीच समन्वय का मंच बनेगा।

सिर्फ कर्ज से काम नहीं चलेगा

CHAKRA के लॉन्च के मौके पर SBI प्रबंधन ने साफ किया कि इन सेक्टर्स की फंडिंग केवल पारंपरिक बैंक कर्ज से संभव नहीं है। बैंक का अनुमान है कि अगले पांच साल में ₹20–22 लाख करोड़ तक के कर्ज अवसर सामने आ सकते हैं, लेकिन इसके साथ इक्विटी और वैकल्पिक फाइनेंसिंग ढांचों की भी अहम भूमिका होगी।

इसी वजह से SBI मेज़ानाइन फाइनेंसिंग और हाइब्रिड स्ट्रक्चर जैसे विकल्पों पर भी काम करने को तैयार है। बैंक जोखिम प्रबंधन, लंबी अवधि के कैपिटल स्ट्रक्चर और उभरती तकनीकों से जुड़े पॉलिसी फ्रेमवर्क तैयार करने में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है।

वैश्विक फाइनेंसिंग नेटवर्क की तैयारी

परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए SBI ने 21 वित्तीय संस्थानों के साथ समझौते (MoU) किए हैं। इसके तहत इन संस्थानों की प्रोजेक्ट फाइनेंस टीमें CHAKRA में SBI के विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करेंगी, जिससे सह-वित्तपोषण आसान होगा और निर्णय प्रक्रिया तेज़ होगी।

जापान के प्रमुख बैंक Sumitomo Mitsui Banking Corporation और Mitsubishi UFJ Financial Group शुरुआती अंतरराष्ट्रीय भागीदारों में शामिल हैं। देश के भीतर Power Finance Corporation, Rural Electrification Corporation और NaBFID जैसे विकास वित्त संस्थान भी इस पहल से जुड़े हैं।

SBI ने संकेत दिया है कि यूरोप और अमेरिका के बैंकों से भी बातचीत चल रही है, जो भारत के क्लीन-टेक और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर्स में बढ़ती वैश्विक रुचि को दर्शाता है।

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अभी CHAKRA की ज़रूरत क्यों

एक तरफ घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा शेयर बाज़ार और अन्य निवेश विकल्पों की ओर जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस की मांग लगातार बढ़ रही है। बैंक अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में नॉन-बैंक पूंजी को आकर्षित करना बेहद ज़रूरी होगा।

CHAKRA के ज़रिये SBI निवेशकों के भरोसे को मज़बूत करने, जोखिम की समझ को मानकीकृत करने और बड़े प्रोजेक्ट्स को ज़्यादा “बैंकेबल” बनाने की कोशिश करेगा।

फंडिंग से आगे: नॉलेज और पॉलिसी सपोर्ट

CHAKRA केवल फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म नहीं होगा। यहां व्हाइट पेपर, सेक्टर रिपोर्ट, नॉलेज प्रोग्राम, इंडस्ट्री मीटिंग और पॉलिसी डिस्कशन आयोजित किए जाएंगे। SBI का इरादा डेवलपमेंट फाइनेंस संस्थानों, मल्टीलेट्रल एजेंसियों, बैंकों, एनबीएफसी, कॉरपोरेट्स, स्टार्टअप्स, यूनिवर्सिटीज़ और थिंक टैंक्स के साथ मिलकर काम करने का है।

बड़ी रणनीति का हिस्सा

CHAKRA, SBI के MSME सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बाद अगला बड़ा कदम है और यह दिखाता है कि बैंक अब सिर्फ बैलेंस-शीट लेंडिंग तक सीमित नहीं रहना चाहता। पूंजी, विशेषज्ञता और साझेदारी के ज़रिये SBI उन सेक्टर्स में उत्प्रेरक भूमिका निभाने की तैयारी में है, जो भारत की औद्योगिक और ऊर्जा संरचना को नया आकार देंगे।

नीति-निर्माताओं और निवेशकों के लिए यह साफ संकेत है कि भारत का सबसे बड़ा बैंक सनराइज सेक्टर्स पर बड़ा दांव लगा रहा है — और उनके लिए पारंपरिक फाइनेंसिंग मॉडल से आगे सोचने को तैयार है।

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