नई दिल्ली। रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई में केंद्रीय वित्तीय जांच एजेंसी ने एक प्रमुख डेवलपर समूह और उससे जुड़े प्रमोटरों की संपत्तियों पर बड़ा शिकंजा कसा है। जांच के तहत ₹1,100 करोड़ से अधिक मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी के आरोपों से जुड़े मामले में की गई है।
जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी और उससे जुड़े समूहों ने वर्षों से चल रही कई आवासीय परियोजनाओं के लिए हजारों खरीदारों से भारी रकम जुटाई थी। अनुमान के मुताबिक, करीब 4,600 घर खरीदारों से कुल ₹2,425.99 करोड़ की राशि एकत्र की गई। आरोप है कि इस राशि का एक बड़ा हिस्सा परियोजनाओं में उपयोग करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए मोड़ दिया गया।
कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी ने हाल ही में छापेमारी भी की थी, जिसमें लगभग ₹15.82 करोड़ मूल्य का सोना-चांदी और करीब ₹15 लाख की विदेशी मुद्रा बरामद की गई। इसके बाद आगे की जांच में कई संपत्तियों की पहचान की गई जिन्हें अब अटैच कर दिया गया है।
जिन संपत्तियों को जब्त किया गया है, उनमें एन ए बिल्डवेल और रियासत पैलेस जैसी संस्थाओं से जुड़ी अचल संपत्तियां शामिल हैं, जो इसी समूह से संबंधित बताई जा रही हैं। इसके साथ ही प्रमुख प्रमोटर और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज कई संपत्तियां भी जांच के दायरे में आई हैं। कुल मिलाकर इन संपत्तियों का अनुमानित बाजार मूल्य ₹1,113.81 करोड़ बताया जा रहा है।
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जांच एजेंसी का दावा है कि फंड को एक जटिल नेटवर्क के जरिए अलग-अलग कंपनियों और शेल इकाइयों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद यह धन अंततः प्रमोटर और उनके करीबी सहयोगियों के नियंत्रण वाली इकाइयों तक पहुंचा। आरोप है कि इन पैसों का उपयोग परियोजनाओं से अलग निजी लाभ और अन्य निवेशों में किया गया।
दूसरी ओर कंपनी ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि ग्राहकों से प्राप्त धन से कहीं अधिक निवेश परियोजनाओं में किया गया है और किसी प्रकार की फंड डाइवर्जन नहीं हुई है। कंपनी ने यह भी दावा किया कि रेरा की निगरानी में हुए फॉरेंसिक ऑडिट में भी कोई अनियमितता साबित नहीं हुई है।
यह पूरा मामला उन कई शिकायतों के बाद सामने आया है जो आर्थिक अपराध शाखा में दर्ज की गई थीं। शिकायतों में आरोप लगाया गया था कि कई परियोजनाओं में देरी और फंड के गलत उपयोग के कारण घर खरीदारों को भारी नुकसान हुआ।
जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले समय में और भी संपत्तियों की पहचान और जांच की जा सकती है। वहीं इस कदम के बाद रियल एस्टेट सेक्टर में एक बार फिर पारदर्शिता और निवेश सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई से निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा, लेकिन साथ ही परियोजनाओं की देरी और वित्तीय गड़बड़ियों पर लगातार निगरानी की भी जरूरत है।
