नए दिशा-निर्देश जारी, जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में आधार अमान्य; डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम पर जोर, एजेंसियों को दी गई स्वतंत्रता

“अब सिर्फ पहचान का साधन, उम्र का नहीं: आधार को लेकर UIDAI का बड़ा फैसला”

Roopa
By Roopa
5 Min Read

नई दिल्ली। देश के सबसे अहम पहचान दस्तावेजों में शामिल आधार कार्ड को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने स्पष्ट कर दिया है कि अब आधार कार्ड को जन्मतिथि या उम्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद सरकारी और निजी संस्थाओं में दस्तावेजों की वैधता को लेकर नई व्यवस्था लागू होने की संभावना है।

UIDAI द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, आधार कार्ड का मूल उद्देश्य केवल व्यक्ति की पहचान सत्यापित करना है, न कि उसकी जन्मतिथि की पुष्टि करना। प्राधिकरण ने साफ कहा है कि आधार में दर्ज जन्मतिथि उपयोगकर्ता द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है, जिसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जाती। ऐसे में इसे आधिकारिक “डेट ऑफ बर्थ प्रूफ” के रूप में मान्यता नहीं दी जा सकती।

इस बदलाव का असर कई सेवाओं और प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है, जहां अब तक आधार को उम्र के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किया जाता रहा है। खासतौर पर बैंकिंग, शिक्षा, भर्ती और सरकारी योजनाओं में दस्तावेजों की जांच के दौरान अब अन्य वैध प्रमाण पत्रों जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड या पासपोर्ट की अहमियत बढ़ सकती है।

UIDAI ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार प्रमाणीकरण (Authentication) की प्रक्रिया केवल यह सुनिश्चित करती है कि दस्तावेज प्रस्तुत करने वाला व्यक्ति वही है, जिसके नाम पर आधार जारी किया गया है। इस प्रक्रिया में बायोमेट्रिक और डेमोग्राफिक डाटा का मिलान केंद्रीय डेटाबेस से किया जाता है, जिससे पहचान की पुष्टि होती है, लेकिन अन्य व्यक्तिगत जानकारियों की वैधता की गारंटी नहीं मिलती।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

हालांकि, प्राधिकरण ने एजेंसियों को कुछ हद तक छूट भी दी है। AUA (Authentication User Agency) और KUA (KYC User Agency) अपने स्तर पर यह तय कर सकती हैं कि वे जन्मतिथि या उम्र के निर्धारण में आधार का उपयोग करना चाहती हैं या नहीं। यानी अंतिम निर्णय संबंधित संस्थानों, मंत्रालयों और राज्य सरकारों पर निर्भर करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डेटा की सटीकता और दस्तावेजों की विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। कई मामलों में गलत जन्मतिथि दर्ज होने या अपडेट के दौरान त्रुटियां सामने आने के बाद इस तरह का निर्णय जरूरी माना जा रहा था। इससे फर्जीवाड़े और गलत जानकारी के आधार पर लाभ लेने की संभावनाओं पर भी रोक लग सकती है।

इस बीच, डिजिटल पहचान को और सुरक्षित और उपयोगी बनाने की दिशा में नई पहल भी सामने आई है। टेक दिग्गज Google ने भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए एक नया फीचर पेश किया है, जिसके तहत आधार से जुड़ी वेरिफाइड क्रेडेंशियल्स को सीधे Google Wallet में सुरक्षित रखा जा सकेगा। यह सुविधा उपयोगकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से अपनी पहचान और उम्र से जुड़ी जानकारी साझा करने का सुरक्षित विकल्प देगी।

कंपनी के अनुसार, इस सिस्टम में “सेलेक्टिव डिस्क्लोजर” तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे उपयोगकर्ता केवल जरूरी जानकारी ही साझा करेंगे और उनकी गोपनीयता बनी रहेगी। शुरुआती चरण में कुछ कंपनियां इस सुविधा को अपनाने जा रही हैं, जहां इसका उपयोग पहचान सत्यापन और सेवाओं तक आसान पहुंच के लिए किया जाएगा।

UIDAI ने अपने बयान में दोहराया कि आधार कार्ड के सभी स्वरूप—फिजिकल कार्ड, ई-आधार, मास्क्ड आधार, ऑफलाइन XML और QR कोड—पहचान और पते के प्रमाण के रूप में मान्य रहेंगे। लेकिन जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर इसकी वैधता खत्म होने के बाद अब लोगों को अन्य दस्तावेजों पर निर्भर रहना होगा।

कुल मिलाकर, यह फैसला आधार प्रणाली को उसके मूल उद्देश्य तक सीमित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इससे दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और पारदर्शी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

हमसे जुड़ें

Share This Article