भुवनेश्वर। ऑनलाइन निवेश के नाम पर बड़े मुनाफे का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले साइबर गिरोह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। यह मामला ओडिशा से जुड़ा है, जहां एक निवेशक को फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए ₹5.14 करोड़ का चूना लगाया गया। यह घटना देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल निवेश घोटालों की गंभीरता को उजागर करती है।
जांच के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान किरण गुरूंग (55) और रणधीर कुमार राय (46) के रूप में हुई है। दोनों पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के रहने वाले हैं। डिजिटल साक्ष्यों और मनी ट्रेल की जांच के बाद इन्हें पकड़ा गया। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि दोनों किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।
मामला 9 अप्रैल 2025 को दर्ज किया गया, जब पीड़ित ने शिकायत में बताया कि उसे सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए शेयर बाजार में निवेश करने के लिए प्रेरित किया गया। आरोपियों ने उसे एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जोड़ा, जहां शुरुआत में भारी मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा जीता गया।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित ने 17 मार्च 2025 से अगले 20 दिनों के भीतर अलग-अलग किश्तों में कुल ₹5,14,00,000 ट्रांसफर कर दिए। प्लेटफॉर्म पर दिखाए जा रहे नकली मुनाफे के कारण उसे लगा कि उसका निवेश तेजी से बढ़ रहा है, जिससे उसने और रकम निवेश कर दी।
हालांकि, जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने की कोशिश की, तो उसका अनुरोध ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने विभिन्न बहानों से और पैसे जमा करने का दबाव बनाया। धोखाधड़ी का एहसास होने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया और औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच शुरू हुई।
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जांच के दौरान अधिकारियों ने मनी ट्रेल का गहन विश्लेषण किया और पाया कि इस पूरे घोटाले में कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। एक संयुक्त बैंक खाते में करीब ₹49.1 लाख ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई है। छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, सिम कार्ड, आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए, जिनका इस्तेमाल इस ठगी में किया गया था।
प्रारंभिक जांच से यह भी सामने आया है कि आरोपी अकेले काम नहीं कर रहे थे। अधिकारियों को शक है कि इसके पीछे एक बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जो फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को निशाना बनाता है और पैसे को विभिन्न खातों के माध्यम से घुमाता है। अन्य आरोपियों की पहचान और बाकी रकम का पता लगाने के प्रयास जारी हैं।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के घोटाले “सोशल इंजीनियरिंग” और वित्तीय धोखाधड़ी का मिश्रण होते हैं। एक Researcher at Algoritha Security के मुताबिक, अपराधी पहले नकली मुनाफा दिखाकर भरोसा जीतते हैं और फिर लोगों को ज्यादा निवेश करने के लिए उकसाते हैं। एक बार पैसा ट्रांसफर हो जाने के बाद उसे वापस पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।
अधिकारियों ने आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है। ऐसे ऑफर से बचें, जो कम समय में ज्यादा मुनाफे का वादा करते हैं।
साथ ही, किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 हेल्पलाइन या आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है। समय पर रिपोर्ट करने से नुकसान को कम करने और जांच में तेजी लाने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, यह मामला ऑनलाइन निवेश के नाम पर बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है। आने वाले समय में जांच के दौरान और बड़े खुलासे होने की संभावना है, जिससे ऐसे गिरोहों पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।
