सिम बॉक्स ऑपरेशन और अवैध कॉलिंग नेटवर्क के जरिए साइबर अपराधों को मिल रहा था बढ़ावा; DoT ने दो वर्षों में की बड़ी कार्रवाई

“देशभर में 44 अवैध टेलीकॉम सेंटर ध्वस्त: साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क पर बड़ा एक्शन”

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By Roopa
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नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड के नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए दूरसंचार विभाग (DoT) ने पिछले दो वर्षों में 44 अवैध टेलीकॉम सेंटरों को ध्वस्त कर दिया है। इनमें मुख्य रूप से सिम बॉक्स ऑपरेशन और अवैध कॉल रूटिंग सिस्टम शामिल थे, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी फर्जी कॉल्स, डिजिटल ठगी और ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों में कर रहे थे।

यह जानकारी गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में सामने आई है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। रिपोर्ट के अनुसार यह कार्रवाई अप्रैल 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच की गई, और इसमें स्थानीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय कर अवैध नेटवर्क को खत्म किया गया।

DoT ने बताया कि ये अवैध टेलीकॉम सेंटर देशभर में फैले हुए थे और इनका उपयोग साइबर अपराधी बड़े पैमाने पर कर रहे थे। इन सेंटरों के जरिए अंतरराष्ट्रीय और फर्जी कॉल्स को रूट किया जाता था, जिससे अपराधियों की पहचान छिपी रहती थी और जांच एजेंसियों के लिए उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता था।

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड जैसे बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई थी। सुनवाई के दौरान यह भी कहा गया कि टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर का दुरुपयोग वित्तीय अपराधों में तेजी से बढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए मजबूत फ्रॉड मैनेजमेंट सिस्टम की आवश्यकता है।

इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) की मार्च में हुई बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि संदिग्ध सिम कार्ड्स को बहुत तेजी से ब्लॉक किया जाए। समिति के अनुसार, साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड्स का जीवनकाल बहुत कम होता है, और यदि उन्हें 2 से 3 घंटे के भीतर निष्क्रिय कर दिया जाए तो बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है।

बैठक में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पॉइंट ऑफ सेल (PoS) एजेंटों द्वारा सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में अनियमितताएं पाई गई हैं। डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) पर कई बार जरूरी डेटा, जैसे PoS की जानकारी और सप्लाई चेन ट्रेसिंग, उपलब्ध नहीं होता, जिससे जांच में बाधा आती है।

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DoT ने अगस्त 2023 के अपने सर्कुलर का भी उल्लेख किया, जिसमें सिम कार्ड की पूरी सप्लाई चेन—उत्पादन से लेकर एक्टिवेशन तक—का रिकॉर्ड रखने और उसे रियल टाइम में अपडेट करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद कई स्थानों पर नियमों का पालन ठीक से नहीं किया जा रहा था।

IDC ने यह भी जोर दिया कि टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियां अपने PoS वेंडर्स की गतिविधियों के लिए जवाबदेह हैं और उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो।

रिपोर्ट के अनुसार, कई अवैध सेंटरों का इस्तेमाल साइबर ठग फर्जी पहचान बनाकर बैंकिंग धोखाधड़ी, OTP फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों के लिए कर रहे थे। ये नेटवर्क बेहद कम समय में सिम बदलकर और कॉल रूटिंग सिस्टम का उपयोग कर पहचान छिपाने में सक्षम थे।

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सरकार ने साइबर फ्रॉड रोकने के लिए निगरानी और ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत किया है। टेलीकॉम नेटवर्क में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम भी विकसित किए जा रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अवैध टेलीकॉम सेंटरों के खिलाफ यह कार्रवाई एक सतत अभियान का हिस्सा है और आने वाले समय में ऐसे नेटवर्क पर और सख्त निगरानी रखी जाएगी। जांच एजेंसियां अब उन ऑपरेटरों और मास्टरमाइंड्स की पहचान में जुटी हैं, जो इन अवैध सेंटरों के पीछे काम कर रहे थे।

यह कार्रवाई देश में साइबर सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और डिजिटल अपराधों पर रोक लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे संगठित नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

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