FATF प्रमुख ने चेताया है कि बड़े स्कैम कंपाउंड की जगह अब AI से लैस छोटे साइबर गैंग बड़े पैमाने पर ठगी चला रहे हैं।

‘प्लेबॉय जॉब’ के नाम पर साइबर ठगी का भंडाफोड़, 11 आरोपी गिरफ्तार

Roopa
By Roopa
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राजसमंद। ‘प्लेबॉय जॉब’, एस्कॉर्ट सर्विस और पार्ट-टाइम नौकरी के नाम पर युवाओं को ऑनलाइन जाल में फंसाकर ठगी करने वाले संगठित साइबर गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। भीम थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह से जुड़े 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 20 स्मार्टफोन, कई एटीएम और डेबिट कार्ड, तीन पीओएस मशीनें तथा साइबर ठगी में इस्तेमाल एक कार बरामद की गई है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर गिरोह के नेटवर्क और ठगी की रकम से जुड़े सुराग जुटा रही है।

पुलिस के अनुसार, 6 सितंबर को सूचना मिली थी कि भीम कस्बे के धर्मेशपुरी क्षेत्र में कुछ युवक फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और ऑनलाइन पहचान के माध्यम से साइबर ठगी कर रहे हैं। सूचना के आधार पर विशेष टीम ने इलाके में घेराबंदी की। मौके पर एक कार के साथ 11 युवक मिले, जिन्हें हिरासत में लेकर उनके मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की जांच की गई। शुरुआती जांच में साइबर ठगी से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने के बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया।

लड़कियों के नाम से बनाते थे फर्जी प्रोफाइल

जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य टेलीग्राम, स्नैपचैट और अन्य ऑनलाइन मंचों पर लड़कियों के नाम से फर्जी प्रोफाइल तैयार करते थे। इन प्रोफाइल पर इंटरनेट से मॉडल युवतियों की तस्वीरें लगाई जाती थीं, ताकि सामने वाले व्यक्ति को प्रोफाइल वास्तविक लगे। इसके बाद युवाओं से बातचीत शुरू कर उन्हें आकर्षक नौकरी और कम समय में अच्छी कमाई का लालच दिया जाता था।

आरोपी खुद को महिला या महिला प्रतिनिधि के तौर पर पेश कर युवाओं को ‘प्लेबॉय जॉब’, एस्कॉर्ट सर्विस और वीवीआईपी महिला ग्राहकों से मुलाकात जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा करते थे। इस तरह बातचीत के जरिए भरोसा कायम करने के बाद पीड़ितों से अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जाते थे।

रजिस्ट्रेशन से सिक्योरिटी फीस तक वसूली

गिरोह युवाओं को घर बैठे हजारों रुपये कमाने का झांसा देकर शुरुआत में रजिस्ट्रेशन फीस जमा कराने के लिए कहता था। इसके बाद सिक्योरिटी फीस, कमीशन और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर लगातार रकम मांगी जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों से अलग-अलग चरणों में भुगतान कराया जाता था, जिससे शुरुआती छोटी रकम के बाद ठगी का कुल नुकसान बढ़ जाता था।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य ठगी की रकम के लेनदेन के लिए अलग-अलग बैंक खातों, एटीएम और डेबिट कार्ड, डिजिटल माध्यमों तथा पीओएस मशीनों का इस्तेमाल करते थे। इस व्यवस्था का उद्देश्य रकम को अलग-अलग माध्यमों से स्थानांतरित करना और लेनदेन की वास्तविक कड़ी को छिपाना था।

20 स्मार्टफोन और तीन पीओएस मशीनें बरामद

पुलिस ने आरोपियों के पास से आईफोन, वनप्लस समेत विभिन्न कंपनियों के 20 स्मार्टफोन बरामद किए हैं। इसके अलावा कई एटीएम और डेबिट कार्ड तथा तीन पीओएस या स्वैप मशीनें भी मिली हैं। साइबर ठगी में इस्तेमाल की गई कार को भी जब्त किया गया है।

बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण पुलिस की जांच में अहम माने जा रहे हैं। इनमें मौजूद बातचीत, सोशल मीडिया खातों, संपर्क नंबरों, भुगतान संबंधी जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों को निशाना बनाया और ठगी की रकम किन खातों या माध्यमों से भेजी गई।

अन्य सदस्यों और खातों की भी जांच

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया है। जांच के दौरान गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका, इस्तेमाल किए गए बैंक खातों, एटीएम कार्ड और डिजिटल भुगतान माध्यमों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों का नेटवर्क राजस्थान के बाहर तक फैला हुआ है या नहीं।

पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर मिलने वाले ऐसे आकर्षक नौकरी प्रस्तावों से सावधान रहने की सलाह दी है, जिनमें नौकरी या कमाई शुरू करने से पहले रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी या अन्य शुल्क मांगा जाए। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन ठगी की स्थिति में तुरंत 1930 पर शिकायत करने या साइबर अपराध पोर्टल के माध्यम से सूचना देने की अपील की गई है।

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