कानपुर में ऑटो चालक के नाम ₹80 लाख के कथित फर्जी लोन मामले की जांच अब 2024 में तैयार किए गए 10-12 अन्य लोन मामलों तक पहुंच गई है।

₹80 लाख के कथित फर्जी लोन की जांच में बड़ा मोड़, 2024 के लोन भी पुलिस के रडार पर

Team The420
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कानपुर। ऑटो चालक के नाम कथित तौर पर ₹80 लाख का लोन लिए जाने के मामले की जांच अब सिर्फ एक खाते या एक ऋण तक सीमित नहीं रहेगी। पुलिस ने वर्ष 2024 में इसी तरह तैयार कराए गए 10-12 अन्य लोन मामलों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। इन मामलों में जिन लोगों के आधार, मोबाइल नंबर और दूसरे दस्तावेज कथित तौर पर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और बैंक से जुड़े लोगों को दिए गए थे, उनसे पूछताछ की जाएगी। जांच का मुख्य बिंदु यह पता लगाना है कि इन लोगों ने वास्तव में कोई उद्यम शुरू किया था या उनके नाम पर केवल कागजी प्रक्रिया पूरी कराकर लोन की रकम का इस्तेमाल कहीं और किया गया।

मामले में पुलिस अब लोन की फाइलों के साथ मशीन खरीद से जुड़े दस्तावेज भी खंगाल रही है। बताया गया है कि संबंधित लोन के लिए मशीनों के कोटेशन एक सप्लायर कंपनी से लिए गए थे और बैंक ने मशीन खरीद की रकम सीधे सप्लायर के खाते में भेजी थी। सप्लायर पक्ष ने पुलिस को रकम मिलने और मशीन भेजे जाने की जानकारी दी है। हालांकि मशीन वास्तव में किस पते पर पहुंची, किसने उसे रिसीव किया और उसके बाद उसका इस्तेमाल कहां हुआ, इसकी पुष्टि के लिए रिसीविंग समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मशीन खरीद के नाम पर बैंक से रकम जारी हुई थी तो कथित लाभार्थी के पते पर मशीन क्यों नहीं मिली। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि करीब दो साल तक मशीन कथित तौर पर संबंधित पते पर नहीं पहुंची, जबकि लोन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए मशीन के कोटेशन और दूसरे दस्तावेज फाइल में लगाए गए थे। इससे मशीन सप्लायर की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस बिल, भुगतान, परिवहन और रिसीविंग के रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मशीन वास्तव में खरीदी और वितरित की गई थी या केवल कागजी प्रक्रिया के आधार पर लोन स्वीकृत कराया गया।

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जांच में लोन की शुरुआती किस्तों का भुगतान भी अहम कड़ी माना जा रहा है। शुरुआती अवधि में किस्तें नियमित रूप से जमा की गई थीं। अब पुलिस यह पता कर रही है कि इन किस्तों का भुगतान किसने किया, किस खाते से रकम गई और कितने समय तक भुगतान जारी रहा। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लोन लेने और उसके भुगतान के पीछे वास्तविक व्यक्ति या समूह कौन था।

ऑटो चालक का दावा है कि उसने केवल ₹10 लाख के लोन से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसके नाम पर रकम बढ़कर ₹80 लाख कैसे हो गई, इसकी जानकारी उसे नहीं है। जांच में अब तक सामने आए लोन दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर मिले हैं। पुलिस इन दस्तावेजों की पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है कि आवेदन से लेकर स्वीकृति और रकम जारी होने तक किस स्तर पर क्या बदलाव किए गए।

पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि ऑटो चालक ने कथित तौर पर 10-12 अन्य लोगों को लोन लेने के लिए तैयार किया था और प्रत्येक फाइल के बदले उसे करीब ₹20 हजार मिलने की बात कही गई है। हालांकि यह बिंदु अभी जांच का हिस्सा है और इसकी पुष्टि के लिए संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस यह भी देखेगी कि जिन लोगों के नाम पर लोन लिया गया, उनके पते पर वास्तव में फर्म या उद्यम स्थापित हुए थे या नहीं।

इसके लिए उन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है, जहां कागजों में संबंधित फर्मों के स्थापित होने का उल्लेख है। कुछ मामलों में हस्ताक्षर से जुड़ी शिकायतें भी सामने आई हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किसने किए और कहीं किसी परिजन या अन्य व्यक्ति के हस्ताक्षर कथित रूप से तो नहीं किए गए।

जांच में जीएसटी रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण होंगे। पुलिस संबंधित विभाग से उन फर्मों के पंजीकरण, कारोबार और रिटर्न से जुड़ी जानकारी लेने की तैयारी कर रही है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि लोन के लिए दिखाई गई कारोबारी गतिविधियां वास्तव में चल रही थीं या केवल दस्तावेजों तक सीमित थीं।

पुलिस अब 2024 के 10-12 अन्य लोन मामलों को इस मामले से जोड़कर देख रही है। यदि इन फाइलों में भी मशीन, फर्म, दस्तावेज और किस्त भुगतान का पैटर्न समान मिलता है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि लोन की वास्तविक राशि और उससे जुड़े पूरे लेनदेन का सत्यापन किया जा रहा है। इसी के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मामला एक व्यक्ति के नाम पर हुए कथित फर्जी लोन तक सीमित है या इसके पीछे कई लोगों और करोड़ों रुपये का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

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