नोएडा में एक फिनटेक कंपनी के सर्वर और API पोर्टल में कथित सेंध लगाकर आठ घंटे में 497 लेन-देन से ₹2.42 करोड़ से अधिक की रकम ट्रांसफर कर दी गई।

नोएडा में सर्वर हैक कर ₹2.42 करोड़ की साइबर ठगी, 8 घंटे में 497 लेन-देन से रकम उड़ाई

Team The420
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नोएडा। सेक्टर-65 स्थित एक फिनटेक कंपनी का सर्वर कथित तौर पर हैक कर साइबर ठगों ने 2 करोड़ 42 लाख रुपये से अधिक की रकम उड़ा ली। आरोपियों ने कंपनी के एपीआई पोर्टल में सेंध लगाकर करीब आठ घंटे के भीतर 497 लेन-देन किए और पूरी रकम 28 अलग-अलग बैंकों के 58 खातों में स्थानांतरित कर दी। कंपनी के निदेशक की शिकायत पर साइबर अपराध थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

कंपनी मोबाइल रिचार्ज, बिल भुगतान, आधार आधारित भुगतान प्रणाली के जरिए नकद निकासी और घरेलू धन हस्तांतरण जैसी फिनटेक सेवाएं उपलब्ध कराती है। पुलिस के अनुसार, 13 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे से रात 8 बजे के बीच कंपनी के सर्वर और एपीआई पोर्टल पर अनधिकृत गतिविधियां हुईं। इसी दौरान लगातार बड़ी संख्या में लेन-देन किए गए और कंपनी के खाते से कुल 2,42,62,576 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में भेज दिए गए।

कंपनी के अधिकारियों को शुरुआत में इन लेन-देन के बारे में तत्काल जानकारी नहीं मिली। नियमित वित्तीय गतिविधियों की समीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लेन-देन सामने आए, जिन्हें कंपनी की ओर से अधिकृत नहीं किया गया था। इसके बाद सर्वर और एपीआई प्रणाली की जांच की गई। जांच में सर्वर तक अनधिकृत पहुंच और कथित हैकिंग के संकेत मिले। इसके बाद कंपनी ने साइबर अपराध से संबंधित पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई और स्थानीय साइबर थाने में भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई।

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पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधियों ने कंपनी के एपीआई पोर्टल का इस्तेमाल कर तेजी से रकम अलग-अलग खातों में भेजी। महज आठ घंटे के भीतर 497 लेन-देन किए जाने से जांचकर्ताओं को आशंका है कि आरोपियों ने कंपनी की भुगतान प्रणाली में सेंध लगाने के बाद स्वचालित या तेजी से निष्पादित किए जाने वाले लेन-देन का इस्तेमाल किया होगा। हालांकि, सर्वर में प्रवेश का वास्तविक तरीका क्या था और आरोपियों ने किस तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाया, इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।

साइबर अपराध थाना पुलिस और तकनीकी टीम अब कंपनी के सर्वर तथा एपीआई पोर्टल के लॉग की फॉरेंसिक जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सर्वर में अनधिकृत प्रवेश किस समय और किस माध्यम से हुआ। इसके अलावा संदिग्ध आईपी एड्रेस, लॉगिन गतिविधियों और एपीआई अनुरोधों की जानकारी भी खंगाली जा रही है। जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि हमलावरों ने कंपनी की प्रणाली में प्रवेश के लिए किसी खाते, प्रमाण-पत्र या अन्य तकनीकी माध्यम का इस्तेमाल किया था या नहीं।

ठगी की रकम जिन 58 बैंक खातों में पहुंची है, उनकी भी जांच की जा रही है। ये खाते 28 अलग-अलग बैंकों से जुड़े बताए गए हैं। पुलिस खाताधारकों की पहचान, खातों में आए पैसों की प्रकृति और रकम आने के बाद की गतिविधियों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इन खातों में पहुंचने के बाद रकम को तत्काल किसी अन्य खाते, डिजिटल वॉलेट या दूसरे वित्तीय माध्यम में भेजा गया या नहीं।

जांचकर्ता लेन-देन की पूरी कड़ी तैयार कर रहे हैं, ताकि रकम के अंतिम लाभार्थियों और संभावित साइबर गिरोह तक पहुंचा जा सके। बैंक खातों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, सर्वर लॉग और अन्य तकनीकी जानकारी को आपस में मिलाकर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना में केवल बाहरी साइबर अपराधी शामिल थे या कंपनी की तकनीकी व्यवस्था और भुगतान प्रणाली की जानकारी रखने वाले किसी व्यक्ति की भूमिका भी रही।

फिलहाल पुलिस ने साइबर हमले से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर तकनीकी जांच तेज कर दी है। सर्वर और एपीआई प्रणाली की फॉरेंसिक पड़ताल के साथ रकम के आगे के प्रवाह की निगरानी की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि साइबर अपराधियों ने कंपनी के सर्वर में किस तरीके से सेंध लगाई और ₹2.42 करोड़ की रकम को किन अंतिम खातों या डिजिटल माध्यमों तक पहुंचाया।

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