पुणे। महाराष्ट्र के पुणे जिले के शिरूर में 65 वर्षीय सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी को पेंशन सत्यापन के नाम पर भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड करना भारी पड़ गया। साइबर ठगों ने व्हाट्सऐप के जरिए भेजी गई फाइल के माध्यम से उनके मोबाइल तक पहुंच हासिल करने के बाद कुछ ही घंटों में पेंशन और बचत खातों से करीब ₹28.70 लाख निकाल लिए। पुलिस के अनुसार, ठगी में रिमोट-एक्सेस तकनीक के इस्तेमाल की आशंका है।
घटना 11 सितंबर की सुबह शुरू हुई। सेवानिवृत्त सैनिक को एक अज्ञात व्हाट्सऐप नंबर से संदेश मिला। इसके साथ “Pension Card Verification Retired Personnel” नाम से एक फाइल का लिंक भेजा गया था। संदेश को सेना की पेंशन से संबंधित मानकर उन्होंने लिंक खोलकर एपीके फाइल डाउनलोड कर ली। एपीके एंड्रॉयड फोन में एप्लिकेशन स्थापित करने वाली फाइल होती है। ठग अक्सर इसी माध्यम का इस्तेमाल पीड़ित के फोन में संदिग्ध एप इंस्टॉल कराने के लिए करते हैं।
फाइल खोलने के कुछ ही समय बाद पीड़ित के पास दूसरे नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया और कहा कि वह वरिष्ठ नागरिक पेंशन खाता तैयार कराने में मदद करेगा। कथित बैंक कर्मचारी ने पीड़ित से मोबाइल फोन चालू रखने को कहा। इसके बाद उनके मोबाइल पर कई ओटीपी आने लगे। कॉल करने वाले ने उन्हें ओटीपी किसी के साथ साझा नहीं करने की बात कही, जबकि इसी दौरान खातों से लेनदेन किए जा रहे थे।
दोपहर बाद सेवानिवृत्त सैनिक को अपने पेंशन और बचत खातों से रकम निकलने के संदेश मिलने लगे। करीब तीन घंटे के भीतर नौ अलग-अलग लेनदेन के जरिए कुल ₹28.70 लाख खाते से निकल गए। इसके बाद उन्होंने अपनी बेटी को घटना की जानकारी दी। बेटी की मदद से साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई गई। शिरूर पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच में यह भी देखा जा रहा है कि एपीके फाइल इंस्टॉल करने के बाद आरोपी किस तरह पीड़ित के मोबाइल और बैंकिंग गतिविधियों तक पहुंचे। पुलिस मोबाइल फोन, कॉल विवरण, संदिग्ध नंबरों और लेनदेन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, रिमोट-एक्सेस आधारित ठगी में अपराधी पहले भरोसेमंद संस्था या सेवा का नाम लेकर पीड़ित को किसी लिंक या एपीके फाइल पर क्लिक करने के लिए तैयार करते हैं। एप को आवश्यक अनुमति मिलने के बाद फोन में मौजूद संवेदनशील जानकारी और बैंकिंग गतिविधियों का दुरुपयोग किया जा सकता है। ऐसे मामलों में ठग तकनीकी नियंत्रण के साथ-साथ सामाजिक दबाव और जल्दबाजी का भी इस्तेमाल करते हैं।
रिमोट-एक्सेस ठगी केवल बैंकिंग संदेशों से शुरू नहीं होती। साइबर अपराधी बिजली बिल बकाया, गैस कनेक्शन केवाईसी, मोबाइल सेवा बंद होने, सरकारी दस्तावेज के सत्यापन या पेंशन संबंधी प्रक्रिया का बहाना बनाकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। संदेश में अक्सर तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाया जाता है ताकि पीड़ित सामान्य सत्यापन प्रक्रिया की जांच किए बिना लिंक खोल दे।
इसके बाद ठग संबंधित विभाग या कंपनी का कर्मचारी बनकर फोन कर सकते हैं। वे एप डाउनलोड करने, मोबाइल में विशेष अनुमति देने या सत्यापन के नाम पर जानकारी भरने के लिए कहते हैं। कई बार ओटीपी मांगने के बजाय पीड़ित को यह भरोसा दिलाया जाता है कि ओटीपी साझा नहीं करना है, जबकि समझौता किए गए उपकरण या बैंकिंग जानकारी का इस्तेमाल लेनदेन के लिए किया जा सकता है।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि व्हाट्सऐप, एसएमएस या किसी अन्य अनजान संदेश के जरिए भेजी गई एपीके फाइल डाउनलोड न करें। विशेष रूप से ऐसे लिंक से बचने की जरूरत है जो आधिकारिक एप स्टोर के बजाय सीधे एप इंस्टॉल करने के लिए कहें या असामान्य अनुमति देने का आग्रह करें।
पुलिस के मुताबिक, नियमित पेंशन, बैंकिंग, बिजली, गैस या सरकारी सेवाओं के सत्यापन के लिए किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजी गई एपीके फाइल इंस्टॉल करने की जरूरत नहीं होती। किसी भी संदिग्ध संदेश या फोन कॉल की स्थिति में संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ज्ञात संपर्क माध्यम से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करना जरूरी है।
