जयपुर: राजस्थान में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और 2023 में लगभग 80,000 मामलों से यह संख्या 2025 तक लगभग 1.25 लाख तक पहुंच गई है। इस बढ़ती चुनौती का सामना करने और प्रभावित लोगों को शीघ्र राहत प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने राजस्थान साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (R4C) स्थापित करने का निर्णय लिया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस योजना की घोषणा 10 जनवरी को आरपीए में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में की, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित थे। इस परियोजना के लिए लगभग ₹100 करोड़ खर्च किए जाएंगे। R4C में पुलिसकर्मियों के साथ तकनीकी विशेषज्ञ और बैंकों के नोडल अधिकारी भी कार्य करेंगे।
केंद्र में 275 विशेषज्ञ होंगे तैनात
R4C के नेतृत्व में एक आईजी-रैंक अधिकारी होंगे, जिनके अधीन एक DIG, 4 SP, 5 ASP, 7 DSP, 8 इंस्पेक्टर और 7 तकनीकी विशेषज्ञ होंगे। कुल मिलाकर इस केंद्र में 275 कर्मी साइबर अपराध मॉनिटरिंग और तत्काल कार्रवाई के लिए तैनात होंगे।
केंद्र का मुख्य उद्देश्य साइबर अपराध की सूचना मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई शुरू करना और प्रभावित लोगों को तेजी से राहत प्रदान करना है। इसके लिए R4C में चयनित कर्मचारियों को I4C और देशभर की अन्य संस्थाओं से तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद ये प्रशिक्षित कर्मी अन्य सदस्यों को प्रशिक्षण देंगे।
R4C के माध्यम से तेज़ राहत और निगरानी
वर्तमान में साइबर ठगी की सूचना I4C तक पहुंचती है, फिर राज्य नोडल एजेंसी, जिला और अंत में पुलिस स्टेशन तक जाती है। इस लंबी प्रक्रिया के कारण FIR समय पर दर्ज नहीं हो पाती और पैसे की रिकवरी मुश्किल हो जाती है। R4C के आने के बाद सूचना सीधे पुलिस स्टेशनों तक पहुंचेगी, जिससे पीड़ितों को त्वरित सहायता मिल सकेगी।
राजस्थान देश का पहला राज्य बनने जा रहा है, जो केंद्र के Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) मॉडल पर आधारित ऐसा केंद्र स्थापित करेगा।
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तत्काल कार्रवाई और राहत के पहलू
1. सूचना तुरंत प्राप्त होगी।
2. कार्रवाई के चरण कम होंगे, और राहत तेज़ होगी।
3. मुआवजा राशि तेजी से लौटाई जाएगी।
4. जनता को जागरूक किया जाएगा।
5. फंड को अवैध ट्रांजेक्शन से ब्लॉक किया जाएगा।
6. अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पिछले तीन वर्षों में राजस्थान में साइबर ठगी के मामले सालाना लगभग 25,000 बढ़ रहे हैं। R4C स्थापित करने का उद्देश्य इसी बढ़ती चुनौती के बीच पीड़ितों को त्वरित सहायता देना और SOPs के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सुरक्षा और रोकथाम पर विशेष ध्यान
R4C डेटा विश्लेषण के माध्यम से संभावित खतरों की पहचान करेगा, तत्काल प्रतिक्रिया देगा और साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगा। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ अपराधियों का पता लगाएंगे, जबकि बैंक प्रतिनिधि खातों में लेनदेन को ट्रैक और फ्रीज करेंगे। हर मामले का संक्षिप्त विवरण संबंधित पुलिस स्टेशन या जिला साइबर सेल को भेजा जाएगा, ताकि FIR दर्ज हो, पैसा रिकवर किया जा सके और आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो सके।
R4C के माध्यम से राजस्थान में साइबर अपराध से निपटने की गति और प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है। यह केंद्र राज्य को डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सुरक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
