नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के कथित Tender Scam की जांच में Anti-Corruption Branch (ACB) ने आरोपियों के Digital Communication की गहन पड़ताल कर कई महत्वपूर्ण कड़ियां जुटाने का दावा किया है। जांच के दौरान 10 Mobile Numbers और सात Email IDs का Forensic Analysis किया गया। अधिकारियों ने IPDR और CDR के जरिए आरोपियों के बीच संपर्क की जानकारी जुटाई, जबकि Forensic Laboratory की मदद से कथित तौर पर पुरानी और Deleted WhatsApp Chats भी Recover की गईं। अब जांच का अगला फोकस कथित भ्रष्टाचार से जुड़े Money Trail पर है।
करीब दो वर्ष चली जांच में ACB ने सरकारी अधिकारियों और निजी कंपनियों से जुड़े लोगों के बीच कथित संपर्क, Tender की Terms and Conditions में बदलाव और परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने से जुड़े फैसलों की पड़ताल की। एजेंसी अब Digital Evidence को सरकारी फाइलों, Tender Documents और Financial Records से मिलाकर कथित मिलीभगत की पूरी कड़ी स्थापित करने में जुटी है।
10 Mobile Numbers और 7 Email IDs की जांच
ACB ने जांच की शुरुआत 10 Mobile Numbers और सात Email IDs के विश्लेषण से की। आरोपियों के IPDR और CDR हासिल कर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि संबंधित लोगों के बीच कब और कितनी बार संपर्क हुआ।
Forensic Analysis के दौरान पुरानी और कथित तौर पर Deleted WhatsApp Chats को Recover किए जाने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी इन Chats और अन्य Digital Records को Tender प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के साथ मिलाकर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि Tender की शर्तें तैयार करने और बदलने में किन लोगों की भूमिका थी।
निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने का आरोप
जांच में आरोप है कि तीन निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए Tender की शर्तों और नियमों में जानबूझकर बदलाव किए गए। कथित तौर पर निजी फर्मों के Proprietors ने अंकित श्रीवास्तव के साथ मिलकर Tender की Terms and Conditions तैयार कीं।
आरोप है कि तैयार की गई शर्तों को बाद में जल बोर्ड के अधिकारियों तक भेजा गया और उन्हीं के आधार पर Tender जारी किए गए। ACB अब Email Communication, WhatsApp Chats और अन्य Digital Evidence के जरिए यह पता लगाने में जुटी है कि इन शर्तों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
Tender की अंतिम तारीख के बाद भी बदली गईं शर्तें
जांच में Tender की अंतिम तारीख के बाद नियमों में कथित बदलाव का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने के लिए प्रक्रिया के बीच में तकनीकी शर्तों में फेरबदल किया गया।
मुख्य अभियंता एससी वशिष्ठ ने कथित तौर पर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए Oxygen Transfer Equipment की क्षमता दो किलोग्राम प्रति किलोवाट प्रति घंटा रखने का सुझाव दिया था। आरोप है कि बाद में इस क्षमता को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया, जिससे Eurotech कंपनी को कथित तौर पर फायदा पहुंचा।
जांच के अनुसार, तकनीकी शर्तें कड़ी होने के बाद कई कंपनियां Tender प्रक्रिया से बाहर हो गईं। इसके बाद Corrigendum जारी कर संबंधित उपकरण की अनिवार्यता समाप्त करने का भी आरोप है। ACB अब इस पूरे घटनाक्रम का दस्तावेजी और Digital Evidence से मिलान कर रही है।
Rohini STP की क्षमता बढ़ाने पर भी सवाल
कथित Tender Scam की जांच में Rohini Sewage Treatment Plant (STP) की क्षमता बढ़ाने का मामला भी महत्वपूर्ण है। परियोजना की क्षमता को पहले 15 MGD से बढ़ाकर 25 MGD किया जाना था। आरोप है कि तत्कालीन जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने बिना विस्तृत अध्ययन या औपचारिक प्रस्ताव के इसे सीधे 30 MGD कर दिया।
ACB के अनुसार, क्षमता में इस बदलाव के कारण परियोजना पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा। जांच में करीब ₹123 करोड़ के अतिरिक्त भार की बात सामने आई है। एजेंसी अब संबंधित सरकारी फाइलों, अनुमोदन प्रक्रिया, लागत आकलन और क्षमता बढ़ाने के आधारों की जांच कर रही है।
छह लोगों की भूमिका जांच के केंद्र में
करीब दो वर्ष की जांच के बाद अंकित श्रीवास्तव, राजा, नागेंद्र यादव, उदित प्रकाश राय, पंकज वर्मा और सत्येंद्र जैन की कथित भूमिका जांच के केंद्र में है। ACB Digital Chats, Email Records, Call Details और सरकारी दस्तावेजों के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास कर रही है।
अब जांच का प्रमुख फोकस Money Trail पर है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर निजी कंपनियों को पहुंचाए गए लाभ से संबंधित रकम का लेनदेन किन खातों से हुआ और उसका इस्तेमाल कहां किया गया।
फिलहाल ACB Tender Documents, Digital Evidence और Financial Records को जोड़कर मामले की पूरी तस्वीर तैयार कर रही है। जांच में सामने आने वाले नए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेनदेन को लेकर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
