उदयपुर/डूंगरपुर (राजस्थान): राजस्थान के डूंगरपुर पुलिस ने कथित तौर पर ₹160 करोड़ से अधिक की अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी दुबई से संचालित एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का सरगना था, जो ग्रामीणों और छात्रों के नाम पर खुलवाए गए बैंक खातों के माध्यम से देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को विभिन्न स्थानों तक पहुंचाने का काम करता था। पुलिस का कहना है कि आरोपी को उदयपुर के बलीचा क्षेत्र से तकनीकी निगरानी और पारंपरिक पुलिस कार्रवाई के आधार पर गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान सीमलवाड़ा निवासी घनश्याम कलाल के रूप में हुई है। जांच में सामने आया है कि वह कथित तौर पर दुबई से नेपाल और भूटान के रास्ते भारत लौटा था। उसकी भारत वापसी की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और खुफिया सूचना के आधार पर उसे हिरासत में ले लिया। फिलहाल उससे पूछताछ कर पूरे नेटवर्क, उसके विदेशी संपर्कों और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह ने सरकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, पैन कार्ड, बैंक खाता खोलने और आसान ऋण दिलाने का झांसा देकर ग्रामीणों और छात्रों के नाम पर 450 से अधिक बैंक खाते खुलवाए। आरोप है कि खाताधारकों से पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड तथा इंटरनेट बैंकिंग संबंधी जानकारी लेकर इन खातों का इस्तेमाल देशभर में हुई साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर और छिपाने के लिए किया जाता था।
जांच एजेंसियों का कहना है कि इन बैंक खातों के जरिए ₹160 करोड़ से अधिक की राशि विभिन्न साइबर अपराधों से प्राप्त कर ट्रांसफर की गई। पुलिस के अनुसार, नेटवर्क का संचालन कथित तौर पर दुबई, जॉर्जिया और कुवैत से किया जा रहा था, जबकि गिरोह के सदस्य आपस में टेलीग्राम और व्हाट्सऐप जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से संपर्क में रहते थे। आरोप है कि खातों में जमा धनराशि बाद में एटीएम से निकाली जाती थी या चेक के जरिए निकालकर गिरोह के सदस्यों में कमीशन के आधार पर बांट दी जाती थी।
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पुलिस ने बताया कि इस मामले में इससे पहले पांच अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों के विश्लेषण से कई अन्य संदिग्धों की भूमिका भी सामने आई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे तथा विदेश में बैठे कथित संचालकों की भूमिका क्या थी।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि इस प्रकार के संगठित साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल अपराधियों की सबसे बड़ी रणनीति बन चुका है। उनके अनुसार, ग्रामीणों, छात्रों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को सरकारी योजनाओं या बैंकिंग सुविधाओं का लालच देकर उनके नाम पर खाते खुलवाना और बाद में उनका दुरुपयोग करना अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोहों का सामान्य तरीका है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को कभी भी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए, क्योंकि ऐसा करना उन्हें अनजाने में गंभीर आपराधिक मामलों में भी फंसा सकता है।
पुलिस अब आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल उपकरणों, डिजिटल संचार और वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कर रही है। जांच एजेंसियां विदेशी एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि साइबर ठगी की रकम किन-किन देशों तक पहुंची और उसका अंतिम लाभार्थी कौन था। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग लेनदेन और विदेशी संपर्कों की जांच पूरी होने के बाद इस अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही पुलिस आम नागरिकों से अपील कर रही है कि वे किसी भी लालच में आकर अपने बैंक खाते या बैंकिंग दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति के उपयोग के लिए उपलब्ध न कराएं, क्योंकि ऐसे खाते साइबर अपराधों में धन शोधन के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
