जयपुर: राजस्थान में साइबर ठग लगातार अपने तरीके बदल रहे हैं और अब मोबाइल अपडेट, ऑनलाइन शॉपिंग, फर्जी लोन ऐप, इन्वेस्टमेंट स्कीम, ट्रेडिंग, यूपीआई ट्रांसफर, रिफंड, एटीएम स्कीमिंग और नकली सोशल मीडिया प्रोफाइल के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं। साइबर पुलिस और विशेषज्ञों का कहना है कि ठगी का यह नेटवर्क अब पहले से कहीं अधिक संगठित और तकनीकी हो चुका है। हाल के मामलों में यह सामने आया है कि अपराधी मोबाइल कंपनियों की ओर से फर्जी “सिस्टम अपडेट” या “5जी एक्टिवेशन” के नाम पर लिंक भेजते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति ऐसे लिंक पर क्लिक करता है, उसका फोन हैक हो सकता है या रिमोट एक्सेस के जरिए बैंक खाते तक पहुंच बनाई जा सकती है।
पुलिस के अनुसार, जयपुर समेत राजस्थान में ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड सबसे तेजी से बढ़ते अपराधों में शामिल है। साइबर अपराधी इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक ऑफर दिखाकर लोगों से यूपीआई या क्यूआर कोड के जरिए भुगतान करा लेते हैं। बाद में या तो सामान नहीं भेजते, या घटिया गुणवत्ता का उत्पाद भेजकर अतिरिक्त रकम मांगते हैं। फर्जी लोन ऐप के मामलों में भी हजारों लोग शिकार हुए हैं। इन ऐप्स के जरिए पहले आसान ऋण का लालच दिया जाता है, फिर मोबाइल डेटा तक पहुंच लेकर खातों से पैसे निकाले जाते हैं या पीड़ित को ब्लैकमेल किया जाता है।
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साइबर पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, राजस्थान में पिछले 30 दिनों में 15,629 साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए। इनमें 6,251 मामले ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड के, 3,438 फर्जी लोन ऐप से जुड़े, 2,813 मामले इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग के, 1,562 गलत यूपीआई ट्रांसफर और रिफंड से जुड़े, 1,250 फोन हैक या ऐप फ्रॉड के, 1,406 एटीएम स्कीमिंग के और 1,250 मामले फेक सोशल मीडिया प्रोफाइल से संबंधित रहे। यह स्थिति बताती है कि साइबर अपराध अब केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का बड़ा खतरा बन चुका है।
जयपुर साइबर क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि असली मोबाइल कंपनियां सिस्टम अपडेट के लिए कभी मैसेज में लिंक नहीं भेजतीं। फोन का अपडेट हमेशा डिवाइस की सेटिंग्स में जाकर ही किया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को अपडेट, 4जी से 5जी अपग्रेड, बैटरी बैकअप सुधारने या किसी अन्य तकनीकी सुविधा के नाम पर लिंक मिलता है, तो उस पर क्लिक नहीं करना चाहिए। यदि कोई लिंक खुल जाने के बाद फोन अपने आप लॉक होने लगे, स्क्रीन पर अजीब गतिविधियां दिखें या रिमोट एक्सेस जैसा व्यवहार लगे, तो तुरंत इंटरनेट बंद कर देना चाहिए और बैंकिंग सेवाएं सुरक्षित करनी चाहिए।
पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक, फाइल या ऑफर को न खोलें, फोन की मीडिया ऑटो डाउनलोड सुविधा बंद रखें, ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्स को केवल आधिकारिक स्रोत से अपडेट करें, और किसी ठगी की आशंका होने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930, संबंधित हेल्पलाइन नंबरों या राष्ट्रीय साइबर पोर्टल www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सावधानी, तकनीकी जागरूकता और त्वरित शिकायत ही ऐसे बदलते साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
