रायबरेली: विदेश में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक युवक से ₹2.70 लाख की कथित ठगी करने और उसका पासपोर्ट अपने कब्जे में रखने का मामला सामने आया है। आरोप है कि सऊदी अरब में रोजगार दिलाने का भरोसा देकर पहले पासपोर्ट लिया गया, फिर वीजा और अन्य औपचारिकताओं के नाम पर चरणबद्ध तरीके से रकम वसूली गई। लंबे समय तक न नौकरी मिली, न पैसा वापस किया गया और न ही पासपोर्ट लौटाया गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने एक महिला समेत दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, पीड़ित जावेद अख्तर रायबरेली जिले के सलोन कस्बे के कच्ची मस्जिद मोहल्ले के निवासी हैं। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत में बताया कि उनकी मुलाकात कुछ समय पहले रायबरेली शहर के तिलियाकोट क्षेत्र निवासी हसीब खान और सदा खान से हुई थी। दोनों ने उन्हें सऊदी अरब में आकर्षक नौकरी दिलाने और विदेश भेजने की पूरी व्यवस्था कराने का भरोसा दिया।
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने दावा किया कि उनके पास विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने का नेटवर्क है और सभी आवश्यक दस्तावेज तथा वीजा की प्रक्रिया वे स्वयं पूरी कराएंगे। कथित तौर पर इसी भरोसे के आधार पर पीड़ित उनके संपर्क में आया और विदेश जाने की तैयारी शुरू कर दी।
आरोप है कि वीजा प्रक्रिया और अन्य औपचारिकताएं पूरी करने का हवाला देते हुए आरोपियों ने सबसे पहले पीड़ित का पासपोर्ट अपने पास रख लिया। इसके बाद जनवरी 2026 के दौरान विभिन्न चरणों में उससे कुल ₹2.70 लाख वसूल लिए गए। शिकायत के अनुसार, दो बार ₹35-35 हजार की राशि क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन ली गई, जबकि शेष ₹2 लाख बैंक खाते में ट्रांसफर कराए गए।
पीड़ित का कहना है कि भुगतान करने के बाद जब भी उसने वीजा, टिकट या नौकरी की प्रगति के बारे में जानकारी मांगी, आरोपी लगातार टालमटोल करते रहे। समय बीतने के बावजूद न तो वीजा जारी हुआ और न ही विदेश भेजने की कोई प्रक्रिया आगे बढ़ी। जब पीड़ित ने अपनी रकम और पासपोर्ट वापस मांगा तो भी उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
काफी समय तक इंतजार करने के बाद जावेद अख्तर को अपने साथ धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर स्थानीय पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली।
पुलिस अब आरोपियों द्वारा लिए गए भुगतान, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इसी तरह का तरीका अपनाकर अन्य लोगों को भी विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगा गया है। जांच के दौरान पासपोर्ट की बरामदगी और कथित वित्तीय लेनदेन की पुष्टि भी की जाएगी।
साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर होने वाली ठगी के मामलों में अक्सर फर्जी एजेंट आकर्षक वेतन, जल्दी वीजा और निश्चित रोजगार का दावा कर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, वीजा शुल्क, टिकट, मेडिकल जांच या सुरक्षा राशि जैसे विभिन्न बहानों से पैसे वसूले जाते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी एजेंसी या व्यक्ति को भुगतान करने से पहले उसके लाइसेंस, पंजीकरण और विदेश मंत्रालय से मान्यता की पुष्टि अवश्य कर लेनी चाहिए तथा मूल पासपोर्ट केवल अधिकृत और सत्यापित संस्थाओं को ही सौंपना चाहिए।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी संगठित गिरोह या अन्य पीड़ितों का पता चलता है तो मामले का दायरा बढ़ाया जाएगा। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति के झांसे में आने से पहले सभी दस्तावेजों और दावों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन अवश्य करें।
