लखनऊ के अमीनाबाद में FSDA ने फर्जी दवा सप्लाई और कागजी खरीद-फरोख्त के कथित नेटवर्क का खुलासा किया है।

अमीनाबाद में फर्जी दवा सप्लाई नेटवर्क का खुलासा, करोड़ों की खरीद कागजों पर दिखाने का आरोप

Team The420
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लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने दवाओं की कथित फर्जी खरीद-फरोख्त और संदिग्ध सप्लाई के बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद वास्तविक आपूर्ति के बिना कागजों पर दर्ज किए जाने, फर्जी बिल तैयार करने और बंद फर्म के नाम से दवा कारोबार दिखाने के आरोप सामने आए हैं। विभाग की तहरीर पर अमीनाबाद थाने में चार फर्म संचालकों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

FSDA की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस कथित नेटवर्क में हेल्थ प्लस के संचालक अंकुर अवस्थी, एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर स्थित पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस के एजाज अहमद को आरोपी बनाया गया है। विभाग अब इन फर्मों के बीच हुए दवा कारोबार, बैंक लेनदेन, बिलिंग और स्टॉक रिकॉर्ड का मिलान कर रहा है।

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क्रॉस बिलिंग से तैयार की गई कथित फर्जी सप्लाई चेन

जांच में आरोप है कि क्रॉस बिलिंग और कागजी बैंक लेनदेन के माध्यम से ऐसी दवाओं को वैध सप्लाई चेन का हिस्सा दिखाया गया, जिनकी वास्तविक आपूर्ति संदिग्ध थी। कथित तौर पर अलग-अलग फर्मों के बीच बिलों का लेनदेन कर दवाओं की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड तैयार किया जाता था। इस प्रक्रिया के जरिए कागजों पर कारोबार बढ़ा हुआ दिखाने और संदिग्ध दवाओं को वैध स्रोत से आया हुआ दर्शाने की कोशिश की गई।

जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन फर्मों के बीच कितने समय से इस तरह के लेनदेन चल रहे थे और इनके जरिए कितनी मात्रा में दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाई गई। बैंक खातों में हुए लेनदेन और बिलों की वास्तविकता का भी सत्यापन किया जा रहा है।

दो साल से बंद फर्म के नाम पर खरीद

जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य सहारनपुर की पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस को लेकर सामने आया है। विभाग के अनुसार यह फर्म करीब दो साल से बंद थी, लेकिन इसके नाम पर दवाओं की खरीद दर्ज मिली। इससे जांचकर्ताओं को संदेह हुआ कि फर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर कागजी कारोबार और दवाओं के डायवर्जन के लिए किया जा रहा था।

इसके अलावा हेल्थ प्लस और राम फार्मा के माध्यम से भी कथित तौर पर दवाओं का कागजी डायवर्जन किए जाने की जानकारी मिली है। अब विभाग यह जांच कर रहा है कि इन फर्मों ने किन कंपनियों से दवाएं खरीदीं, किसे बिक्री दिखाई और वास्तविक स्टॉक कहां पहुंचा।

एमके फार्मा की ₹8.87 करोड़ की खरीद जांच में

FSDA की जांच में एमके फार्मा के रिकॉर्ड भी सवालों के घेरे में आए हैं। वर्ष 2026 में फर्म ने करीब ₹8.87 करोड़ की दवा खरीद दर्ज की थी। हालांकि, रिकॉर्ड की जांच के दौरान करीब 39.20 लाख जोरिल एम-1 दवाओं का हिसाब नहीं मिला। इतनी बड़ी मात्रा में दवा का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के बाद विभाग ने खरीद और स्टॉक से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच शुरू की।

अधिकारियों को संदेह है कि रिकॉर्ड में दर्ज खरीद और वास्तविक दवा आपूर्ति के बीच अंतर हो सकता है। इसके लिए संबंधित निर्माताओं और सप्लायर से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

जोरिल एम-1, ऑगमेंटिन और डेक्सोरेंज के बिल संदिग्ध

जांच के दौरान जोरिल एम-1, ऑगमेंटिन और डेक्सोरेंज सिरप से जुड़े कथित फर्जी बिल भी सामने आए। विभाग ने संबंधित दवा निर्माताओं से इन बिलों और बैच नंबरों का सत्यापन कराया। निर्माताओं ने कथित तौर पर इन दवाओं की बिक्री से इनकार किया है। जांच में संबंधित बैच भी प्रथम दृष्टया फर्जी पाए जाने की बात सामने आई है।

अब FSDA यह पता लगाने में जुटा है कि इन दवाओं का निर्माण और सप्लाई वास्तव में कहां से हुई, फर्जी बैच और बिल किसने तैयार किए और उन्हें बाजार तक पहुंचाने में कौन-कौन लोग शामिल थे। विभाग दवा दुकानों, थोक विक्रेताओं और संबंधित फर्मों के रिकॉर्ड की भी पड़ताल कर सकता है।

मामले में दर्ज FIR के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। पुलिस और FSDA आरोपियों के बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड, बिलिंग दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और सप्लाई चैन से जुड़े कागजात की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही कथित फर्जीवाड़े की वास्तविक रकम और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी। फिलहाल चारों फर्म संचालक मामले में आरोपी हैं और पूरे दवा कारोबार की वैधता की जांच जारी है।

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