रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न परीक्षाओं में कथित तौर पर पैसे लेकर सीटें बेचने और परिणामों में हेरफेर करने के मामले की जांच अब बड़े दायरे में पहुंच गई है। CID की जांच में 400 से अधिक अभ्यर्थियों के अलावा पंजाब और हरियाणा से कथित तौर पर सॉल्वर उपलब्ध कराने वाले कुछ शिक्षाविदों के नाम भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी आरोपियों के स्वीकारोक्ति बयानों के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि किन परीक्षाओं में कितने अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से लाभ पहुंचाया गया।
CID की गिरफ्त में आए अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान में परीक्षा प्रक्रिया के अलग-अलग स्तरों पर गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। उसके अनुसार, सरकारी विभाग में कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले सानंद प्रकाश के हरिओम टावर स्थित फ्लैट में पंजाब और हरियाणा से लाए गए लोगों से FRO परीक्षा की मेंस परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाएं लिखवाई गई थीं। जांच एजेंसी अब इस दावे की पुष्टि के लिए संबंधित लोगों, स्थानों और परीक्षा रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है।
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जांच में यह आरोप भी सामने आया है कि कुछ अभ्यर्थियों के मेंस में अंक बढ़ाने के लिए कॉपी जांचने वाले प्रोफेसर्स को कथित तौर पर प्रभावित किया जाता था। आरोपियों के बयानों के मुताबिक ACF, FRO, 14वीं JPSC सिविल सेवा और JPSC बैकलॉग परीक्षाओं में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को कथित तौर पर भारी रकम के बदले पास कराने की व्यवस्था की गई थी। इससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और चयन व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं।
श्वेता गुप्ता की जानकारी में गड़बड़ी का आरोप
टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के कथित बयान में JPSC की तत्कालीन परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता का नाम सामने आया है। रामवीर के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी कई कथित गड़बड़ियां उनकी जानकारी में की जाती थीं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जांच में OMR प्रोसेसिंग और रिजल्ट पब्लिकेशन से जुड़े तकनीकी काम को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कथित तौर पर इसका तकनीकी प्रभार प्रदीप कुमार सिंह के पास था और अभ्यर्थियों की OMR शीट में छेड़छाड़ तथा टेंपरिंग की जिम्मेदारी भी उसी पर होने का आरोप लगाया गया है। हेमंत और संजय नाम के कर्मचारियों द्वारा OMR में बदलाव किए जाने की बात भी बयानों में सामने आई है।
आरोप है कि जिन अभ्यर्थियों की OMR शीट में कथित तौर पर टेंपरिंग की जाती थी, उनसे वसूली गई रकम का 20 प्रतिशत हिस्सा प्रदीप कुमार सिंह को दिया जाता था। वहीं, अभय तिवारी पर श्वेता गुप्ता के लगातार संपर्क में रहकर अभ्यर्थियों की कथित लाइजनिंग संभालने का आरोप लगाया गया है। जांच में 40 लाख रुपये के भुगतान का भी उल्लेख सामने आया है।
CDPO और 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर भी दावे
अभय तिवारी के कथित बयान के अनुसार, CDPO परीक्षा में राज्य के बाहर के कई अभ्यर्थी सामान्य सीटों पर चयनित हुए थे। उसने एक IAS अधिकारी का नाम लेते हुए दावा किया कि TDPL के निदेशक सतपाल सिंह और रामवीर सिंह ने उसे बताया था कि 14वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में उनके तीन अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा में पास कराया गया था। हालांकि, अभय ने उन अभ्यर्थियों के नामों की जानकारी होने से इनकार किया।
रामवीर सिंह के कथित बयान में ACF और 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ी आंसर की को लेकर भी महत्वपूर्ण दावा किया गया है। उसके अनुसार, उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन से पहले ही आंसर की WhatsApp के माध्यम से TDPL कर्मचारी उस्मान, प्रदीप कुमार सिंह और श्वेता गुप्ता के बीच साझा की गई थी। आरोप है कि इसका उद्देश्य OMR और OSM में कथित टेंपरिंग के लिए रास्ता तैयार करना था।
CID अब आरोपियों के बयानों, परीक्षा रिकॉर्ड, OMR शीट, डिजिटल साक्ष्यों और आर्थिक लेनदेन की जानकारी का मिलान कर रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि कथित तौर पर पैसे देकर लाभ लेने वाले 400 से अधिक अभ्यर्थियों में कितने लोगों ने जानबूझकर इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया और कितनों को किसी बिचौलिये ने गुमराह किया। जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित परीक्षा घोटाले में शामिल नेटवर्क और लाभार्थियों की संख्या और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
